एक आदर्श जगत में, सभी छात्र हर वर्ष सीखने के अच्छे लाभ प्राप्त करेंगे, जिसके लिए उन्हें शिक्षा के नवीनतम सिद्धांतों के बारे में जानने वाले उन शिक्षकों से मदद मिलेगी जो इन सिद्धांतों को हर छात्र की अलग जरूरतों पर लागू करने के तरीकों से अवगत होंगे। शिक्षक यह काम विद्यालय द्वारा प्रदान किए गए संसाधनों से संपन्न कर सकेंगे और वह भी तब जबकि उनके जीवन में अन्यत्र चाहे जो घट रहा होगा।
तथापि, हम एक आदर्श जगत में नहीं रहते हैं। शिक्षक भी मनुष्य होते हैं जो कभी-कभी अपना कार्य उत्कृष्टता से नहीं दर्शा पाते, यदि यह बात उन्हें पता हो, तो सुधार करने के लिए उन्हें शायद जरा सी ही सहायता की जरूरत पड़ेगी – लेकिन समस्या तब होती है जब शिक्षक को पता नहीं चलता कि वे बेहतर कर सकते हैं और छात्रों की सीखने की प्रक्रिया शिथिल हो रही है। यह एक संवेदनशील मुद्दा है जिसे सावधानी से संभालने की जरूरत है, लेकिन यह अच्छे विद्यालय नेता की भूमिका और दायित्व का हिस्सा है।
इस इकाई में आप सीखेंगे कि शिक्षक के काम के बारे में प्रमाण कैसे एकत्र किया जाता है और नियोजन से समर्थित विकास गतिविधियों का उपयोग करते हुए उसे सुधारने की कुछ अवधारणाओं का अन्वेषण करेंगे। आपके शिक्षक छात्रों की उपलब्धि के सबसे बड़े निर्धारक हैं और इसीलिए शिक्षक के काम को प्रोत्साहित करने में आपका प्रभाव छात्रों की सीखने की प्रक्रिया और नतीजों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करेगा। एक विद्यालय नेता के रूप में आप शिक्षकों को अपने कार्य-प्रदर्शन को बेहतर करने में सहायता देकर उन्हें अधिक प्रभावी होने में सक्षम कर सकते हैं।
इस इकाई में काम करते समय आपसे अपनी सीखने की डायरी में नोट्स बनाने को कहा जाएगा। यह डायरी एक किताब या फोल्डर है जहाँ आप अपने विचारों और योजनाओं को एकत्र करके रखते हैं। संभवतः आपने अपनी डायरी शुरू कर भी ली है।
इस इकाई में आप अकेले काम कर सकते हैं, लेकिन यदि आप अपने सीखने की चर्चा किसी अन्य विद्यालय नेता के साथ कर सकें तो आप और भी अधिक सीखेंगे। यह आपका कोई सहकर्मी, जिसके साथ आप पहले से सहयोग करते आए हैं, या कोई व्यक्ति हो सकता है जिसके साथ आप नए संबंध का निर्माण कर सकते हैं। इसे नियोजित ढंग से या अधिक अनौपचारिक आधार पर किया जा सकता है। आपकी सीखने की डायरी में बनाए गए आपके नोट्स इस प्रकार की बैठकों के लिए उपयोगी होंगे, और साथ ही आपकी दीर्घावधि की शिक्षण-प्रक्रिया और विकास का प्रतिचित्रण भी करेंगे।
आपके शिक्षक में स्पष्ट शक्तियाँ हो सकती हैं लेकिन ऐसे क्षेत्र भी हो सकते हैं जहाँ वे सुधार कर सकते हैं। शिक्षकों के अच्छे कार्य-प्रदर्शन को पहचानना और अभिस्वीकृत करना महत्वपूर्ण होता है – इस बात को विशिष्ट रूप से संबोधित करने के लिए इस इकाई में आगे चलकर आप एक गतिविधि करेंगे। तथापि, सबसे पहले हमें कार्य-प्रदर्शन में कमी से निपटने पर ध्यान देना है। यह वह क्षेत्र है जिस पर शिक्षक उन कौशलों, ज्ञान और और व्यवहारों के सभी प्रकारों का उपयोग नहीं करते हैं जो एक उत्कृष्ट शिक्षक होने से संबद्ध होते हैं। इस विषय में चिंतन शुरू करने में आपकी मदद के लिए, नीचे दिया गया केस स्टडी और उसके बाद दी गई गतिविधि को पूरा करें।
कक्षा के सभी विषयों की परीक्षाओं के पहले सेट के नतीजे आ चुके थे। विद्यालय नेता, श्री कपूर सबसे कुशल शिक्षक श्रीमती अग्रवाल, जिन्हें उन्होंने परीक्षाओं के नतीजों का विश्लेषण करने का दायित्व सौंपा था, के साथ बैठे हैं।
‘हमेशा की तरह,’ श्रीमती अग्रवाल ने कुछ नाटकीय ढंग से कहा, ‘छात्रों ने विज्ञान में सचमुच बुरा प्रदर्शन किया है। मुझे विश्वास है कि यह बैच विद्यालय के नतीजों को बिगाड़ने जा रही है!’
श्री कपूर उलझन में थे। उन्होंने इन छात्रों को पिछले वर्ष पढ़ाया था और पाया था कि वे चुनौती का सामना भली-भांति कर रहे थे। ये नतीजे उनकी क्षमता के बारे में उनकी स्मृति से मेल नहीं खा रहे थे।
‘क्या विज्ञान के सभी विषयों की यही कहानी है?’ उन्होंने पूछा।
श्रीमती अग्रवाल ने चुप रहकर उनके विश्लेषण का अध्ययन किया और फिर व्यंग्यपूर्ण मुस्कान के साथ ऊपर देखा, और बोलीं: ‘आप तो प्रतिभावान व्यक्ति हैं – यह तो केवल जीवविज्ञान से संबंधित है। वह श्री प्रसाद का विषय है। मैं नहीं समझती कि वे उन्हें बहुत अधिक पसंद करते हैं। एक तो, वे अपने सुंदर और स्थिर हाथ से सबसे कठिन रेखाचित्र बनाते हैं और छात्रों से ठीक उसी तरह से उनकी नकल करने को कहते हैं। और हाँ, वे लेबलों को इंगित करने के लिए अब भी एक फुट लंबी स्केल का उपयोग करते हैं!’
