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सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में परिवर्तन: प्राथमिक विद्यालय में सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में सुधारों का नेतृत्व करना

यह इकाई किस बारे में है

इस इकाई से आपको अपने शिक्षकों के कार्याभ्यास को विकसित करने में सहयोग देने तथा अपने विद्यालय में शिक्षण से संबन्धित बदलाव लाने में मदद मिलेगी।

इस विषय पर काफी कुछ लिखा जा चुका है – और ‘गतिविधि आधारित सीखने की प्रक्रिया’ एवं ‘बालक-केंद्रित सीखने की प्रक्रिया’ आदि विषयों पर प्रशिक्षण आयोजित किए जा चुके हैं – पर इसे आप अपने विद्यालय में वास्तव में अमल में कैसे ला सकते हैं? इस इकाई में इस बात के क्रियात्मक उदाहरण दिए गए हैं कि अपने विद्यार्थियों के सीखने संबंधी परिणामों को बेहतर बनाने के लिए के शिक्षकों के पाठों को अधिक सहभागितापूर्ण बनाने हेतु उनके साथ TESS-INDIA मुक्त शैक्षिक संसाधनों (ओईआर) का उपयोग कैसे करना है।

यह इकाई आपको एक बदलाव परियोजना के बारे में मार्गदर्शन देती है जो एक सत्र (लगभग 12 सप्ताह) तक चलेगी। इसमें आप अपने विद्यालय में शिक्षण से संबन्धित बदलाव पर ध्यान देंगे। आपको अपने शिक्षकों के कक्षा कार्याभ्यासों के किसी ऐसे पहलू को पहचानने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा जिसे आप बदलना चाहते हों। इसमें आपके लिए विद्यालय में करने की गतिविधियां और केस स्टडी दिए गए हैं जो क्रियान्वयन के उदाहरण प्रदान करते हैं।

शुरूआत करने से पहले आपको पूरी इकाई पढ़ लेनी चाहिए, और फिर गतिविधियों को जिस क्रम में दिया गया है उस क्रम में करें, और सत्र में आगे बढ़ने के साथ-साथ अपनी योजनाओं, कार्यों और प्रतिफलों के रिकॉर्ड रखते जाएं।

सीखने की डायरी

इस इकाई में काम करते समय आपसे अपनी सीखने की डायरी में नोट्स बनाने को कहा जाएगा। यह डायरी एक किताब या फोल्डर है जहाँ आप अपने विचारों और योजनाओं को एकत्र करके रखते हैं। संभवतः आपने अपनी डायरी शुरू कर भी ली है।

इस इकाई में आप अकेले काम कर सकते हैं, लेकिन यदि आप अपने सीखने की चर्चा किसी अन्य विद्यालय नेता के साथ कर सकें तो आप और भी अधिक सीखेंगे। यह कोई सहकर्मी हो सकता है जिसके साथ आप पहले से सहयोग करते आ रहे हैं, या कोई व्यक्ति जिसके साथ आप नए संबध का निर्माण करना चाहते हैं। इसे नियोजित ढंग से या अधिक अनौपचारिक आधार पर किया जा सकता है। आपकी सीखने की डायरी में बनाए गए आपके नोट्स इस प्रकार की बैठकों के लिए उपयोगी होंगे, और साथ ही आपकी दीर्घावधि की शिक्षण-प्रक्रिया और विकास का प्रतिचित्रण भी करेंगे।

विद्यालय नेता इस इकाई से क्या सीख सकते हैं

  • शिक्षणशास्त्र एवं टीईएसएस-इंडिया ओईआर की सरंचना से परिचय।
  • अपने विद्यालय में ओईआर का अनुकूलन और उनका उपयोग की संभावना पहचानना।
  • अपने विद्यालय में सीखने की प्रक्रिया में छात्रों की भागीदारी बढ़ाने के लिए फोकस करना।
  • शिक्षण और सीखने की क्रिया में सुधारों को कायम कैसे रखें इस पर विचार।

1 सहभागितापूर्ण, विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण

वर्ष 2005 में एनसीएफ ने यह स्पष्ट कर दिया था कि, विद्यार्थियों की सीखने में भागीदारी, उनके सीखने संबंधी सर्वोत्तम परिणाम पाने की कुंजी है। विद्यार्थियों को निम्नांकित का अवसर मिलना चाहिए:

  • सीखते समय विचारों का योगदान देने का
  • अपने विचारों और अनुभवों के बारे में बोलने और चर्चा करने का
  • विद्यालय में उन्होंने जो सीखा उसे अपने रोजमर्रा के जीवन से जोड़ने का।

चित्र 1 छात्रों की भागीदारी से सीखने की क्रिया बेहतर बनेगी; शिक्षक भी शिक्षार्थी होते हैं।

शोध इस बात पर सहमत है। वास्तविकता यह है कि क्रियान्वयन कठिन है। कई शिक्षक यह मानते हैं कि कक्षा का आकार बड़ा होना या बहुश्रेणी या बहुभाषी कक्षाएं होना जैसे कारण उन्हें विद्यार्थी-केंद्रित पद्धतियां नही अपनाने देते हैं। टीईएसएस-इंडिया ओईआर केस स्टडी और गतिविधियों के रूप, में क्रियात्मक उदाहरण प्रदान करते हैं जिन्हें शिक्षक अपनी कक्षाओं में लागू करके इन चिंताओं से मुक्ति पा सकते हैं।

अच्छे विद्यालयों में, शिक्षक स्वयं भी सक्रिय शिक्षार्थी बनने की कोशिश करते हैं और अपने कार्याभ्यास पर नियमित रूप से विचार करते हैं:

  • जो वे करते हैं उसे जांचते हैं
  • यह जांचते हैं कि प्रत्येक छात्र वास्तव में क्या सीख जा रहा है

  • अपने शिक्षण कौशलों समेत अपने कक्षा कार्यभ्यास को सुधारते और अनुकूलित करते हैं।

एक विद्यालय प्रमुख होने के नाते आपकी भूमिका का एक भाग शिक्षकों को उनकी कक्षाओं में प्रयोग करने और उनके कार्याभ्यास पर विचार करने में सहायता करना भी है। जब शिक्षक शिक्षण की सहभागितापूर्ण पद्धतियों को प्रयोग करेंगे तो वे उनके फायदे पहचानने लगेंगे। जब शिक्षक खुद फायदों का अनुभव करेंगे तो वे नई पद्धतियां आत्मविश्वासी से अपनाएँगे।

गतिविधि 1 में आप अपने विद्यालय में मौजूदा शिक्षण एवं सीखने की क्रिया पर विचार करेंगे और अगले कुछ हफ्तों में सुधार के लिए कार्यबिन्दु चुनेंगे। इसके बाद, निम्नांकित गतिविधियां आपको शिक्षकों के कक्षा कार्याभ्यास को बेहतर बनाने में उनका सहयोग करने में सहायता करेंगी। इसे चित्र 2 में स्पष्ट किया गया है।

गतिविधि 1: आपकी कक्षाएं कितना विद्यार्थी–केंद्रित हैं?

यह गतिविधि आपसे यह जांचने को कहती है कि आपके विद्यालय में कितनी विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण एवं सीखने की क्रिया पहले से मौजूद है। जहां अच्छे कार्याभ्यास पहले से चल रहे हैं वहां इस बात को नोट करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि आप उसे और बढ़ा सकते हैं।

संसाधन 1 में दी गई तालिका का उपयोग करते हुए, अपने विद्यालय के मौजूदा कार्याभ्यास का एक ऑडिट करें। यह आपके लाभ के लिए है, इसलिए आपको इसे किसी को दिखाने की जरूरत नहीं है। आप इस बात के प्रमाण तलाश रहे हैं कि कितने शिक्षक अपनी कक्षाओं में विद्यार्थियों की सहभागितापूर्ण बढ़ा रहे हैं और किस हद तक। हम आपको खुद के शिक्षण पर भी विचार करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अधिकतम संभव ईमानदारी बरतें।

आप बाद की एक गतिविधि में इस ऑडिट पर लौटेंगे।

चित्र 2 विद्यार्थी-केंद्रित सीखने की क्रिया को स्थापित करना

(कक्षा में जोड़ी में कार्य का उपयोग बढ़ाने के उदाहरण का उपयोग करते हुए)।

2 टीईएसएस-इंडिया ओईआर में क्या है?

टीईएसएस-इंडिया में सीखने की क्रिया की सहभागितापूर्ण पद्धतियां विकसित करने में शिक्षकों की सहायता करने वाले संसाधन हैं। इस और अगले अनुभाग में, आप उपलब्ध संसाधनों पर नज़र डालेंगे और बदलाव के लिए एक केन्द्र बिन्दु चुनेंगे (चित्र 2 में चरण 2)।

संसाधन 2 में टीईएसएस-इंडिया परियोजना के लिए शिक्षणशास्त्र के सिद्धांत वर्णित हैं और उन बदलावों (या सीखने की क्रिया के आंदोलनों) का उपयोगी सारांश दिया गया है जिनमें सहायता के लिए इन सामग्रियों को तैयार किया गया है।

संसाधन 3 में मुख्य संसाधनों की वास्तविक विषय-वस्तु एवं अलग अलग ओईआर प्रदर्शित हैं। भाषा एवं साहित्य, प्राथमिक विज्ञान, प्राथमिक अंग्रेज़ी एवं प्राथमिक विज्ञान में से प्रत्येक के लिए 15 ओईआर हैं और मुख्य संसाधनों का एक समूह तथा संबंधित वीडियो हैं जिन्हें भारतीय विद्यालयों में फिल्माया गया है।

गतिविधि 2: टीईएसएस–इंडिया ओईआर पर नजर डालना

विस्तार से देखने के लिए एक टीईएसएस-इंडिया ओईआर चुनें। यदि संभव हो तो यह गतिविधि किसी वरिष्ठ सहकर्मी के साथ करें। ओईआर को विशिष्ट कौशल और योग्यताएं सीखने में शिक्षकों की मदद करने के लिए बनाया गया है। जब आप टीईएसएस-इंडिया ओईआर पढ़ें, तो संसाधन 4 पर एक नज़र डाल लें, जिसमें ओईआर की संरचना समझाई गई है। अपने सहकर्मी के साथ यह पहचान करें कि इकाई के प्रत्येक अनुभाग में शिक्षक क्या सीखेगा।

टीईएसएस-इंडिया मुख्य संसाधनों को देखें। ओईआर किन मुख्य संसाधनों को संदर्भित करता है? यदि संभव हो तो, ओईआर से लिंक किए गए टीईएसएस-इंडिया वीडियो देखें।

याद रखें कि टीईएसएस-इंडिया ओईआर में संपूर्ण छात्र पाठ्यचर्या को कवर नहीं किया गया है। इन्हें शिक्षकों को ऐसे विचार देने के लिए डिजाइन किया गया है जिनका अन्य विषयों के लिए आसानी से इस्तेमाल हो सकता है या जिन्हें आसानी से अन्य विषयों के लिए ढाला जा सकता है।

3 आपको किस प्रकार के बदलाव की अगुआई करनी चाहिए?

अब आप अपने विद्यालय में शिक्षण और सीखने की क्रिया में सुधार लाने के लिए अपने ऑडिट में से किसी एक मुद्दे पर ध्यान देना आरंभ करेंगे। यह महत्वपूर्ण है कि एक बार में बहुत अधिक सुधार की कोशिश न की जाए। एक बार में एक मुद्दे पर फोकस करने से आपके सफल होने की संभावना अधिक हो जाती है।

गतिविधि 3: सुधार हेतु अपने फोकस की पहचान करना

संसाधन 1 के अपने उत्तरों और टीईएसएस-इंडिया मुख्य संसाधनों (संसाधन 3) की ‘कार्याभ्यास के भागीदारीपूर्ण सिद्धांतों’ की सूची का उपयोग करते हुए, बदलाव हेतु कोई एक फोकस पहचानें। (उदाहरण के लिए, यह ‘जोड़ी में कार्य’ या ‘प्रश्न करना’ हो सकता है।)

आप संसाधन 3 की तालिका से यह देख सकते हैं कि कार्याभ्यास के प्रत्येक सिद्धांत के साथ, कौन से टीईएसएस-इंडिया ओईआर एवं वीडियो लिंक किए गए हैं, ताकि आप सभी संबंधति टीईएसएस-इंडिया संसाधनों के साथ जुड़ सकें। (भाषा व साहित्य, प्राथमिक गणित, प्राथमिक अंग्रेजी एवं प्राथमिक विज्ञान के) उन टीईएसएस-इंडिया ओईआर की एक सूची बनाएं जिनका उपयोग आप, अपने विद्यालय में इस पद्धति विकसित करने में मदद के लिए कर सकते हैं।

चित्र 3 आपको अपने विद्यालय में क्या सुधार करना है?

उदाहरण के लिए, हो सकता है कि आप जानते हों कि आपके शिक्षक कक्षाओं से पहले अपने पाठों के बारे में पर्याप्त रूप से नहीं सोचते हैं। तो इसके लिए आप पाठों की योजना बनाने पर ध्यान देने चुन सकते हैं। इससे न केवल पाठों के प्रस्तुतिकरण के तरीके में, बल्कि प्रयुक्त शिक्षण विधियों और संसाधनों की विविधता में भी सुधार संभव हो सकते हैं। वैकल्पिक तौर पर, हो सकता है कि आप चाहते हों कि विद्यार्थी थोड़ा अधिक बोलें (‘सीखने के लिए बोलना’ मुख्य संसाधन देखें), या हो सकता है कि आपके विद्यालय में बड़ी कक्षाएं हों और आप यह तय करें कि शिक्षकों के लिए बड़ी कक्षाओं को प्रभावी ढंग से पढ़ाना आसान बनाने के लिए विद्यार्थियों से जोड़ियों में कार्य करवाया जाए (‘जोड़ी में कार्य का उपयोग करना’)।

आप बदलाव की अगुआई करने के बारे में, अपने विद्यालय में बदलाव की योजना बनाना और उसकी अगुआई करना तथा अपने विद्यालय में बदलाव लागू करना नामक ओईआर में अधिक जानकारी पा सकते हैं।

इस सत्र में केवल एक फोकस चुनना महत्वपूर्ण है। अगर आप एक बार में बहुत कुछ बदलने की कोशिश करेंगे तो बदलाव कम असरदार होंगे। नीचे दिए गए वृत्त अध्ययन को पढ़ कर जानें कि कैसे एक विद्यालय नेता ने अपना एक फोकस चुना।

केस स्टडी 1: श्रीमती चड्ढा बता रही हैं अपने निष्कर्षों के बारे में

यह एक सीखने की डायरी प्रविष्टि है जिसे एक प्राथमिक विद्यालय नेता, श्रीमती चड्ढा ने लिखा है। उन्होंने अपने विद्यालय में गतिविधि 1 व 3 आज़माई थीं।

मैंने [ संसाधन 1 में दी गई] तालिका भरनी शुरू की जिससे मैं यह छानबीन करने को उद्यत हुई कि मैं यह कैसे पता करूं कि विद्यालय में वास्तव में क्या शिक्षण चल रहा है। मैंने पाया कि यह जानकारी प्रायः या तो मध्यावकाश के दौरान में शिक्षकों द्वारा मुझे बताई गई बातों से आती है या फिर अनौपचारिक चर्चाओं से। इससे मैं धारणाओं के बारे में सोचने लगी: क्या शिक्षकों की अवधारणाएं वैसे ही हैं जैसी मेरी, या फिर क्या मेरे और विद्यार्थियों की धारणाएं समान हैं या?