श्री कपूर ने बिना जवाब दिए सिर हिलाया। वे निश्चय ही विद्यालय के अन्य शिक्षकों के बारे में चर्चा करने के मूड में नहीं थे।
‘धन्यवाद, श्रीमती अग्रवाल अब हम सामाजिक विज्ञान में उनके नतीजों पर नज़र डालते हैं,’ उन्होंने बस इतना ही कहा।
श्री कपूर ने एक शिक्षक के कार्य-प्रदर्शन में कमी की पहचान करने में अपनी मदद के लिए छात्रों के नतीजों का उपयोग किया। उन तरीकों के बारे में सोचें जिनसे आप अपने विद्यालय में किसी शिक्षक के कार्य-प्रदर्शन में कमी के प्रति जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अपनी सीखने की डायरी में तीन या चार अवधारणाएं लिखें।
इस मामले में श्री कपूर खराब नतीजों और शिक्षक के कार्य-प्रदर्शन के बीच संबंध स्थापित करने में समर्थ थे। हमेशा ही ऐसी प्रत्यक्ष कड़ियाँ उपलब्ध नहीं होती हैं और अन्य संभव कारकों की तलाश करना भी आवश्यक होता है (उदाहरण, बीमारी, पाठ्यपुस्तकों का सुलभ न होना, हाजिरी के खराब प्रतिमान)।
हर परिस्थिति अनोखी होती है, लेकिन यहाँ कुछ संकेतक प्रस्तुत हैं जो शिक्षक के कार्य-प्रदर्शन से संबंधित मुद्दों का सुझाव दे सकते हैं:
यह ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि शिक्षक का खराब कार्य-प्रदर्शन आवश्यक रूप से इस बात से संबंधित नहीं होता कि शिक्षक अपने अध्यापन को या अपनी कक्षा को अन्य लोगों से अलग ढंग से संयोजित करता है या नहीं। अधिकतर इसका कारण यह होता है कि अध्यापन के परिणामस्वरूप उनके छात्र उतनी प्रगति नहीं करते हैं जिसकी उनसे उस समय सामान्य तौर पर अपेक्षा की जाती है। ऐसा भी हो सकता है कि सक्षम छात्र या मिसाल के तौर पर, किसी विशिष्ट सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के छात्र अच्छा काम करते हैं, जबकि अन्य नहीं।
यदि आप कक्षाओं में जाकर या शिक्षकों से बातचीत करके छात्रों की सीखने की प्रक्रिया पर नियमित रूप से डेटा एकत्र नहीं करते हैं, तो हो सकता है कि छात्रों की शिक्षा के बुरी तरह से हानिग्रस्त होने से पहले आपको कार्य-प्रदर्शन में इस कमी का पता न चले। इस वजह से, नियमित निगरानी करना आवश्यक होता है और उसे आपके रोजमर्रा के काम का हिस्सा होना चाहिए। निगरानी करके आप अच्छे कार्य-प्रदर्शन की पहचान और अच्छा काम कर रहे शिक्षकों को मान्यता भी प्रदान कर सकेंगे।
चित्र 1 प्रेक्षण के माध्यम से प्रमाण एकत्र करना।
आप कार्य-प्रदर्शन का प्रमाण कैसे एकत्र कर सकते हैं? यह बहुत महत्वपूर्ण है कि प्रमाण के आधार पर कार्यवाही की जाये न कि कहानियों या अनुमानों के आधार पर। तथापि, आम तौर पर कोई मुद्दा अन्य शिक्षकों और उनके कार्य की तुलना में उठाया जाता है, इसलिए एक से अधिक शिक्षकों या कक्षा के बारे में प्रमाण एकत्र करना अक्सर जरूरी होता है।
प्रमाण एकत्र करने का काम सोच-समझ कर करना चाहिए और यह प्रक्रिया निष्पक्ष और संतुलित होनी चाहिए। कुछ प्रारंभकि डेटा एकत्र कर लेने के बाद, आपको यह स्पष्ट करने के लिए कि वास्तव में क्या हो रहा है आगे की जानकारी प्राप्त करने का प्रयास करना चाहिए। इसमें शामिल हो सकता है:
अनेक कक्षाओं से प्रगति से संबंधित डेटा एकत्र करना
यह याद रखना भी महत्वपू्र्ण है कि यह शिक्षक के बर्ताव का बस एक पहलू हो सकता है; हो सकता है कि स्वयं शिक्षक मुद्दा न हो। आप व्यक्ति को नहीं परख रहे हैं, आप उनके अध्यापन से संबंधित बर्ताव को परख रहे हैं – जैसा कि गतिविधि 2 में अन्वेषण किया गया है।
शिक्षक की योग्यता को देखते समय, शिक्षक के व्यावसायिक (Professional) देखना महत्वपूर्ण है, उसे एक व्यक्ति के रूप में नहीं। नीचे दी गई सूची को देखें और अपनी सीखने की डायरी में इस बारे में नोट बनाएं कि क्या आपके खयाल से प्रमाण की प्रत्येक मद बर्ताव के बारे में है या व्यक्ति के:
चर्चा
इनमें से कुछ उतने स्पष्ट नहीं हैं जितने कि वे शुरू में लगते हैं।
विकल्प 3 भी ऐसा ही है, लेकिन आपको पक्षपात की संभावना के प्रति सजग रहना चाहिए और कार्रवाई करने से पहले और प्रमाण एकत्र करना चाहिए।
अब गतिविधि 3 आजमाएं, जो इस बात पर विचार करती है कि आप अपने विद्यालय में किस तरह से प्रमाण एकत्र कर सकते हैं।
यदि आप अपने विद्यालय में अध्यापन-प्रक्रिया के बारे में चिंतित हैं, तो अब सोचें कि आप मुद्दे के बारे में अधिक जानने और उसके कारण का पता लगाने के लिए प्रमाण किस तरह से एकत्र कर सकते हैं। अपनी सीखने की डायरी में उस प्रमाण के बारे में नोट्स बनाएं जो आप एकत्र कर सकते हैं और उसे एकत्र करने में आपको क्या समस्याएं हो सकती हैं।
चर्चा
स्पष्ट रूप से, हम नहीं जानते कि आपने किस प्रमाण को एकत्र करने का निश्चय किया है। लेकिन मुद्दों के समान होने की संभावना है:
यदि आप अपने विद्यालय में अधिक नियमित आधार पर प्रमाण एकत्र करते हैं, इससे कम उत्तेजना और चिंता उत्पन्न होगी – लेकिन प्रारंभ में, आपको सभी को आश्वस्त करना होगा। एक से अधिक शिक्षक या कक्षा से प्रमाण एकत्र करने से अन्य लोगों का ध्यान आकर्षित होने की संभावना कुछ हद तक कम होती है। आप शिक्षकों से यह पूछकर कि वे विषय पर प्रतिक्रिया चाहते हैं उन्हें इस प्रक्रिया में शामिल करने पर विचार कर सकते हैं और उसे अधिक सहयोगात्मक बना सकते हैं।
अपनी चिंताओं को अन्य विद्यालय नेताओं के साथ साझा करना विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है ताकि आप देख सकें कि क्या उनके पास संभावित समस्याओं के लिए कोई उपयोगी समाधान या भिन्न प्रकार के प्रमाण हैं।
अब नीचे दिए गए दो केस स्टडी पढ़ें, और उनसे संबद्ध गतिविधियाँ पूरी करें। वे प्रदर्शित करते हैं कि खराब कार्य-प्रदर्शन का प्रमाण एकत्र करना कितना कठिन हो सकता है।
विद्यालय प्रमुख श्री राऊल ने अपनी सहायक श्रीमती चड्ढा, जो अभी-अभी अपनी बीमारी की छुट्टी से लौटी थीं, के साथ विद्यालय की अध्यापन और सीखने के बारे में प्रमाण एकत्र करने में अपनी कठिनाइयों को साझा किया। उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि उनके बीमार पड़ने के एक दिन पहले, उन्होंने सभी शिक्षकों से अपने छात्रों के कक्षाकार्य और गृहकार्य की किताबों का एक नमूना एकत्र करने को कहा था। उन्होंने शिकायत की ‘दो हफ्तों तक लगातार अनुरोध करने के बाद मैं हर एक से उन्हें प्राप्त कर सका’। ‘यह काफी आसान हो सकता था यदि मैंने सिर्फ आपसे इस काम का संयोजन करने को कहा होता। मेरा खयाल है कि वे लोग आपका कहा काम अधिक आसानी से करते हैं।’
इस बात से खुश होकर, श्रीमती चड्ढा ने उनसे पूछा कि उन्हें किताबें किसलिए चाहिए थीं। श्री राऊल ने कहा उन्होंने किताबों का अध्ययन किया था और दर्ज किया था कि काम की जाँच की गई थी या नहीं और छात्रों को किस प्रकार की टिप्पणियाँ प्रतिक्रिया के रूप में प्राप्त हुई थीं। श्रीमती चड्ढा ने पूछा कि क्या उन्होंने शिक्षकों को किताबें माँगने का कारण बताया था। श्री राऊल ने इस बात की पुष्टि हाँ में की।
‘अच्छा, तो फिर,’ श्रीमती चड्ढा ने कहा। ‘यह संभव है कि वे इस बात से चिंतित थे कि आप एकत्र की गई जानकारी का उपयोग किस प्रकार करेंगे।’
श्री राऊल ने कहा वे इस बात से अवगत थे, लेकिन वे झूठा दिखावा करके किताबें नहीं लेना चाहते थे। श्रीमती चड्ढा उनकी बात से सहमत थीं कि ऐसा करना सही नहीं होता, लेकिन उन्होंने सुझाव दिया कि वे कुछ अधिक आश्वस्त शिक्षकों से इसकी शुरुआत कर सकते थे। जैसे-जैसे बात फैलती कि विद्यालय नेता के विचार-विमर्श बहुत उपयोगी और रोचक हैं, अधिक शिक्षक अपनी पुस्तकें उन तक लाने का साहस बटोर सकते थे। श्री राऊल ने सिर हिलाया और कहा कि उन्हें बात समझ में आ गई है: नए प्रकार का काम शुरू करते समय, सभी शिक्षकों की प्रतीक्षा करने की बजाय कुछ शिक्षकों के साथ शुरू करना बेहतर होगा।
‘शायद मुझे अब इस सलाह पर अमल करना चाहिए जबकि मैंने किताबों में जो कुछ पाया है उसकी पुष्टि करने के लिए मुझे कक्षाओं का प्रेक्षण करना है। शायद मैं श्रीमती चक्रकोदि की कक्षा का प्रेक्षण करके शुरू कर सकता हूँ। उन्होंने ही मुझे सबसे पहले अपने छात्रों की किताबें दी थीं।’
श्रीमती चड्ढा सहमत थीं कि यदि श्रीमती चक्रकोदि को पता हो कि श्री राऊल क्यों आ रहे हैं तो वे उन्हें अपनी कक्षा में देखकर प्रसन्न होंगी। ‘संभवतः,’ उन्होंने सोचते हुए कहा, ‘यह और भी अच्छा होगा यदि आप अपने छात्रों की किताबें उनके साथ साझा करें और उनसे आपके पढ़ाते समय आपको देखने के लिए आने के लिए भी कहें!’