मैंने पाया कि मुख्य संसाधनों से मुझे इस सत्र हेतु एक फोकस खोजने के लिए प्रोत्साहन मिला, क्योंकि ऐसा बहुत कुछ था जो मुझे पता नहीं था और करने के लिए बहुत कुछ था। मेरा मानना है कि विद्यार्थियों द्वारा प्रश्न पूछे जाने से सीखने में मदद मिलती है। पाठों में क्या प्रश्न पूछे जा रहे हैं यह जानने के लिए मैंने विद्यालय में चक्कर लगाने का निश्चय किया। पाठों के दौरान बरामदों में घूमने से यह आसानी से सुनाई पड़ जाता है कि क्या चल रहा है, क्योंकि तब गर्मी की वजह से दरवाजे बंद नहीं होते। मैंने तय किया कि मैं कक्षाओं में नहीं जाऊंगी, क्योंकि मुझे चिंता थी कि विद्यार्थी और शिक्षक मुझे कक्षाओं में देखने के (अभी) अभ्यस्त नहीं हुए हैं – विद्यालय प्रमुख के प्रवेश करने से कक्षाओं में सामान्यतः जो कुछ होता वह बदल सकता था। इसलिए मैंने कक्षाओं के बाहर से सुना।

मैंने देखा कि अधिकतर कक्षाओं में शिक्षक बोल रहे थे और विद्यार्थी चुपचाप सुन रहे थे। कभी-कभार शिक्षक कोई प्रश्न पूछ लेता था और विद्यार्थी समवेत स्वर में उत्तर दे देते थे। पर न तो कोई खुले प्रश्न पूछे जा रहे थे और न ही ऐसे प्रश्न जिसमें विद्यार्थी जो कहा गया उससे असहमत हो सकते हों। विद्यार्थी बोर्ड की ओर मुंह किए कतारों में बैठे थे जहां शिक्षक बोल रहे थे।

केवल श्री मेघनाथन की कक्षा अलग थी – मैंने उन्हें विद्यार्थियों से ऐसे प्रश्न पूछते सुना जिन पर विद्यार्थियों को उनसे असहमत होना पड़ा और अपने तर्कों की व्याख्या करनी पड़ी। उन्होंने विद्यार्थियों को उत्तर देने से पहले ‘सोचने का समय’ भी दिया। मैं विद्यार्थियों को प्रश्नों के बारे में एक दूसरे से बात करते सुन पा रही थी, और खिड़की से देखने पर मैंने पाया कि वे एक-दूसरे की ओर मुड़ गए थे और जोड़ियों में कार्य कर रहे थे।

यह साफ था कि श्री मेघनाथन की कक्षा में एक अच्छा कार्याभ्यास चल रहा था, पर मुझे पता था कि मुझे सावधान रहना है क्योंकि अगर मैंने सार्वजनिक रूप से केवल उन्हीं की प्रशंसा की तो बाकी शिक्षकों में रोष उत्पन्न हो सकता था। मैंने तय किया कि मैं ‘प्रश्न करने’ को इस सत्र का फोकस बनाऊंगी ताकि मैं श्री मेघनाथन की सहभागिता पूर्व शिक्षण पद्धति और टीईएसएस-इंडिया के संसाधनों के उदाहरणों का लाभ उठा सकूं।

4 अपने शिक्षकों के साथ कार्य करना

आपकी भूमिका का एक भाग यह भी है कि आप अपने शिक्षकों और विद्यार्थियों, दोनों के लिए सीखने का ऐसा वातावरण बनाने की दिशा में कार्य करें जहां शिक्षक कार्य करने के नए तरीके आजमाने तथा नए कौशल विकसित करने के लिए प्रोत्साहित हों। शिक्षकों के लिए ऐसा करना तब तक कठिन होगा जब तक कि आप उन्हें यह महसूस न कराएं कि उन्हें आपका समर्थन प्राप्त है और पुरानी आदतों से अलग कुछ प्रयोगों सुरक्षित है।

नीचे करके सीखने के इस लोकाचार को बढ़ावा देने के कुछ ऐसे विचार दिए जा रहे हैं जो एक विद्यालय के कुछ वरिष्ठ शिक्षकों के हैं:

अपना फोकस पहचान चुकने के बाद, आपको अपने शिक्षकों को अपनी योजना से जोडना होगा। माध्यमिक शिक्षा के परिप्रेक्ष्य में, अपने विभाग प्रमुखों के साथ शुरूआत करना अच्छा विचार है। गतिविधि 4 सुझाती है कि कैसे आप अपने विभाग प्रमुखों से अपने विचार साझा कर सकते है और गतिविधि 5 सुझाती है कि कैसे आप सभी शिक्षकों को शामिल कर सकते हैं।

गतिविधि 4: अपने शिक्षकों को संलग्न करना

चित्र 4 विद्यालय नेता को अपने शिक्षकों को संलग्न करना चाहिए।

अपने विभाग प्रमुख के साथ काम करते हुए, अपने विद्यालय मे शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में सुधार फोकस करने का अपना विचार साझा करें। साथ मिल कर माध्यमिक अंग्रेजी, माध्यमिक गणित और माध्यमिक विज्ञान टीईएसएस–इंडिया ओईआर को विस्तार से पढ़ें। याद रखें, गतिविधियों को अन्य विषय क्षेत्रों के लिए आसानी से ढाला जा सकता है, पर सबसे पहले हर शिक्षक को ओईआर और उनकी पद्धति से परिचित होना होगा।

साथ मिल कर सोचें कि कैसे आपके शिक्षक टीईएसएस-इंडिया ओईआर तक पहुंचेंगे और कैसे आप उनका परिचय ओईआर से कराएंगे। यहां कुछ विद्यालय नेताओं के विचार दिए जा रहे हैं:

अब इस पर विचार करें कि आप सत्र के बदलाव पर फोकस करने के लिए इसमें अपने शिक्षकों को कैसे जोडेंगे। शायद किसी स्टाफ बैठक में या किसी प्रशिक्षण कार्यशाला के रूप में? बदलाव की जरूरत के बारे में अपनी ‘कहानी’ सोचें। याद रखें कि आपको शिक्षकों को उनके तौर- तरीके बदलने का आदेश नहीं देना है बल्कि आपको उन्हें समझा-बुझा कर राजी करना है और ऐसा कर सकने लायक बनाना है। आप कुछ ऐसा कह सकते हैं:

चलिए देखते हैं कि विद्यार्थियों को लाभ होता है या नहीं।

इस बारे में सोचें कि आप अपने शिक्षकों को ओईआर का चयन करने में कैसे शामिल कर सकते हैं। इसके लिए आप उनसे कह सकते हैं कि वे पता करें कि इस सत्र में वे कौन-कौन से विषय पढ़ाना चाहते हैं, और फिर वह ओईआर ढूंढें जो विषय से संबंधित हो और आपकी चुनी हुई पद्धति प्रदर्शित करता हो। आप संसाधन 3 को पर्चों के रूप में साझा कर सकते हैं या फिर उसे अपने ऑफिस की दीवार पर टांग सकते हैं।

यदि हो सके तो, तो टीईएसएस-इंडिया वीडियो दिखाएं और सोचें कि उससे किन चर्चाओं को प्रोत्साहित किया जा सकता है। आप कौन से प्रश्न पूछ सकते हैं या अपने शिक्षकों से आप कौन सी गतिविधियां करने को कह सकते हैं? उन प्रश्नों के बारे में पहले से सोच लें जो आपके सामने रखे जा सकते हैं। ‘संभावित कठिनाइयों’ पर संसाधन 5 पढ़ें ताकि आप अपने शिक्षकों द्वारा उठाए जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तैयार हों।

जब आप विचार प्रस्तुत कर चुके हों, तो अपने शिक्षकों के लिए कोई सरल सा कार्य तय कर सकते हैं। आप उनसे एक-दूसरे के ‘मित्र’ के रूप में कार्य करते हुए, जोड़ियों में कार्य करने को कह सकते हैं। उनसे कहें कि वे ओईआर का उपयोग करते हुए, साथ मिल कर शिक्षण गतिविधियां तैयार करें और फिर एक-दूसरे का प्रेक्षण करें। उन्हें अपने पाठों की योजना बनाने की जरूरत पड़ेगी और जब वे एक-दूसरे का प्रेक्षण कर रहे हों तब उनकी कक्षाओं को आप खुद पढ़ाने की पेशकश करके आप उनकी मदद कर सकते हैं।

5 सहभागितापूर्ण पद्धति कायम रखना

आपने भले ही गतिविधि 4 में दिए गए सुझाव का इस्तेमाल किया हो या अपने शिक्षकों के लिए कोई विकल्प तैयार किया हो, आपको क्या कुछ चल रहा है इस पर नजर रखने की जरूरत होगी और आपको यह मूल्यांकन भी करना होगा कि आपकी फोकस परियोजना, योजनानुसार विकसित हो रही है या नहीं (चित्र 2 में चरण 5)। निगरानी और मूल्यांकन से यह भी पता चल सकता है कि आगे क्या करना है और इससे, आपको अच्छी कार्यप्रणालियों की पहचान करने या अपनी योजनाओं में सुधार और बदलाव करने का मौका मिल सकता है।

आप कुछ शिक्षकों के लिए कोच की भूमिका भी ले सकते हैं, या फिर आप इस कार्य को करने में सक्षम शिक्षकों को यह भूमिका सौंप सकते हैं। (यदि आप इस पद्धति के बारे में अपने ज्ञान को अद्यतन करना चाहते हैं तो सलाह देने (मेंटरिंग) एवं कोचिंग देने पर एक अलग नेतृत्व इकाई उपलब्ध है।)

केस स्टडी 2: श्रीमती चड्ढा द्वारा निगरानी एवं मूल्यांकन

मैं यह जानने को बहुत उत्सुक थी कि शिक्षक अपनी कायप्रणाली किस प्रकार विकसित करेंगे और टीईएसएस-इंडिया ओईआर का इस्तेमाल कैसे करेंगे। मैंने शिक्षकों को प्रोत्साहित किया कि वे अपने अनुभवों के बारे में मुझसे और दूसरों से बात करें। इससे, मुझे चीजें कैसी चल रही हैं इस बारे में थोड़ी अंदरूनी जानकारी मिली। अब मैं जब भी कभी विद्यालय में टहलती हूँ, तो यह सुनने की कोशिश करती हूँ कि कक्षाओं में किस बारे में बात की जा रही है और बात कौन कर रहा है।

चित्र 5 कक्षाओं में बात कौन कर रहा है?

कुछ हफ्ते बीतते-बीतते, मैंने पाया कि सुश्री चक्रकोड़ि की कक्षा में सूक्ष्म बदलाव आ रहे थे। वे अपने विद्यार्थियों के मन को खोलने के लिए प्रश्न पूछने की तकनीक का इस्तेमाल पहले से कर रही थीं, और अब वे अपनी कार्यप्रणाली को विकसित करने के लिए एक अन्य शिक्षक के साथ मिल कर, ओईआर के उपयोग पर कार्य कर रही थीं। उन्होंने मुझे बताया था कि यह कार्य अच्छा चल रहा था। सूक्ष्म बदलाव यह था कि उन्होंने ऐसे प्रश्नों का सेट तैयार कर लिया था जिनसे उनके विद्यार्थियों को यह सोचना होता था कि ‘वे क्या जानते हैं’ और ‘वे उस बारे में निश्चित क्यों हैं’

मैंने सुश्री चक्रकोड़ि से पूछा कि क्या बदलाव हुआ है। उन्होंने कहा कि अपने सभी पाठों में वे प्रश्न पूछने की तकनीक पर काम कर रहीं थीं। पर शिक्षण के बीच में ही ऐसे प्रश्न सोचना कठिन मालूम दे रहा था जो विद्यार्थियों के ज्ञान का आकलन करने में उनकी और उनके विद्यार्थियों की मदद करें। इसलिए उन्होंने हर पाठ से पहले, संभावित प्रश्नों को लिखना शुरू कर दिया था। वे यह पहले ही निष्कर्ष निकाल चुकी थीं कि कौन से प्रश्न सबसे अच्छा परिणाम दे रहे थे।

मैंने एक नोट लिख लिया कि अगली स्टाफ बैठक में मैं सुश्री चक्रकोड़ि और दूसरों से कहूंगी कि वे अपने सर्वोत्तम प्रश्नों को साझा करें ताकि दूसरे भी उन्हें अपना सकें।

यह केस स्टडी दिखाती है कि विद्यालय नेता न केवल क्या चल रहा है इसकी निगरानी कर रहा है, बल्कि यह भी सुनिश्चित कर रहा है कि सर्वोत्तम कार्यप्रणाली को साझा किया जाए, जिससे नई पद्धतियों के अधिक व्यापक अंगीकरण को बढ़ावा मिल सके। अगली गतिविधि आपको अपनी फोकस परियोजना के संवेग को बनाए रखने में मदद करने पर लक्षित है।

गतिविधि 5: अपने शिक्षकों के लिए आगे के कार्य तय करना

अपनी अगली स्टाफ बैठक के बारे में सोचना शुरू करें और इस बारे में विचार करें कि अगली बैठक का उपयोग प्रगति की समीक्षा करने के लिए और अपने व अपने शिक्षकों के लिए आगे के कार्य व लक्ष्य तय करने हेतु इस बैठक का उपयोग कैसे किया जा सकता है। यह सोचें कि आप बैठक के लिए किस प्रकार ऐसी तैयारी कर सकते हैं जिससे आप सर्वाधिक प्रभाव हासिल कर पाएं और शिक्षक आपसे केवल बात ही न करते रहें।

आप अध्यापकों से अपने अनुभवों की चर्चा करने के लिए जोड़ियों या छोटे-छोटे समूहों में र्काय करने को कह सकते हैं। संसाधन 6 में कुछ ऐसे प्रश्न हैं जिनका आप उपयोग कर सकते हैं।

आपने जो अच्छे कार्याभ्यास देखे हों उन्हें साझा कर सकते हैं, पर ध्यान रखें कि प्रशंसा भी सभी में साझी हो। अध्यापकों को अपनी सफलता की कहानियां साझा करने के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। यहां तक कि आप विद्यार्थियों से प्रतिक्रिया (उपख्यानात्मक या किसी सर्वेक्षण से) शामिल करने के बारे में भी सोच सकते हैं।

इस बारे में सोचें कि अध्यापक आपके अध्यापन फोकस के साथ अपने कौशलों को और आगे विकसित करने के लिए क्या कर सकते हैं। उन्हें और क्या सहायता चाहिए होगी? क्या ऐसे और भी टीईएसएस-इंडिया ओईआर हैं जिनसे मदद मिल सकती है? आपको कुछ विचार तैयार रखने चाहिए, पर साथ ही, उनके सुझावों को भी सुनें और साथ मिल कर तय करें कि आगे क्या करना है।

Discussion

चर्चा

आपके स्टाफ सदस्य आपके एवं अन्य अध्यापकों द्वारा उनके अध्यापन कार्य को सम्मान व मान्यता मिलते देख बहुत खुश होंगे। प्रगति बैठक आयोजित कर आप जो भी सकारात्मक बदलाव हुए हों उन्हें पहचान सकते हैं, जो भी कठिनाइयां हों उन्हें हल करने पर ध्यान दे सकते हैं और अपने स्टाफ को संलग्न रख सकते हैं। उत्साही और प्रतिबद्ध स्टाफ की सार्वजनिक प्रशंसा की जानी चाहिए। पर याद रखें कि कुछ स्टाफ़ सदस्य, अन्य से अधिक आत्मविश्वासी होंगे, इसलिए आपको, छोटे-छोटे बदलावों की भी प्रशंसा करनी चाहिए और अतिरिक्त सहयोग का प्रस्ताव रखना चाहिए। याद रखें कि आप सहभागितापूर्ण पद्धति का प्रतिरूपण कर रहे हैं जिसमें आप, विचारों और अनुभवों के आदान-प्रदान को मान देते हैं।