श्री राऊल हँसे और बोले श्रीमती चक्रकोदि – और अन्य शिक्षक भी – इस बात से प्रसन्न होंगे! ‘आपके पास कठिनाइयों का मुकाबला करने के कुछ दिलचस्प तरीके हैं,’ उन्होंने श्रीमती चड्ढा की सराहना की।
चित्र 2 प्रमाण एकत्र करना।
वृत्त अध्ययन 2 पढ़ लेने के बाद, क्या आप गतिविधि 3 में अपनी किसी योजना या तरीके को बदलेंगे? आपको यह बात समझ में आई होगी कि आप जो प्रमाण एकत्र करते हैं उससे अधिक महत्वपूर्ण है उसे एकत्र करने का तरीका – जिस तरह से आप लोगों को सूचित करते हैं और उन्हें आप जितना असुरक्षित महसूस कराते हैं।
इस बात पर कुछ विचार करना उपयोगी होता है कि आप किस तरह से प्रमाण एकत्र करेंगे। आप चाहें तो, उदाहरण के लिए, सोच सकते हैं कि आप कक्षा का प्रेक्षण करने में कितना समय व्यतीत करेंगे – सामान्य तौर पर शिक्षक के पाठ में अधिक व्यवधान डाले बिना प्रेक्षण करने के लिए दस मिनट पर्याप्त होते हैं।
जब आप अपने विद्यालय में प्रमाण एकत्र करना शुरू करते हैं तब अपनी सीखने की डायरी में अपने लिए करने और न करने की एक सूची बनाएं।
विद्यालय नेता श्रीमती वैद्य ने मध्यावधि इम्तिहानों के लिए परीक्षाओं के नतीजों का अध्ययन किया। उन्होंने गणित में छात्रों के प्रदर्शन के बारे में स्टाफ रूम की चर्चाओं के बारे में सुना था। गणित के एक अध्यापक, श्री शर्मा ने तिरस्कारपूर्वक घोषणा की थी कि कक्षा 9 की कुछ ही लड़कियाँ गणित को समझती हैं और चेतावनी दी थी कि शेष लड़कियों से फाइनल इम्तिहानों को उत्तीर्ण करवाने का प्रयास करना टेढ़ी खीर होगी।
श्रीमती वैद्य समझ सकती थीं कि वे क्यों चिंतित थे – आधे से अधिक छात्रों ने परीक्षा में 100 में से 5 और 45 के बीच अंक प्राप्त किए थे। फिर उन्होंने अन्य कक्षाओं के गणित में प्रदर्शन पर नज़र डाली। कक्षा 9 ने बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था, लेकिन कक्षा 10 और 12 ने बेहतर प्रदर्शन किया था। उन्होंने सोचा कि कहीं यह इस बात का सबूत तो नहीं था कि वे सभी वर्ष के अंत में बोर्ड की परीक्षाओं के लिए प्राइवेट ट्यूशन के लिए जा रहे हैं; उनको यह बात छात्रों से पता करनी थी।
कुछ प्रतिमान उन्हें स्पष्ट होकर दिखने लगे। उदाहरण के लिए, प्रत्येक कक्षा में सबसे अधिक अंक पाने वाले स्पष्ट रूप से बहुत अच्छे थे। उनके अंक 100 में से 90 और 100 के बीच थे। फिर 80 और 90 के अंकों के बीच स्पष्ट अंतर था। कक्षा के लगभग पाँचवे भाग ने 60 और 80 के बीच और फिर एक अन्य पाँचवे भाग ने 40 और 60 के बीच अंक प्राप्त किए थे।
उन्होंने अपना हरा हाईलाइटर उठाया और अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों की पहचान करने लगीं। जिन छात्रों ने 100 में से 35 से कम अंक प्राप्त किए थे उन्होंने उनके लिए लाल रंग का प्रयोग किया। वे गणित के एक शिक्षक के साथ महत्वपूर्ण वार्तालाप करने जा रही थीं और उन्हें विश्वास था कि उन्हें अत्यंत मजबूत संख्यात्मक डेटा की जरूरत पड़ेगी। संख्याओं के साथ, उन्होंने अंतिम श्रेणी में आने वाले कमज़ोर छात्रों की रूपरेखा भी बनाई। फिर, शिक्षकों की सहायता से, वे उन क्षेत्रों की पहचान कर सकती थीं जिनमें छात्र कमज़ोर थे, और साथ ही उन क्षेत्रों की भी जिनमें वे मजबूत थे। पृष्ठभूमि में किया गया यह कार्य कमज़ोर छात्रों के लिए विद्यालय के बाद के कार्यक्रम को संरचित करने में उनकी मदद करेगा। उन्होंने ऐसा करने से विज्ञान की परीक्षाओं में आए फर्क को देखा था; विशिष्ट क्षेत्रों में संकेंद्रित सहायता से भौतिकी के परिणामों में लाभ मिला था।
केस स्टडी 2 और 3 के कुछ उदाहरणों की सहायता से, एक से अधिक कक्षा से छात्रों के सीखने की प्रक्रिया के बारे में कम से कम दो प्रकार के प्रमाण एकत्र करें। इस प्रमाण की एक प्रतिलिपि बनाना सुनिश्चित करें। यह गतिविधि आपको अपने विद्यालय में शिक्षक के कार्य-प्रदर्शन की निगरानी शुरू करने में मदद करेगी।
आपको दिखने वाले किसी भी अनपेक्षित प्रतिमान के बारे में अपनी सीखने की डायरी में नोट्स बनाएं। जब आप अपने नोट्स बनाएं, तब विचार करें कि क्या आपको प्रक्रिया अपनी अपेक्षा से आसान या कठिन लगी, और क्या ऐसे कोई मुद्दे थे जिनकी आपको अपेक्षा नहीं की थी। अपने विचारों को दर्ज करें – यदि आपको अवसर मिले तो आपके सहकर्मियों के साथ चर्चा करने के ये उपयोगी बिंदु होंगे।
चर्चा
एक बार फिर, हमें पता नहीं है कि आपने क्या प्रमाण एकत्र किया है या कौन से अनपेक्षित प्रतिमान आपने नोट किए हैं। तथापि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह संभवतः जाँच-पड़ताल की पूरी प्रक्रिया का एकमात्र हिस्सा है। अक्सर देखा जाता है कि अनौपचारिक प्रेक्षण समग्र तस्वीर प्रदान नहीं करते हैं – और प्रमाण के दो अंशों के होने पर भी, तस्वीर अधूरी रहती है।
डेटा एकत्र करना आपके शिक्षकों के लिए संवेदनशील मुद्दा हो सकता है; रचनात्मक प्रतिक्रिया देना भी उतना ही नाजक़ु हो सकता है। हालांकि अपेक्षा से कम प्रदर्शन करने वाले शिक्षक को प्रतिक्रिया देना आपको महत्वपूर्ण प्राथमिकता का काम लग सकता है, जो शिक्षक अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया देना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, ताकि वे जान सकें कि आप उनके काम करने की परिपाटियों का सम्मान करते हैं। ऐसा करना आपके शिक्षकों को और अधिक मेहनत करने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक के लिए मूल्यवान होने के लिए, आपकी प्रतिक्रिया विशिष्ट और आपके प्रेक्षणों पर आधारित होनी चाहिए। उदाहरण के लिए:
‘छात्रों को दिए गए आपके निर्देश बहुत स्पष्ट हैं और फिर मैंने देखा है कि जब वे समूहों में काम करते हैं तब आप आगे और सलाह देकर उनकी सहायता करते हैं।’
‘मैंने देखा है कि आपने कक्षा में नई चीजों का प्रदर्शन किया है। मुझे सचमुच लगता है कि इससे छात्रों को अपने काम में गर्व का अनुभव करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।’
‘मैंने दो छात्रों को गलियारे में आपके गणित पाठ के बारे में बात करते सुना – वे आपके द्वारा दिए गए एक प्रश्न पर चर्चा कर रहे थे और मैंने देखा कि आपने उन्हें सचमुच प्रेरित किया था।’