अगला चरण है अच्छे कार्याभ्यास को समेकित करना। अगले केस स्टडी में, विद्यालय प्रमुख श्रीमती चड्ढा बता रही हैं कि कैसे वे अपने विद्यालय में बदलाव ले आ पाई हैं।

केस स्टडी 3: सीखने की क्रिया के लिए प्रश्न पूछना रोजाना का कार्याभ्यास बन जाता है

श्रीमती चड्ढा से साक्षात्कार में पूछा गया कि उन्होंने अपने विद्यालय में कैसे बदलाव ले आई यहां वे अपने सामने आईं चुनौतियों और अपनी कुछ रणनीतियों के बारे में बता रही हैं।

सच कहूं तो, मुझे किसी भी परियोजना का जो पहलू सबसे चुनौतीपूर्ण लगता है वह है बदलाव लाना यूं तो यह मान लेना कि ऐसा हो गया है और अगली परियोजना पर चले जाना बहुत आसान है। पर मैंने सोचा कि मुझे ऐसा करने से रोकने का केवल एक ही तरीका है, और वह यह है कि बदलाव लाना के लिए एक योजना लिखूं, समीक्षाओं की तारीखों समेत, और उसे अपनी डायरी में लिख लूं।

मैं खुश थी कि सभी अध्यापकों ने अपने अध्यापन में थोड़े-थोड़े बदलाव किए थे, और मैं देख पा रही थी कि सीखने की क्रिया में मदद के लिए कक्षा में पहले से अधिक प्रश्न पूछे जा रहे थे। अधिक विविधतापूर्ण प्रश्न पूछे जा रहे थे और विद्यार्थियों को उत्तर देने के लिए अधिक समय दिया जा रहा था। कुछ अध्यापक अपने कई पाठों में बड़े बदलाव कर रहे थे; कुछ अन्य ने किसी ओईआर से कभी-कभार कोई गतिविधि की, प्रायः इसलिए क्योंकि उन्हें अपने सहकर्मियों या मेरे द्वारा ऐसा करने के लिए प्रेरित किया गया।

मैं स्वयं कक्षाओं को नहीं पढ़ाती हूँ, पर मैं उन अध्यापकों की कक्षाएं ले रही थी जो एक-दूसरे का प्रेक्षण करने जा रहे थे। ऐसे कुछ मौकों के बाद मैंने जाना कि मेरे स्वयं के अध्यापन कार्याभ्यास को करने के लिए भी मेरे सामने मौका था। चूंकि साक्षरता मेरा अध्यापन का विषय, इसलिए मैंने भाषा एवं साक्षरता इकाई कक्षा में बहुभाषावाद से एक गतिविधि का उपयोग करते हुए एक अन्य अध्यापक के साथ कार्य किया। इससे मुझे एहसास हुआ कि कार्य कितना चुनौतीपूर्ण था औ थे। र अलग–अलग तरीको से अध्यापक उसे कर रहे।

संवेग बनाए रखने के लिए, मैंने अगले दो सत्रों के लिए निम्नांकित का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया है:

  • प्रगति पर चर्चा के लिए मासिक स्टाफ बैठकें
  • समय जब अध्यापक मिलकर संयुक्त गतिविधियों की योजना बना सकते हैं
  • वे समय जब अध्यापक एक-दूसरे का प्रेक्षण कर सकते हैं (मैं निश्चित तौर पर कह सकती हूँ कि इनमें परिवर्तन होंगे, पर कम-से-कम एक योजना तो तैयार है ही)
  • किसी अध्यापक द्वारा दस मिनट की साप्ताहिक प्रस्तुति जिसमें वे इस बारे में बात करेंगे कि वे किन चीजों से प्रयोग करते रहे हैं। मैं प्रगति पर नजर रखना जारी रखूंगी।

किसी भी बदलाव के साथ यह पहचानना महत्वपूर्ण है कि:

  • कुछ सीखा गया है और उस को सराहें।
  • क्या कुछ चुनौतीपूर्ण था
  • चुनौतियों पर काबू कैसे पाया गया
  • क्या सबक सीखे गए।

गतिविधि 6: प्रशंसा करना और चिंतन

चित्र 6 आपको अपने कार्य की खुशी मनानी चाहिए और उसे प्रदर्शित करना चाहिए।

अपने सत्र के अंत में आप प्रशंसा करने लिए और शिक्षण एवं सीखने में फोकस मुद्दे पर किए गए कठिन कार्य का आभार प्रकट करने के लिए एक बैठक आयोजित कर सकते हैं। इसकी तैयारी के लिए आप चाहें तो अपनी सीखने की डायरी पर फिर से नजर डाल कर खुद को यह याद दिला सकते हैं कि आपने शुरूआत कहां से की थी। इस बैठक को रूखा-सूखा या औपचारिक नहीं बल्कि क्रियाशील और सहभागितामुक्त होना चाहिए।

आप ‘विचारों की दीवार’ का उपयोग भी आजमा सकते हैं। यह दीवार पर एक ऐसा स्थान होता है जहां व्यक्ति विचारों को सोचते समय उन्हें लिख सकते हैं, दूसरों के लिखे विचार देख सकते हैं और दूसरों की टिप्पणियों में अपने विचार जोड़ सकते हैं। इसका लाभ यह होता है कि समय के साथ यह बढ़ती जाती है और इसमें हर कोई शामिल होता है। अध्यापकों को टिप्पणी लिखने को प्रेरित करने के लिए, आप उदाहरण के तौर पर, निम्नांकित शीर्षकों के साथ कागज के बड़े-बड़े टुकड़ों का इस्तेमाल कर सकते हैं या पिन से छोटे-छोटे नोट्स बोर्ड पर लगा सकते हैं:

  • ‘मैंने क्या सीखा है’
  • ‘मेरे अध्यापन कार्याभ्यास में आए बदलाव’
  • ‘मेरे विद्यार्थियों के सीखने के व्यवहार में आए बदलाव’
  • ‘मेरे विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों में आए बदलाव’
  • ‘चुनौतियां’

इसे मजेदार और उत्साहवर्धक गतिविधि होना चाहिए, जिसमें स्टाफ सदस्य बैठे रहने की बजाए, ‘विचारों वाली दीवार’ (जो कोई ब्लैकबोर्ड या कागज की बड़ी सी शीट हो सकती है) के इर्द-गिर्द इकट्ठा होकर खड़े रहें।

अगर आपका स्टाफ समूह बड़ा है, तो आप अलग अलग दीवारों पर अलग अलग विषय लिख सकते है और स्टाफ से कह सकते हैं कि वे दीवार तक जाएं और कागज की शीटों पर अपनी टिप्पणियां लिखें और फिर प्रत्येक शीट पर साथ मिलकर चर्चा करें। अगर आपके पास चिपकाने वाली नोट्स की पर्चियां हों तो आप अपने स्टाफ से उन पर लिख कर उन्हें कागज की उपयुक्त शीट पर चिपकाने को कह सकते हैं। एक अन्य विकल्प के तौर पर, आप कागजी मेजपोश का इस्तेमाल कर सकते हैं और स्टाफ से कह सकते हैं कि वे एक-एक करके मेजों पर जाते रहें और समूह के रूप में बैठ कर उस पर लिखते जाएं।

चित्र 7 अपने अध्यापकों के विचारों का संग्रह करना।

किसी भी विचार-मंथन की गतिविधि के समान, आपको उसे सारांशित करने में और अंत में योगदानों का आभार प्रकट करते हुए सभी चीजों को एक साथ रख कर एक बड़ा चित्र बनाने में सक्षम होना होगा। आप बाद में प्रदर्शनों को लगा छोड़ सकते हैं, या भावी संदर्भ के लिए उन्हें टाइप करवा सकते हैं।