आपको कम सकारात्मक प्रतिक्रिया देने में अधिक कठिनाई हो सकती है – लेकिन जब आप अपनी प्रतिक्रिया को प्रमाण पर आधारित करते हैं, तो इससे बड़ी मदद मिल सकती है। वृत्त अध्ययन 4 और गतिविधि 6 प्रमाण एकत्र करने की प्रक्रिया और अपेक्षा से कम प्रदर्शन करने वाले शिक्षक को प्रतिक्रिया प्रदान करने के तरीके का अध्ययन करते हैं। दोनों आपकी इस बात पर विचार करने में मदद करेंगे कि उपयुक्त प्रतिक्रिया देने की तैयारी कैसे करें।
एक गुरूवार को विद्यालय प्रमुख, श्री खान विद्यालय के इर्द-गिर्द अपनी दैनिक चहलकदमी कर रहे थे। पिछले सोमवार को उन्होंने तय किया था कि उस सप्ताह वे कक्षाओं की शुरुआतों के बारे में प्रमाण एकत्र करेंगे। पाठ के बदलने के लिए घंटी बजने के दो मिनट पहले, वे गलियारे के सुदूर सिरे पर ठहर जाते थे, जहाँ से वे कक्षाओं के दोनों गलियारों में सारी गतिविधि देख सकते थे। जब घंटी बजती थी, तब वे शिक्षकों और छात्रों को अपनी कक्षाओं से बाहर निकलते और उन कक्षाओं में जाते देखते जहाँ उनका नया पाठ शुरू होने जा रहा था।
आज, श्री खान को एक व्यक्ति की तलाश थी जिसे उन्होंने हर रोज उस व्यक्ति के रूप में देखा था जो कक्षा में जाने में अधिक समय लेता था और फिर उससे बाहर निकलने में भी अधिक समय लेता था। वे थे श्री मेहता, हिंदी के शिक्षक। और अन्य दिनों की तरह ही, उन्होंने देखा कि एक शिक्षिका पाँच मिनट तक अपनी कक्षा के बाहर बेताबी से इंतजार कर रही थीं जब तक कि श्री मेहता बाहर न निकल आए। श्री खान ने श्री मेहता को गलियारे में टहलते हुए जाते देखा। जिन कक्षाओं के सामने से वे गुजरे उनमें से एक में उन्हें वास्तव में जाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। वे उसके सामने से गुजरे और सीधे स्टाफ रूम में चले गए।
पाँच मिनट बाद, श्री मेहता स्टाफ रूम से टहलते हुए निकलकर अपनी कक्षा की ओर बढ़े, जो अब तक शोर से इतनी भर गई थी कि आस-पास की कक्षाओं ने आवाज से बचने के लिए अपने दरवाजे बंद कर लिए थे – बावज़ूद इसके कि वे हवा से वंचित हो रहे थे।
श्री खान श्री मेहता के पीछे-पीछे कक्षा में गए। वे चलते हुए, जैसा कि वे आम तौर पर करते थे, कक्षा के पीछे की ओर गए और छात्रों ने तत्काल उनके लिए जगह बना दी। उन्होंने अपने सामने वाले छात्र की मेज पर रखी किताब पर नज़र डाली – वे अगले पाठ के लिए विज्ञान का गृहकार्य पूरा करने में व्यस्त था। श्री मेहता ने एक निर्देश के साथ कक्षा शुरू की कि उनका हिंदी गृहकार्य तत्काल प्रस्तुत किया जाए। फिर उन्होंने जिन छात्रों ने अपना गृहकार्य प्रस्तुत नहीं किया था उन्हें खड़ा होने को कहा। करीब आधी कक्षा उठकर खड़ी हो गई। श्री खान ने अपनी घड़ी देखी – पाठ को शुरू होकर 20 मिनट हो चुके थे। गृहकार्य के महत्व पर श्री मेहता का उपदेश सामान्य से अधिक लंबा था। श्री खान ने कक्षा के उन अन्य छात्रों की ओर देखा जिन्होंने अपना गृहकार्य प्रस्तुत कर दिया था। वे देख सकते थे कि वे बेचैन और बेताब हो रहे थे। वे चुपचाप कक्षा से बाहर निकले और एक कठिन वार्तालाप के लिए स्वयं को तैयार करने के लिए अपने कमरे की ओर चले।
आपको संसाधन 1, ‘निगरानी करना और प्रतिक्रिया देना’ उपयोगी लग सकता है। इसमें आपके शिक्षकों के साथ इस दृष्टिकोण जैसी स्पष्ट समानताएं हैं।
चित्र 3 आप किसी अपेक्षा से कम प्रदर्शन करने वाले शिक्षक को प्रतिक्रिया कैसे देंगे?
इस बारे में सोचें कि आप श्री मेहता को प्रतिक्रिया देने के लिए कैसे आगे बढ़ेंगे। निम्न बातों पर कुछ नोट्स बनाएं:
याद रखें, अपनी प्रतिक्रिया को इस तरह से संरचित करना एक अच्छी अवधारणा है जिसमें आप सकारात्मक बातों से शुरू करते हैं और फिर चीजों को सुधारने की योजना से उसे समाप्त करते हैं। अंत पर केंद्रित करने के सकारात्मक लक्ष्य का परिणाम एक अनुवर्ती बैठक के लिए सहमति हो सकती है।
चर्चा
इस प्रेक्षण से संबंधित कुछ इतिहास हो सकता है जिसके बारे में हमें वृत्त अध्ययन 4 में नहीं बताया गया है, जैसे पहले का उच्च गुणवत्ता का प्रदर्शन या परिवार में किसी परिजन की मृत्यु का शोक; कोई बात जो श्री खान जानते हैं और जिसे अपनी प्रतिक्रिया में ध्यान में रखेंगे। हम इनमें से किसी संभाव्य परिणामों के लिए अभी योजना नहीं बना सकते हैं, लेकिन एक अत्यंत सौम्य शुरुआत करने की संभवतः हमेशा ही सलाह दी जाती है। शायद ‘मुझे उस पाठ की शुरुआत के बारे में बताएं जो मैंने उस दिन देखा था,’ या ऐसी ही किसी बात से शुरू करें, ताकि शिक्षक यह बात समझाने से शुरुआत कर सके कि वह असामान्य क्यों था या उस दिन के बारे अलग क्या बात थी।
बात को शुरू करने के बाद, बैठक उस प्रेक्षण को कुछ अधिक विस्तार से देखने की ओर बढ़ सकती है – खास तौर पर यदि शिक्षक पाठ के आरंभ के बारे में चिंतित नज़र नहीं आ रहा हो। महत्वपूर्ण बात है इन छात्रों के सीखने के समय का नुकसान। एक तो पाठ देर से शुरू हुआ, फिर उसे जमने में समय लगा और तब गृहकार्य के बारे में भाषण हुआ, जिससे पढ़ने का इतना सारा मूल्यवान समय व्यर्थ हो गया। शिक्षक को प्रतिक्रिया देने का यह एकमात्र उपयुक्त केंद्र-बिंदु हो सकता है: सीखने के समय को कैसे अधिकाधिक करना और ऐसा होने के लिए प्रेक्षित किए गए व्यवहार में परिवर्तन करने की जरूरत।
आपको नोट करना चाहिए कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि जब आपको आपके अपने शिक्षकों के साथ बात करना हो तब आपको अपनी प्रतिक्रिया की योजना बनाने के लिए समय नहीं लेना चाहिए। प्रतिक्रिया देना एक कौशल है जो समय के साथ और अभ्यास से विकसित होता है, इसलिए आपके विशिष्ट बने रहने के लिए पहले से कुछ नोट्स बना लेना सचमुच मददगार साबित हो सकता है।
मुरलीधरन और सुंदररामन (2010) ने एक शोध के बारे में सूचित किया है जहाँ उन्होंने पाया कि शिक्षकों को उनके प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देना ही पर्याप्त नहीं होता है – तब भी जब वह दर्शाती हो कि उनकी कक्षाएं अन्य कक्षाओं के जितना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है। शिक्षकों ने बाद के कक्षा प्रेक्षण सत्रों में अध्यापन के अपने व्यवहार में परिवर्तन किया, लेकिन छात्रों के परिणामों में कोई सुधार नहीं देखा गया। उनका निष्कर्ष यह है कि शिक्षकों को अपना बर्ताव बदलने के लिए बहुत अधिक इनपुट, प्रेरणा या प्रोत्साहन की जरूरत होती है।