Discussion

चर्चा

अपने सत्र की फोकस परियोजना की सफलता को सहेजना महत्वपूर्ण है। ऐसा करने का अर्थ है कि:

  • प्रगति को सभी ने स्वीकृति दी है
  • व्यक्तियों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया है।

इसे औपचारिक बैठक की बजाए, किसी ऐसी मजेदार गतिविधि के रूप में किया जा सकता है जो कुशलक्षेम और सहशासन का एहसास देती हो। आदर्श रूप से, आप बोलने से ज्यादा सुनेंगे। उसके बाद, आपने जो कुछ सुना उस जानकारी का उपयोग यह योजना बनाने में कर सकते हैं कि अपने विद्यालय में अधिक सहभागितापूर्ण शिक्षण कैसे हो सकता है।

6 सारांश

इस इकाई में आप चित्र 2 में वर्णित प्रक्रिया से गुजरे हैं। अब आप के प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक tess-india ओईआर से परिचित हो गए हैं और यह समझते हैं कि वे किस प्रकार बनाए गये हैं और अपनी स्थितियों में आप उनका उपयोग कैसे कर सकते हैं। ओईआर स्वतंत्र हैं और संपूर्ण रूप में इनका अध्ययन किया जा सकता है, पर अब तक आप यह जान चुके होंगे कि विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए लचीले ढंग से उनका इस्तेमाल किया जा सकता है।

हो सकता है कि अपने विद्यालय में आप जिस प्रकार का अध्यापन और अध्ययन चाहते हों उसके बारे में आपने कोई सोच बना रखी हो यदि आपजो व्यवहार चाह रहे हैं उन्हें स्वयं उदाहरण के रूप में दर्शाएं और कार्य के नए तरीकों के साथ प्रयोग करने में अपने स्टाफ की मदद करें तोआपका उत्साह आपके स्टाफ तक आ जाएगा।

अपने विद्यालय के अध्यापन और अध्ययन को बदलने में tess-india ओईआर आपकी मदद कर सकते हैं। इसके लिए वे आपको अपने अध्यापकोंको व्यावहारिक रूप से विकसित करने एवं उनकी मदद करने के साधन प्रदान करते हैं।

संसाधन

संसाधन 1: विद्यार्थी-केंद्रित अध्यापन एंव अध्ययन का ऑडिट

तालिका R1.1 विद्यार्थी-केंद्रित अध्यापन एंव अध्ययन का ऑडिट।

कथनसंबंधित मुख्य संसाधनमेरे विद्यालय में यह किस सीमा तक हो रहा है? (कभी नहीं, यदा-यह कहां हो रहा है उसके उदाहरण (अध्यापक, कक्षा,
अध्यापक पाठों की योजना बनाते हैं जिनमें विविध प्रकार की अध्यापन और सीखने (ज्ञानार्जन) की पद्धतियां शामिल होती हैं।‘पाठों का नियोजन करना’
शिक्षक अपनी कक्षाओं में निर्माणात्मक आकलन का उपयोग करते हैं।‘प्रगति और कार्यप्रदर्शन का आकलनकरना’
अध्यापक विद्यार्थियों के कार्य की निगरानी करते हैं और हर विद्यार्थी को अलग अलग, मौखिक एवं लिखित (फ़ीडबैक) देते हैं।‘निगरानी करना और प्रतिक्रिया देना’
अध्यापक सीखने की क्रिया में बच्चों की रुचि जगाने के लिए कहानी कहने, रोल प्ले एवं नाटको का उपयोग करत है।‘कथावाचन, गाने, भूमिका पालन और नाटक’
सीखने की क्रिया में सहयोग देने और उसे दैनिक जीवन के साथ जोड़ने के लिए अध्यापक सुपरिचित स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हैं।‘स्थानीय संसाधनों का उपयोग’
अध्यापक ऐसे विविध खुले सवाल पूछते हैं जिनमें विद्यार्थियों को व्याख्या करने का और अपने विचार सामने रखने का मौका मिले।‘चिंतन को बढ़ावा देने के लिए प्रश्न पूछने का उपयोग
अध्यापक विद्यार्थियों को उनके शिक्षा बिन्दु के बारे में, पूरी कक्षा के रूप में, जोड़ी में या समूहों में बोलने के लिए प्रोत्साहित कर सकते है।‘सीखने के लिए बातचीत करें’
अध्यापक पाठों में सभी विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से शामिल करते हैं।‘सभी को शामिल करना’

संसाधन 2: शिक्षण-के सिद्धांत

Tess-India का लक्ष्य है विद्यालयों और अध्यापकों के लिए बदलाव लाना। अध्यापक विकास ओईआर राष्ट्रीय नीति के लक्ष्यों के साथ सर्वांगसम हैं। Tess-India के मूल में सीखने वाले के रूप में विद्यार्थी है और उनके सीखने के अभिकर्ता के रूप में अध्यापक है। Tess-India ओईआर का मकसद अध्यापकों को, सीखने की क्रिया और सीखने वालों के प्रति धारणाएं बनाने वाले पारंपरिक कार्याभ्यासों एवं आदतों से दूर कर उन्हें अधिक सक्षम बनाने वाले कार्याभ्यास की ओर अग्रसर करने का है। वे अध्यापकों को अपनी सीख को अपने कार्याभ्यास में लागू करने, उनके प्रदर्शनों की सूची को विस्तार देने और शिक्षा के लक्ष्यों की उनकी समझ में परिवर्तन लाने के विचार एवं साधन प्रदान करते हैं। अध्यापक परिवर्तन का मॉडल, प्रयोग करने के बारे में है और अध्यापकों द्वारा गलतियां किए जाने और खुद को चुनौती देने से मिलने वाले आनंद और प्रेरणा के महत्व को मान्यता देता है।

Tess-India अध्यापक विकास ओईआर द्वारा प्रवर्तित शिक्षण में परिवर्तन (अथवा सीखने के आंदोलन) चित्र R2.1 में सारांशित किया गया है।

चित्र R2.1 Tess-India सीखने का आंदोलन (प्रोफ़ेसर पेट्रिसिया मर्फी द्वारा रचित रेशनेल एंड एम्स से अनुकूलित)।

संसाधन 3: Tess-India मुख्य संसाधनों एवं ओईआर की सूची

  • पाठों का नियोजन करना: विद्यार्थी प्रभावी ढंग से सीख सकें इसलिए अध्यापकों को ऐसी गतिविधियों की योजना बनानी होगी जो उनके विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान में वृद्धि करती हों। इस मुख्य संसाधन में विद्यार्थियों के सीखने को बढ़ाने के लिए, पाठ की योजना बनाते समय अपनाई जाने वाली पद्धतियां और क्रियाएं दी गई हैं।
  • सभी को शामिल करना: कक्षा की गतिविधियों में सभी विद्यार्थियों को भाग लेने का अवसर मिले यह सुनिश्चित करने के लिए अध्यापकों को अपने विद्यार्थियों को समझना होगा,। यह जानना होगा कि वे क्या जानते हैं और कैसे जानते हैं। यह मुख्य संसाधन सभी विद्यार्थियों को सीखने के अवसर उपलब्ध कराने के विचार प्रस्तुत करता है।
  • सीखने के बात करें विद्यार्थियों के लिए एक-दूसरे से और अपने अध्यापक से बात करने के अवसर पैदा करना सीखने का पुष्ट करने के लिए अत्यावश्यक है। विद्यार्थी बातचीत के जरिए अपनी समझ साझा करते हैं और उसे नई सीख से जोड़ते हैं। सभी आयु के विद्यार्थियों के लिए बातचीत महत्वपूर्ण है। यह मुख्य संसाधन दर्शाता है कि अध्यापक कक्षा में विद्यार्थियों के लिए उत्पादक बातचीत में संलग्न होने के अवसर कैसे दें सकते हैं।
  • जोड़ी में कार्य का उपयोग करना: जोड़ी में कार्य से विद्यार्थी अपनी समझ के बारे में बातचीत करके और उसे एक-दूसरे तक संप्रेषित करके एक-दूसरे से सीखने में समर्थ बनते हैं। इस मुख्य संसाधन में इस संबंध में विचार दिए गए हैं कि कैसे जोड़ी में कार्य का उपयोग सभी विषयों और आयु के विद्यार्थियों के सीखने को सहारा देने के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
  • चिंतन को बढ़ावा देने के लिए खुले प्रश्न पूछना: अच्छे प्रश्न पूछना अध्यापकों के लिए एक महत्वपूर्ण कौशल होता है। खुले सवालों से विर्द्याथियों में चिंतन प्रेरित हो सकता है। ऐसे प्रश्न यह जानने में भी अध्यापकों की मदद करते हैं कि उनके विद्यार्थी क्या जानते हैं। इस मुख्य संसाधन में अपनेविद्यार्थियों के उत्तरों को ध्यानपूर्वक सुनने के साथ-साथ, उनके चिंतन को विस्तार देने के लिए अलग अलग प्रकार के प्रश्नों का उपयोग करने के विचार दिए गए हैं।
  • निगरानी करना और फीडबैक देना: यह मुख्य संसाधन अध्यापकों को प्रेक्षण और, चिंतन प्रेरित करने के लिए प्रश्नों के साथ हस्तक्षेप करने से पहले विद्यार्थियों की बातचीत को और उससे वे जो समझ विकसित कर रहे हैं उसको ध्यान से सुनने के लिए प्रोत्साहित करता है।
  • समूहकार्य का उपयोग करना: विद्यार्थियों को समूह में कार्य करने हेतु संगठित करना और उन्हें एक-दूसरे के विचारों में वर्धन करने तथा अपनी समझ विकसित करने के लिए अवसर देना। इस मुख्य संसाधन में अध्यापकों के लिए विभिन्न गतिविधियों में विद्यार्थियों को संगठित करने के कुछ तरीके दिए गए हैं।
  • प्रगति और प्रदर्शन का आकलन करना: विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन करने से अध्यापकों को वह प्रमाण मिलता है जिसकी उन्हें अपने प्रत्येक विद्यार्थी के लिए अगली सीखने (ज्ञानार्जन) की गतिविधि की योजना बनाने के लिए आवश्यकता होती है। इस मुख्य संसाधन में अलग अलग प्रकार के आकलन समझाए गए हैं और इस बात की छानबीन की गई है कि निर्देश से पहले, उनके दौरान और उनके बाद आकलन कैसे किया जा सकता है।
  • स्थानीय संसाधनों का उपयोग करना: संसाधन सीखने की क्रिया को विद्यार्थियों के लिए सुपरिचित तथा अर्थपूर्ण बना कर गतिविधियों में प्रामाणिकता उत्पन्न कर सकते हैं। संसाधनों से विद्यार्थियों को वस्तुओं (जैसे फलों की फांक और काउंटर) से प्रतीकों (जैसे संख्याएं या भिन्न) तक ऐसे तरीके से आने में मदद मिलती है जो उनके लिए अर्थपूर्ण है। इस प्रकार, संसाधनों का रचनाशील ढंग से उपयोग करने से सीखने की गतिविधियां विद्यार्थियों के लिए अधिक प्रेरक एवं प्रासंगिक बन जाती हैं।
  • कहानी सुनाना, गाने, रोल प्ले और नाटक: इस मुख्य संसाधन में बताया गया हैं कि कैसे अध्यापक संपूर्ण पाठ्यक्रम के विभिन्न क्षेत्रों में कहानी सुनाने, गीत, रोल प्ले तथा नाटकों का उपयोग करके विद्यार्थियों को विचार विकसित करने एवं एक-दूसरे से ज्ञान साझा करने में सक्रिय कर सकते हैं।

तालिका R3.1 प्राथमिक अंग्रेजी ओईआर में मुख्य संसाधन एवं वीडियो। here

तालिका R3.2 प्राथमिक गणित ओईआर में मुख्य संसाधन एवं वीडियो। here

तालिका R3.3 प्राथमिक विज्ञान ओईआर में मुख्य संसाधन एवं वीडियो। here

Click here for Table R3.4 Key resources and videos in the Elementary Language and Literacy OERs.

संसाधन 4: अध्यापक विकास ओईआर के अनुभाग

तालिका R4.1 टीईएसएस-इंडिया अध्यापक विकास ओईआर की विशेषताएं।

यह इकाई किस बारे में हैअध्यापन पद्धति एवं इकाई के पाठ्यक्रम के विषय का परिचय देता है
इस इकाई से विद्यालय नेता क्या सीख सकते हैंये अध्यापक के लिए ज्ञानार्जन अपेक्षाएं हैं और यह इकाई में ज्ञानार्जन के मुख्य अवसरों पर प्रकाश डालता है।
यह दृष्टिकोण क्यों महत्वपूर्ण हैयह अनुभाग समझाता है कि क्यों यह पद्धति, अध्यापक को अपनी सीख को विभिन्न पाठ्यक्रम परिप्रेक्ष्यों में लागू करने में मदद करने के लक्ष्य के साथ, महत्वपर्ण है।
गतिविधि

ये गतिविधियां अध्यापक द्वारा की जानी होती हैं। इनमें से अधिकांश गतिविधियां उन्हें अपने विद्यार्थियों के साथ कक्षा में करनी होती हैं, पर कुछ में सहकर्मियों के साथ परस्पर सहयोगी ढंग से कार्य करना या कक्षा गतिविधियों की तैयारी करना शामिल होता है। इन गतिविधियों से अध्यापक को ऐसे कार्याभ्यास लागू करने में मदद मिलती है जो शिक्षार्थियों को ज्ञानपूर्ण व्यक्ति के रूप में स्थित करती हैं, संवादिक अन्योन्यक्रियाओं को बढ़ावा देती हैं और पूर्व ज्ञान को ध्यान में रखते हुए संरचित ज्ञानार्जन अनुभव प्रदान करती हैं। इन गतिविधियों का बीड़ा उठाने के जरिए ही पारंपरिक कार्याभ्यास भंग होंगे तथा अध्यापक को अध्यापन

एवं ज्ञानार्जन के बारे में नई समझ विकसित करने में मदद मिलेगी।

वृत्त अध्ययन

ये सीधे अध्यापकों द्वारा, उनके अनुभवों के वर्णन हैं जो उन्हें वर्णित, समान प्रकार की, प्रारंभिक या अनुवर्ती गतिविधियां करने में हुए हैं। वृत्त अध्ययनों का इस्तेमाल यह दिखाने में किया जाता है कि अध्यापक, भारतीय अध्यापकों के सामने मौजूद चुनौतियों, जैसे बड़ी, बहुभाषी एवं बहुश्रेणी कक्षाओं, और यथार्थ परिस्थितियों में संसाधनों के अभाव आदि पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देते हैं। विशेष रूप से, वे समावेशी कार्यभ्यास दर्शाते हैं और यह दर्शाते हैं कि पूर्व ज्ञान कैसे प्रकट करवाया जाए और अध्यापन को विद्यार्थियों की जिंदगियों के लिए प्रासंगिक कैसे बनाया जाए। वृत्त अध्ययन पारस्परिकता, यानी भागीदारी को सहारा