यह उच्चतम सहयोग प्रदान करने का एक तरीका है जिसे छात्रों के लिए नतीजों में सुधार करते दर्शाया गया है और वह है आपके शिक्षकों को प्रशिक्षण देना। शिक्षण के बारे में आप इस इकाई में अधिक सीख सकते हैं। अपने शिक्षकों का विकास करना: प्रशिक्षण और परामर्श देना। नए ज्ञान या कौशलों का विकास करने की योजना विकसित करने के लिए आप किसी शिक्षक के साथ मिलकर भी काम कर सकते हैं। गतिविधि 7 आपसे एक कार्यवाही योजना के बारे में सोचने को कहती है जिसकी निगरानी की जाएगी।
मुरलीधरन और सुंदररामन (2010) के उपरोक्त शोध पर विचार करते हुए, कल्पना करें कि आप केस स्टडी 4 के श्री खान हैं। श्री मेहता को कक्षा में अपने खराब प्रदर्शन पर काबू पाने में सक्षम करने के लिए जिन तरीकों पर आप उनके साथ काम कर सकते हैं उसकी एक कार्यवाही योजना बनाएं। सोचें कि यह कार्यवाही योजना शिक्षक के विकास मैं कैसे मदद करेगी और आप और स्वयं श्री मेहता संवेदनशील ढंग से उसकी निगरानी कैसे कर सकते हैं। ये वृत्त अध्ययन गतिविधियाँ आपके लिए उन कौशलों का अभ्यास करने के लिए हैं जिन्हें आप अपने शिक्षकों और विद्यालय के परिवेश में अंतरित कर सकते हैं।
चर्चा
यह रचनात्मक बनने का अवसर हो सकता है। यदि श्री मेहता के पास पाठों के बीच स्टाफ रूम में लौटने का कोई भौतिक कारण हो, तो किसी म़ॉनीटर को क्यों नहीं नियुक्त किया जा सकता जो पाठ के शुरू में वर्कशीटें या किताबें दे सके, और उनके आने से पहले छात्रों से काम शुरू करवा ले?
अगली गतिविधि में आप एक ऐसे शिक्षक को प्रतिक्रिया प्रदान करने वाले हैं जो अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। यह वह शिक्षक हो सकता है जिसके बारे में आपने पहले प्रमाण एकत्र किए थे या वह कोई नया विचार हो सकता है। सुनिश्चित करें कि इस गतिविधि में आप शिक्षक की अच्छी ख्याति पर आधारित अनुमानों का नहीं बल्कि प्रमाण का उपयोग करेंगे।
ऐसे किसी शिक्षक पर विचार करें जिसका आपने बढ़िया पाठ पढ़ाते समय अवलोकन किया है। पाठ का कोई विशिष्ट खंड या उस शिक्षक के काम का कोई खास पहलू चुनें जो आपके खयाल से विशेष रूप से अच्छा था। उस प्रतिक्रिया के बारे में सावधानीपूर्वक सोचें जो आप देना चाहते हैं और स्वयं को आश्वासित करें कि उस प्रतिक्रिया पर सहायता करने के लिए आपके पास उपयुक्त प्रमाण है।
अपनी प्रतिक्रिया में आपको:
आप जो कहने जा रहे हैं उसकी योजना बनाएं और बैठक के लिए वातावरण नियोजित करें। बैठक के दौरान, आप शिक्षक से आगे चलकर इस बात पर विचार करने को कह सकते हैं कि वे अपनी अच्छी परिपाटी को अन्य लोगों तक, या अपने अध्यापन के अन्य क्षेत्रों तक कैसे विस्तारित कर सकते हैं।
बैठक के बाद इस बारे में अपनी सीखने की डायरी में नोट्स बनाएं कि आपके खयाल से शिक्षक ने प्रतिक्रिया को कैसे प्राप्त किया। उस निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए आपने किन व्यवहार का अवलोकन किया? इस बारे में भी नोट्स बनाएं कि बैठक के दौरान और उसके बाद आपने कैसा महसूस किया। यदि आपके कोई सहकर्मी हैं जिन पर आपको भरोसा है, तो उनके साथ इसकी चर्चा करें।
चर्चा
उम्मीद है कि बैठक अच्छी तरह से हुई और आपकी प्रशंसा का स्वागत किया गया। यदि यह पहली ऐसी बैठक थी जिसका आयोजन आपने अपने विद्यालय में किसी शिक्षक के साथ किया था, तो आप और शिक्षक दोनों के घबराने की संभावना है। प्रदर्शन के बारे में वार्तालाप सकारात्मक होने के बावजूद भी कठिन होते हैं। वार्तालाप को एक विषयपरक, व्यावसायिक स्तर पर रखने के लिए उपयोग में लिए गए मापदंड बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि प्रतिक्रिया उनके प्रदर्शन के बारे में है, उन पर व्यक्ति के रूप में नहीं।
इस इकाई में काम करने के बाद, आप जानेंगे कि प्रमाण एकत्र करना, प्रतिक्रिया देना और खराब प्रदर्शन का पता चलने पर एक शिक्षक को अतिरिक्त सहायता देना एक अत्यंत अधिक समय लेने वाला और भावात्मक रूप से थका देने वाला काम है।
प्रमाण एकत्र करना, प्रतिक्रिया देना और शिक्षक का विकास करना तब सर्वोत्तम होता है जब वह निरन्तर अभ्यास का हिस्सा होता है। इससे खराब प्रदर्शन के अनदेखा रह जाने की संभावना कम होती है और कुल मिलाकर प्रदर्शन के स्तर में वृद्धि होती है। प्रमाण एकत्र करने और प्रतिक्रिया देने का सारा काम विद्यालय प्रमुख द्वारा किया जाना ही जरूरी नहीं है; इसे शिक्षकों द्वारा उनके विकास के हिस्से के रूप में भी साझा किया जा सकता है।
आपके अपने विद्यालय में अध्यापन के एक पहलू की नियमित समीक्षा के लिए एक योजना बनाएं। यह पाठों की शुरुआत, गृहकार्य तय करने या छात्र–शिक्षक संबंधों के बारे में हो सकता है।
आप चाहें तो कई मुद्दों पर ध्यान दे सकते हैं – अध्यापन के उन पहलुओं, जिनकी आप समीक्षा करना चाहते हैं, की पहचान करने में मदद प्राप्त करने के लिए आप TESS-भारत द्वारा विकसित महत्वपूर्ण संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं। आप संसाधन 2, ‘पाठों की योजना बनाना’ का उपयोग शिक्षकों को एक लिखित परचा देने के लिए कर सकते हैं या वह आपकी यह तय करने में मदद कर सकता है कि किस चीज की तलाश करनी है।
अपनी सीखने की डायरी में इस बारे में नोट्स बनाएं कि आपने अध्यापन के उस पहलू को क्यों चुना और वे अन्य पहलू भी कारण सहित नोट करें जिनकी तलाश आप भविष्य में करना चाहेंगे।
अब निम्नलिखित केस अध्ययन पढ़ें।
सुनीता जवाहर (या एसजे, जिस नाम से वे लोकप्रिय हैं) ने अपने विद्यालय प्रमुख की डायरी को सुरक्षित रखा है। उन्होंने उसे पिछले वर्ष की समीक्षा करने, और स्वयं के लिए तय किए गए मासिक लक्ष्यों पर गहराई से विचार करने में अमूल्य पाया।
इस महीने उन्होंने कक्षाओं की समाप्ति का अध्ययन करने का निश्चय किया था। उनके लक्ष्य यह सुनिश्चित करने के लिए थे:
शिक्षक विषय-वस्तु और परिणामों को सारांशीकृत करते हुए पाठों को समाप्त करें
पाठ के अंत में नियत किया गया गृहकार्य सभी छात्रों को सुलभ और उनके द्वारा साध्य है
ये लक्ष्य शिक्षकों को एक आंतरिक मेमो के माध्यम से प्रसारित किए गए और यह स्पष्ट किया गया कि यह कार्यवाही सभी छात्रों की सीखने की प्रक्रिया को सुधारने के लिए है। सभी शिक्षकों से हस्ताक्षर करवा लेने के बाद, उसकी फोटोकॉपी बनाकर उसे स्टाफ रूम में नोटिस बोर्ड पर लगा दिया गया।
एस.जे. ने उस सप्ताह के दौरान भरे जाने के लिए एक ट्रैकर बनाया था; एक तालिका जिसमें पाँच कॉलम और सात पंक्तियाँ थीं। पहले कॉलम का शीर्षक ‘विषय’ था और उसके नीचे ‘विज्ञान’, ‘सामाजिक विज्ञान’, ‘गणित’ और फिर विद्यालय में पढ़ाई जाने वाली सभी भाषाएं सूचीबद्ध थीं। शेष कॉलमों के शीर्षक कक्षाओं का संदर्भ दे रहे थे: ‘9ए’, ‘9बी’, ‘10ए’ और ‘10बी’।
तालिका भरना शुरू हो गई थी। वे पिछले दस मिनट में कक्षा 9बी के विज्ञान के पाठ में गई थीं और उस महीने के लिए केवल अपने लक्ष्यों पर ध्यान देते हुए अपना प्रेक्षण फार्म भरा था। उन्होंने कक्षा 10बी के अंग्रेजी, 9बी के हिंदी और 9बी के सामाजिक विज्ञान पाठों के लिए भी ऐसा ही किया था। इस सप्ताह उनकी योजना शेष 20 कक्षाओं का प्रेक्षण पूरा करने और शिक्षकों की बैठक से पहले स्टाफ रूम में डेटा प्रदर्शित करने की थी। उन्होंने डेटा का नियोजन इस तरह से किया था कि उसे बिना किसी नाम के एक पाई चार्ट के रूप में प्रस्तुत किया जा सके। तथापि, उनके पास लक्ष्य पूरे न कर पाने वाले शिक्षकों से मिलने की एक योजना थी, ताकि वे उनसे पूछ सकें कि लक्ष्य प्राप्त करने में वे कैसे उनकी सहायता कर सकती हैं।
उनमें से एक उनके साथ पाठ की योजना पर चर्चा करने के लिए पहले ही आ गया था – और उन्होंने पाठ के संचालन के तरीके को सुधारने के बारे में मिलकर काम किया था। श्रीमती नागराजू का 9बी का हिंदी पाठ सचमुच अच्छी तरह से नियोजित किया गया था और पाठ का सारांश स्पष्ट था, तथा छात्रों ने अपने शिक्षण की पहचान की थी। श्रीमती नागराजू प्रतिक्रिया से खुश थीं, लेकिन उन्हें अन्य सहकर्मियों के लिए अनुकरणीय व्यक्ति बनने के लिए सहमत करने के लिए थोड़ा प्रोत्साहित करना पड़ा। एस.जे. ने उस दिन के पृष्ठ के कोने में स्वयं को एक छोटा सितारा दिया – उनकी योजना काम कर रही थी। वे दृढ़ थीं कि महीने के अंत तक सभी तीन लक्ष्य पूरे हो जाएं।
तभी उन्हें खयाल आया कि उन्होंने यह नहीं सोचा था कि वे उस उपलब्धि का जश्न अपने स्टाफ के साथ कैसे मनाएंगी! उनकी योजना अधूरी थी। उन्होंने डायरी में उस दिन की अंतिम प्रविष्टी दर्ज की: ‘मेरा गृहकार्य: इस बार में सोचें कि छात्रों से पाठ के सारांश की उपयोगिता पर प्रक्रिया कैसे प्राप्त करें, और प्रतिक्रिया को किस तरह से तुलना करें, और शिक्षकों को सूचित करें।’
वृत्त अध्ययन 5 को पढ़ लेने के बाद, अपनी खुद की योजना को एक बार फिर देखें और सोचें कि आप उसे कैसे बदलना चाहेंगे। अपने विचार पर चर्चा अपने दो शिक्षकों के साथ करें और देखें कि क्या उसे कार्यान्वयित करने से पहले आप उसे बदलना चाहते हैं।
सुझाई गई गतिविधि के प्रति उनके जवाब के बारे में अपनी सीखने की डायरी में नोट्स बनाएं और फिर इस बारे में सोचें कि आप उसे अपने संपूर्ण स्टाफ के सम्मुख कैसे पेश करेंगे।
छात्रों को उत्कृष्ट अध्यापन की अपेक्षा करने का अधिकार होता है, लेकिन वह उन्हें हमेशा प्राप्त नहीं होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, और उनमें से एक – शिक्षक का प्रदर्शन – विद्यालय प्रमुख की सीमा और क्षमता के भीतर होता है।
तथापि, ऐसा केवल ऐसे संगठन में ही हो सकता है जहाँ विश्वास के स्तर उच्च होते हैं। लोगों को सम्मानित महसूस होना चाहिए और पता होना चाहिए कि उनके अध्यापन व्यवहार को, न कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से, जाँचा जा रहा है – अन्यथा इससे बुरी भावना और प्रतिरोध उत्पन्न होगा। यही कारण है कि अधिक कठिन क्षेत्रों से निपटने से पहले सकारात्मक प्रतिक्रिया प्रदान करने का अभ्यास करना महत्वपूर्ण होता है।
किसी शिक्षक के कक्षा में व्यवहार पर, वस्तुपरक प्रमाण की सहायता लेते हुए जितना अधिक नियमित रूप से सोच-विचार किया जाता है, इस बात की संभावना उतनी ही कम हो जाती है कि उनका प्रदर्शन उस स्तर तक गिरेगा जिसे खराब कहा जाता है – विशेष तौर पर तब जबकि समर्थक विकास गतिविधियाँ नियोजित की गई हों। विद्यालय में एक ऐसी संस्कृति, जहाँ अवलोकन और प्रदर्शन पर चर्चा सामान्य रूप से होती हैं, की स्थापना करने में लंबा समय – संभवतः एक वर्ष से अधिक, लग सकता है। अतः हालांकि आरंभ में यह कठिन लग सकता है और आपको कुछ प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है, संवेदनशीलता और निष्पक्षता के साथ डटे रहें।
यह इकाई इकाइयों के उस समुच्चय या वर्ग का हिस्सा है जो पढ़ाने-सीखने की प्रक्रिया को रूपांतरित करने के महत्वपूर्ण क्षेत्र से संबंधित है (नेशनल कॉलेज ऑफ विद्यालय नेताशिप के साथ संरेखित)। आप अपने ज्ञान और कौशलों को विकसित करने के लिए इस समुच्चय में आगे आने वाली अन्य इकाइयों पर नज़र डालकर लाभान्वित हो सकते हैं:
अपने विद्यालय में सीखने की प्रभावी संस्कृति का विकास करना
छात्रों की प्रभावी शिक्षण-प्रक्रिया के लिए संसाधनों का प्रबंधन करना
छात्रों के कार्यप्रदर्शन में सुधार करने में लगातार निगरानी करना और उन्हें प्रतिक्रिया देना शामिल होता है, ताकि उन्हें पता रहे कि उनसे क्या अपेक्षित है और उन्हें कामों का पूरा करने पर प्रतिक्रिया प्राप्त हो। आपकी रचनात्मक प्रतिक्रिया के माध्यम से वे अपने कार्यप्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं।
प्रभावी शिक्षक अधिकांश समय अपने छात्रों की निगरानी करते हैं। सामान्य तौर पर, अधिकांश शिक्षक अपने छात्रों के काम की निगरानी उनके द्वारा कक्षा में किये गये कार्यों को देखकर तथा सुनकर करते हैं। छात्रों की प्रगति की निगरानी करना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे उन्हें निम्नलिखित में मदद मिलती है:
अपने कार्यप्रदर्शन के बारे में अधिक सजग रहना और अपनी सीखने की प्रक्रिया के प्रति अधिक जिम्मेदार होना
अपनी सीखने की प्रक्रिया में सुधार करना
प्रादेशिक और स्थानीय मानकीकृत परीक्षाओं में उपलब्धि का पूर्वानुमान करना।
इससे आपको एक शिक्षक के रूप में निम्नलिखित तय करने में भी मदद मिलती है:
छात्र सबसे अधिक सुधार तब करते हैं जब उन्हें उनकी प्रगति के बारे में स्पष्ट और शीघ्र प्रतिक्रिया दी जाती है। निगरानी करने का उपयोग करना, आपको छात्रों को बताना कि वे कैसे काम कर रहे हैं और उनके सीखने की प्रकिया को उन्नत करने में उन्हें किस अन्य चीज की जरूरत है, इस बारे में नियमित प्रतिक्रिया देने में सक्षम करेगा।
आपके सामने आने वाली चुनौतियों में से एक होगी अपने छात्रों की उनके स्वयं के सीखने के लक्ष्यों को तय करने में मदद करना, जिसे स्व- निगरानी भी कहा जाता है। छात्र, विशेष तौर पर, कठिनाई अनुभव करने वाले छात्र, अपनी स्वयं की सीखने की प्रक्रिया का बोझ उठाने के आदी नहीं होते हैं। लेकिन आप किसी परियोजना के लिए अपने स्वयं के लक्ष्य या उद्देश्य तय करने, अपने काम की योजना बनाने और समय सीमाएं तय करने, और अपनी प्रगति की स्व-निगरानी करने में किसी भी छात्र की मदद कर सकते हैं। स्व-निगरानी के कौशल की प्रक्रिया का अभ्यास और उसमें महारत हासिल करना उनके लिए विद्यालय और उनके सारे जीवन में उपयोगी साबित होगा।
अधिकांश समय, शिक्षक स्वाभाविक रूप से छात्रों की बात सुनते और उनका प्रेक्षण करते हैं; यह निगरानी करने का एक सरल साधन है। उदाहरण
के लिए, आप:
सुनिश्चित करें कि आप जो विचार एकत्रित करते हैं वे छात्रों के सीखने की प्रक्रिया या प्रगति का सही प्रमाण हो। सिर्फ वही बात रिकार्ड करें जो आप देख सकते हैं, सुन सकते हैं, उचित सिद्ध कर सकते हैं या जिस पर आप विश्वास कर सकते हैं।
जब छात्र काम करें, तब कमरे में घूमें और संक्षिप्त प्रेक्षण नोट्स बनाएं। आप कक्षा सूची का उपयोग करके दर्ज कर सकते हैं कि किन छात्रों को अधिक मदद की जरूरत है, और किसी भी उभरती गलतफहमी को भी नोट कर सकते हैं। इन प्रेक्षणों और नोट्स का उपयोग आप सारी कक्षा को प्रतिक्रिया देने या समूहों अथवा व्यक्ति विशेष को प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते हैं।
प्रतिक्रिया वह जानकारी होती है जो आप किसी छात्र को यह बताने के लिए देते हैं कि उन्होंने किसी घोषित लक्ष्य या अपेक्षित परिणाम के संबंध में कैसा कार्य किया है। प्रभावी प्रतिक्रिया छात्र को:
इस बात का मूल्यांकन देती है कि कोई कार्यवाही या काम कितनी अच्छी तरह से किया गया
जब आप हर छात्र को प्रतिक्रिया देते हैं, तब उसे यह जानने में उनकी मदद करनी चाहिए कि:
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि प्रभावी प्रतिक्रिया छात्रों की मदद करती है। आप नहीं चाहते कि आपकी प्रतिक्रिया के अस्पष्ट या अन्यायपूर्ण होने के कारण सीखने की प्रक्रिया में कोई रूकावट आए। प्रभावी प्रतिक्रिया:
छात्र के समझ सकने योग्य उपयुक्त भाषा में दी जाती है
प्रतिक्रिया चाहे बोली जाए या छात्रों की वर्कबुकों में लिखी जाए, वह तभी अधिक प्रभावी होती है यदि वह नीचे दिए गए दिशानिर्देशों का पालन करती है।
जब हमारी प्रशंसा की जाती है और हमें प्रोत्साहित किया जाता है तो आमतौर पर हम उस समय के मुकाबले काफी अधिक बेहतर महसूस करते हैं, जबकि हमारी आलोचना की जाती है या हमारी गलती सुधारी जाती है। सुदृढ़ीकरण और सकारात्मक भाषा समूची कक्षा और सभी उम्र के व्यक्तियों के लिए प्रेरणादायक होती है। याद रखें कि प्रशंसा को विशिष्ट और स्वयं छात्र की बजाय किए गए काम पर लक्ष्यित होना चाहिए, अन्यथा वह छात्र की प्रगति में मदद नहीं करेगी। ‘शाबाश’ अविशिष्ट शब्द है, इसलिए निम्नलिखित में से कोई बात कहना बेहतर होगा:
अपने छात्रों के साथ आप जो बातचीत करते हैं वह उनके सीखने की प्रक्रिया में मदद करती है। यदि आप उन्हें बताते हैं कि उनका उत्तर गलत है और संवाद को वहीं समाप्त कर देते हैं, तो आप सोचने और स्वयं प्रयास करने में उनकी मदद करने का अवसर खो देते हैं। यदि आप छात्रों को संकेत देते हैं या आगे कोई प्रश्न पूछते हैं, तो आप उन्हें अधिक गहराई से सोचने को प्रेरित करते हैं और उत्तर खोजने तथा अपने स्वयं के सीखने का दायित्व लेने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। उदाहरण के लिए, आप बेहतर उत्तर के लिए प्रोत्साहित या किसी समस्या पर किसी अलग दृष्टिकोण को प्रेरित करने के लिए निम्नलिखित जैसी बातें कह सकते हैं:
दूसरे विद्यार्थियों को एक दूसरे की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना उपयुक्त हो सकता है। आप यह काम निम्नलिखित जैसी टिप्पणियों के साथ शेष कक्षा के लिए अपने प्रश्नों को प्रस्तुत करके कर सकते हैं:
छात्रों को हां या नहीं के साथ सुधारना स्पेलिंग या संख्या के अभ्यास की तरह के कामों के लिए उपयुक्त हो सकता है, लेकिन यहां पर भी आप विद्यार्थियों को उभरते प्रतिमानों पर नजर डालने या समान उत्तरों से संबंध बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं या चर्चा शुरू कर सकते हैं कि कोई उत्तर गलत क्यों है।
स्वयं सुधार करना और समकक्षों से सुधार करवाना प्रभावी होता है और आप इसे छात्रों को दिए गए कामों को जोड़ियों में करते समय स्वयं अपने और एक दूसरे के काम की जाँच करने को कहकर प्रोत्साहित कर सकते हैं। एक समय में एक पहलू को सही करने पर ध्यान केंद्रित करना सबसे अच्छा होता है ताकि भ्रम में डालने वाली ढेर सारी जानकारी न हो।
अच्छे अध्यायों की योजना बनानी होती है। नियोजन आपके अध्यायों को स्पष्ट और सुसामयिक बनाने में मदद करता है, जिसका अर्थ यह है कि आपके छात्र सक्रिय और आकृष्ट बने रह सकते हैं। प्रभावी नियोजन में कुछ अंतर्निहित लचीलापन भी शामिल होता है ताकि अध्यापक पढ़ाते समय अपने छात्रों की शिक्षण-प्रक्रिया के बारे में कुछ पता चलने पर उसके प्रति अनुक्रिया कर सकें। अध्यायों की श्रृंखला के लिए योजना पर काम करने में छात्रों और उनके पूर्व-शिक्षण को जानना, पाठ्यक्रम में से आगे बढ़ने के क्या अर्थ है, और छात्रों के पढ़ने में मदद करने के लिए सर्वोत्तम संसाधनों और गतिविधियों की खोज करना शामिल होता है।