विचार के लिए रुकेंइससे अध्यापक को अपने मौजूदा कार्याभ्यास या अनुभव पर, अथवा गतिविधियां करते समय या वृत्त अध्ययन पर चर्चा करते समय उन्होंने जिन चीजों पर ध्यान दिया है उन पर, उद्देश्यपूर्ण ढंग से चिंतन करने का प्रोत्साहन मिलता है। इस प्रकार का चिंतन ही अध्यापक के लिए ज्ञानार्जन का कारण बनेगा।
वर्णनयह वर्णन उन पद्धतियों और तकनीकों के लाभों को सुदृढ़ बनाता है जो ओईआर का फोकस हैं। यह दिखाता है कि कैसे पद्धति के विभिन्न पहलू साथ में जुड़ते हैं और एक-दूसरे को पूरा करते हैं। वर्णन का उद्देश्य अध्यापक को अपनी सीख को विभिन्न पाठ्यक्रम संदर्भों में स्थानांतरित करने में समर्थ बनने के लिए सहायता देना है।
सारांशइसमें इकाई में शामिल तकनीक का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।
संसाधनइनमें गतिविधियां करने में अध्यापक को सहयोग देने वाली सामग्रियां हैं। उनमें पद्धति के बारे में और विस्तृत विवरण (जैसे मुख्य संसाधनों में से कोई एक), विषय ज्ञान के विकास हेतु सहयोग, कक्षा संसाधन, एनसीएफ़ की लिंक या समान प्रकार की कक्षा गतिविधियों के और उदाहरण हो सकते हैं।
अतिरिक्त संसाधनये अध्यापक को अपना ज्ञानार्जन ओईआर से भी आगे ले जाने के लिए तथा, उनके विकासशील पेशेवर कार्याभ्यास में सहयोग देने हेतु अन्य संसाधनों के साथ संलग्न होने के लिए उन्हें प्रोत्साहित कर उन्हें सशक्त बनाने के लिए हैं। विशेष रूप से, यह विषय ज्ञान के विकास में सहयोग देने का और भारत एवं अन्य
संदर्भ/संदर्भग्रंथ सूचीइनमें उन मुद्दों, जिन पर इकाई में प्रकाश डाला गया है, की उनकी शैक्षिक समझ को विस्तार देने हेतु रचयिताओं द्वारा प्रयुक्त संदर्भ एवं अन्य अनुशंसित पठन दिए गए है।

संसाधन 5: बदलाव लाने की राह की चुनौतियां

अध्यापकों में बदलाव लाने पर विभिन्न परिप्रेक्ष्यों से बड़ी मात्रा में लिखित शोध कार्य मौजूद हैं (पियागेट, 1967; शलमैन, 1986; एथर्टन, 1999; एराउट, 2001, 2004, 2007; फुलान, 2008; एवं कई अन्य)। बदलाव पर विद्यालय नेतृत्व ओईआर, आपको बदलाव के कुछ सिद्धांतों से परिचित कराते हैं और आपको उसकी योजना कैसे बनाएं एवं पूर्ण कैसे करें इस बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

ये सभी सिद्धांत इस बात पर एकमत दिखाई पड़ते हैं कि अध्यापन में बदलाव को प्रभावी रूप देने का अर्थ है अध्यापकों से अपने सुविधा क्षेत्र (यानि जिसमें वे सहज महसूस करते हैं) की सीमाओं को विस्तार देने के लिए कहना। इस राह में उठने वाले प्रतिरोधों को पार करने के लिए अध्यापकों हेतु सहयोग आवश्यक होता है। व्यावसायिक विकास गतिविधियों के लियें प्रभावी योजना बनाने के लिए संभावित कठिनाईयों को हल करना जरूरी है। नीचे दी गई सूची में अध्यापकों द्वारा सूचित कुछ चुनौतियां बताई गई हैं और यह बताया गया है कि आप उन पर कौन सी संभावित प्रतिक्रिया दे सकते हैं।

संसाधन 6: अध्यापकों के लिए चिंतन सहायक

आपके पास कितना समय है इसके आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों में से कुछ प्रश्न चर्चा के लिए चुनें।

  • इस पाठ की योजना बनाते समय और तैयारी करते समय मेरे सामने कौन सी चुनौतियां थीं?
  • गतिविधि के प्रति छात्रों की कैसी प्रतिक्रिया रही?
  • मेरे विद्यार्थियों ने क्या सीखा और मुझे यह कैसे पता चलेगा?
  • क्या उन्होंने जो सीखा उसमें अंतर थे?
  • क्या पाठ के परिणाम हासिल हुए?
  • मैं किस बारे में प्रसन्न था/थी?
  • किस बात ने मुझे चकित किया?
  • अग़र किसी चीज ने निराश किया था तो वह क्या थी?

References

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Atherton, J. S. (1999) ‘Resistance to learning: a discussion based on participants in in-service professional training programmes, Journal of Vocational Education and Training, vol.51, no 1, pp. 77–90.
Clarke, D. (1994) ‘Ten key principles from research for the professional development of mathematics teachers’ in Aichele, D.B. and Coxford, A.F. (eds) Professional Development for Teachers of Mathematics: 1994 Yearbook. Reston, Virginia: The National Council of Teachers of Mathematics, Inc., pp. 37–48.
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Fullan, M. (2008) The Six Secrets of Change. San Francisco, CA: Jossey-Bass.
National Council of Educational Research and Training (2005) National Curriculum Framework(NCF). New Delhi: NCERT.
National Council of Educational Research and Training (2009) National Curriculum Framework for Teacher Education (NCFTE). New Delhi: NCERT.
Piaget, J. (1967) The Child's Conception of the World (translated by Tomlinson, J. and Tomlinson, A.). London : Routledge & Kegan Paul.
Shulman, L.S. (1986) ‘Those who understand: knowledge growth in teaching’, Educational Researcher, vol. 15, no. 2, pp. 4–14.
Szulanski, G. (2000) ‘The process of knowledge transfer: a diachronic analysis of stickiness’, Organizational Behavior and Human Decision Processes, vol. 82, no. 1, pp. 9–27.

Acknowledgements

अभिस्वीकृतियाँ

तृतीय पक्षों की सामग्रियों और नीचे अन्यथा कथित को छोड़कर, यह सामग्री क्रिएटिव कॉमन्स एट्रिब्यूशन-शेयरएलाइक लाइसेंस के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई है: (http://creativecommons.org/ licenses/ by-sa/ 3.0/). । नीचे दी गई सामग्री मालिकाना हक की है तथा इस परियोजना के लिए लाइसेंस के अंतर्गत ही उपयोग की गई है, तथा इसका Creative Commons लाइसेंस से कोई वास्ता नहीं है। इसका अर्थ यह है कि इस सामग्री का उपयोग अननुकूलित रूप से केवल TESS-India परियोजना के भीतर किया जा सकता है और किसी भी बाद के OER संस्करणों में नहीं। इसमें TESS-India, OU और UKAID लोगो का उपयोग भी शामिल है।

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चित्र 6:(Figure 6:) © फ्लिकर में फैब्रिके फ्लोरिन (अनुकूलित) के तहत उपलब्ध कराया गया: https://creativecommons.org/ licenses/ by-sa/ 2.0/ deed.en। (© Fabrice Florin in Flickr (adapted) made available under: https://creativecommons.org/ licenses/ by-sa/ 2.0/ deed.en.

चित्र 7: सौजन्य टाइड~ ग्लोबल लर्निंग, http://www.tidegloballearning.net/। (Figure 7: courtesy of Tide~ Global Learning, http://www.tidegloballearning.net/.)

कॉपीराइट के स्वामियों से संपर्क करने का हर प्रयास किया गया है। यदि किसी को अनजाने में अनदेखा कर दिया गया है, तो पहला अवसर मिलते ही प्रकाशकों को आवश्यक व्यवस्थाएं करने में हर्ष होगा।

वीडियो (वीडियो स्टिल्स सहित): भारत भर के उन अध्यापक शिक्षकों, मुख्याध्यापकों, अध्यापकों और छात्रों के प्रति आभार प्रकट किया जाता है जिन्होंने उत्पादनों में दि ओपन यूनिवर्सिटी के साथ काम किया है।