नियोजन एक सतत प्रक्रिया है जो आपको अलग-अलग अध्यायों और साथ ही, एक के ऊपर एक विकसित होते अध्यायों की श्रृंखला, दोनों की तैयारी करने में मदद करती है। अध्याय के नियोजन के चरण ये हैं:
जब आप किसी पाठ्यक्रम का अनुसरण करते हैं, तो नियोजन का पहला भाग यह निश्चित करना होता है कि पाठ्यक्रम के विषयों और प्रसंगों को खंडों या टुकड़ों में किस सर्वोत्तम ढंग से विभाजित किया जाये। आपको छात्रों के प्रगति करने तथा कौशलों और ज्ञान का क्रमिक रूप से विकास करने के लिए उपलब्ध समय और तरीकों पर विचार करना होगा। आपके अनुभव या सहकर्मियों के साथ चर्चा से आपको पता चल सकता है कि किसी विषय के लिए चार अध्याय लगेंगे, लेकिन किसी अन्य विषय के लिए केवल दो। आपको इस बात से अवगत रहना चाहिए कि आप भविष्य में उस सीख पर अलग तरीकों से और अलग अलग समयों पर तब लौट सकते हैं, सभी पाठों की योजनाओं में आपको निम्न बातों के बारे में स्पष्ट रहना होगा: जाएगा।
जब अन्य विषय पढ़ाए जाएंगे या विषय को विस्तारित किया
आप शिक्षण को सक्रिय और रोचक बनाना चाहेंगे ताकि विद्यार्थी सहज और उत्सुक महसूस करें। इस बात पर विचार करें कि पाठों की शृंखला में विद्यार्थियों से क्या करने को कहा जाएगा ताकि आप न केवल विविधता और रुचि बल्कि लचीलापन भी बनाए रखें। योजना बनाएं कि जब आपके विद्यार्थी पाठों की शृंखला में से प्रगति करेंगे तब आप उनकी समझ की जाँच कैसे करेंगे। यदि कुछ भागों को अधिक समय लगता है या वे जल्दी समझ में आ जाते हैं तो समायोजन करने के लिए तैयार रहें।
पाठों की शृंखला को नियोजित कर लेने के बाद, प्रत्येक पाठ को उस प्रगति के आधार पर अलग से नियोजित करना होगा जो विद्यार्थियों ने उस बिंदु तक की है। आप जानते हैं या पाठों की शृंखला के अंत में यह आप जान सकेंगे कि विद्यार्थियों ने क्या सीख लिया होगा, लेकिन आपको किसी अप्रत्याशित चीज को फिर से दोहराने या अधिक शीघ्रता से आगे बढ़ने की जरूरत हो सकती है। इसलिए हर पाठ को अलग से नियोजित करना चाहिए ताकि आपके सभी विद्यार्थी प्रगति करें और सफल तथा सम्मिलित महसूस करें।
पाठ की योजना के भीतर आपको सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक गतिविधि के लिए पर्याप्त समय है और कि सभी संसाधन तैयार हैं, जैसे क्रियात्मक कार्य या सक्रिय समूहकार्य के लिए। बड़ी कक्षाओं के लिए सामग्रियों के नियोजन के हिस्से के रूप में आपको अलग अलग समूहों के लिए अलग अलग प्रश्नों और गतिविधियों की योजना बनानी पड़ सकती है।
जब आप नए विषय पढ़ाते हैं, आपको आत्मविश्वासी होने के लिए अभ्यास करने और अन्य अध्यापकों के साथ विचारों पर बातचीत करने के लिए समय की जरूरत पड़ सकती है।
तीन भागों में अपने पाठों को तैयार करने के बारे में सोचें। इन भागों पर नीचे चर्चा की गई है।
पाठ के शुरू में, विद्यार्थियों को समझाएं कि वे क्या सीखेंगे और करेंगे, ताकि हर एक को पता रहे कि उनसे क्या अपेक्षित है। विद्यार्थी जो पहले से ही जो जानते हैं उन्हें उसे साझा करने की अनुमति देकर वे जो करने वाले हों उसमें उनकी दिलचस्पी पैदा करें।
विद्यार्थी जो कुछ पहले से जानते हैं उसके आधार पर सामग्री की रूपरेखा बनाएं। आप स्थानीय संसाधनों, नई जानकारी या सक्रिय पद्धतियों के उपयोग का निर्णय ले सकते हैं जिनमें समूहकार्य या समस्याओं का समाधान करना शामिल है। उपयोग करने के लिए संसाधनों और उस तरीके की पहचान करें जिससे आप अपनी कक्षा में उपलब्ध स्थान का उपयोग करेंगे। विविध प्रकार की गतिविधियों, संसाधनों, और समयों का उपयोग पाठ के नियोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि आप विभिन्न तरीक़ों और गतिविधियों का उपयोग करते हैं, तो आप अधिक छात्रों तक पहुँच सकते हैं, क्योंकि वे भिन्न तरीक़ों से सीखेंगे।
हमेशा यह पता लगाने के लिए समय (पाठ के दौरान या उसकी समाप्ति पर) रखें कि कितनी प्रगति की गई है। जाँच करने का अर्थ हमेशा परीक्षा ही नहीं होता है। आम तौर पर उसे शीघ्र और उसी जगह पर होना चाहिए – जैसे नियोजित प्रश्न या विद्यार्थियों को जो कुछ उन्होंने सीखा है उसे प्रस्तुत करते देखना – लेकिन आपको लचीला होने के लिए और विद्यार्थियों के उत्तरों से आपको जो पता चलता है उसके अनुसार परिवर्तन करने की योजना बनानी चाहिए।
पाठ को समाप्त करने का एक अच्छा तरीका हो सकता है शुरू के लक्ष्यों पर वापस लौटना और विद्यार्थियों को इस बात के लिए समय देना कि वे एक दूसरे को और आपको उस शिक्षण से हुई उनकी प्रगति के बारे में बता सकें। विद्यार्थियों की बात को सुनकर आप सुनिश्चित कर सकेंगे कि आपको पता रहे कि अगले पाठ के लिए क्या योजना बनानी है।
हर पाठ का पुनरावलोकन करें और दर्ज करें कि आपने क्या किया, आपके विद्यार्थियों ने क्या सीखा, किन संसाधनों का उपयोग किया गया और सब कुछ कितनी अच्छी तरह से संपन्न हुआ ताकि आप अगले पाठों के लिए अपनी योजनाओं में सुधार या उनका समायोजन कर सकें। उदाहरण के लिए, आप निम्न का निर्णय कर सकते हैं:
खुले और बंद प्रश्नों की एक शृंखला तैयार करना
सोचें कि आप विद्यार्थियों के सीखने में मदद के लिए क्या योजना बना सकते थे या अधिक बेहतर कर सकते थे।
जब आप हर पाठ में से गुजरेंगे आपकी पाठ संबंधी योजनाएं अपरिहार्य रूप से बदल जाएंगी, क्योंकि आप हर होने वाली चीज का पूर्वानुमान नहीं कर सकते। अच्छे नियोजन का अर्थ है कि आप जानते हैं कि आप शिक्षण को किस तरह से करना चाहते हैं और इसलिए जब आपको अपने विद्यार्थियों के वास्तविक शिक्षण के बारे में पता चलेगा तब आप लचीले ढंग से उसके प्रति अनुक्रिया करने को तैयार रहेंगे।
अभिस्वीकृतियाँ
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वीडियो (वीडियो स्टिल्स सहित): भारत भर के उन अध्यापक शिक्षकों, मुख्याध्यापकों, अध्यापकों और छात्रों के प्रति आभार प्रकट किया जाता है जिन्होंने उत्पादनों में दि ओपन यूनिर्वसिटी के साथ काम किया है।