अनुपात की भावना के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल है - यह वृद्धि और कमी (या बढ़ाने और घटाने) के सभी कार्यों में मौजूद है। इसे छः लोगों की बजाय दस लोगों के लिए खाना बनाने हेतु सामग्रियों के बारे में सोचते समय घर में इस्तेमाल किया जाता है। इसे निर्माण योजनाओं के बारे सोचते समय शहरी नियोजन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसे कराधान के मुद्दों पर विचार करते समय नीति निर्माताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ तक कि इसे कई लोगों को कितनी मिठाइयाँ मिलेंगी या मित्रों के बीच कंचे कैसे बांटे जाएँ, आदि अनुमानपरक या उलझनपूर्ण सवालों को हल करने के लिए छोटे बच्चों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है।
इसलिए, विद्यार्थी कुछ सहज ज्ञान युक्त समझ और आनुपातिक तर्क के ज्ञान के साथ स्कूल आते हैं, लेकिन वे गलतफहमी और समझ के विभिन्न स्तरों के साथ भी आते हैं।
इस इकाई में मनोरंजक और रचनात्मक तरीके से व्युत्क्रम और सीधे अनुपात सहित आनुपातिक तर्क को सिखाने वाली विधियों को देखा जाएगा।
कुछ सुझावों कि संभाव्यता विचार अनुमत करने वाली गतिविधियों को किस प्रकार अभिकल्पित करें।
इस इकाई का संबंध NCF (2005) और NCFTE (2009) की दर्शाई गई शिक्षण आवश्यकताओं से है। संसाधन 1।
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विचार के लिए रुकें दैनिक जीवन में आनुपातिक तर्क की उपस्थिति के बारे में सोचना शुरू करने के लिए, आप पूरे दिन में आनुपातिक तर्क के उपयोग वाली सभी स्थितियों का एक नोट बनाएँ। उदाहरण के लिए: ‘मैंने कुछ चपातियाँ बनाईं – सामान्य की तुलना में लगभग आधा। इसके लिए मैंने सामान्य रूप से लिए जाने वाले आटे को आधा करने के लिए अपेक्षित राशि का समायोजन किया।’ आप अपने विद्यार्थियों से ऐसा ही करने और अगले पाठ में अपना उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए कह सकते हैं। |
आनुपातिक तर्क का मूल विचार है कि यह मात्रा की तुलना करने और इन मात्राओं के परस्पर संबंध को वर्णित करने के लिए गुणा और भाग का इस्तेमाल करता है। इस तरह एक पत्ती की चौड़ाई दूसरी पत्ती की तुलना में चार गुना तक बड़ी हो सकती है। एक चित्र की ऊँचाई दूसरे चित्र की एक तिहाई हो सकती है एक बच्चे की उम्र दूसरे बच्चे की उम्र की तुलना में डेढ़ गुनी हो सकती है आदि।
शोधकर्ताओं का निष्कर्ष है कि आनुपातिक तर्क के साथ सीखने में मुख्य समस्या यह है कि विद्यार्थियों की गुणा की समझ अक्सर पूर्णांकों के पुनरावर्ती जोड पर आधारित होती है जो आनुपातिक तर्क में संलग्नता हेतु सिखाते समय उन्हें सीमित बनाता है (वॉटसन एवं अन्य 2013)। विद्यार्थी जब तुलना करते हैं उदाहरण के लिए एक गुणन विधि में संबंध (अर्थात बच्चा A की तुलना में बच्चा B, 1.5 गुणा बड़ा है) को वर्णित करने की अपेक्षा उम्र में अंतर (चार वर्ष) का उपयोग कर आठ वर्ष की उम्र वाले बच्चे A की 12 वर्ष की उम्र वाले बच्चे B से तुलना करना उनके लिए आसान हो सकता है।
इस तरह शिक्षण की चुनौती है– विद्यार्थियों को गुणात्मक तर्क की ऐसी समझ प्रदान करना जो पुनरावर्ती जोड़ का इस्तेमाल नहीं करता।
सीखने में रचनात्मकता आंशिक रूप से विद्यार्थियों को अधिक सीखना मनोरंजनक बनाने और स्वयं से सोचने के लिए प्रेरित करती है। गणित में रचनात्मक चिंतन विद्यार्थियों को भविष्य की उनकी नौकरी के लिए भी महत्वपूर्ण ढंग से तैयार करता है। भविष्य में नौकरियाँ यंत्रवत रूप से चीज़ों को करने पर कम से कम निर्भर होंगी, क्योंकि इसे कंप्यूटर पर और समस्या समाधान के माध्यम से एवं रचनात्मक समाधानों द्वारा किया जा सकता है।
हमेशा यह देखना आसान नहीं हो सकता है कि स्कूली गणित एवं पाठ्यपुस्तक अभ्यास को किस तरह रचनात्मक शिक्षण दृष्टिकोणों में बदला जा सकता है।
इस इकाई का उद्देश्य रचनात्मक दृष्टिकोणों के लिए कुछ विचार प्रस्तुत करना है। यह ‘संभाव्यता चिंतन’ के रूप में रचनात्मकता के परिप्रेक्ष्य पर निर्मित होता है। जब आप और आपके विद्यार्थी संभावनाओं पर या ‘क्या होगा यदि’ जैसे परिदृश्यों पर सोच सकते हैं तो यह प्रक्रिया आपको आपके चिंतन में रचनात्मकता लाने के लिए प्रेरित करेगी (अरिस्टेडो, 2011)।
शोधकर्ताओं ने उन शिक्षण एवं अधिगम विशेषताओं की एक सूची पता लगाई है जो कक्षाकक्ष में संभाव्यता चिंतन को शामिल करती है (ग्रेंगर एवं अन्य, 2007; क्राफ्ट एवं अन्य, 2012)। इन विशेषताओं को गतिविधियों की अभिकल्पना के माध्यम से और खुले प्रश्न पूछकर प्रभावी ढंग से संबोधित किया जा सकता है और इनमें शामिल हैं:
इस इकाई में कार्य उन अधिगम गतिविधियों के विकास पर काम करते हैं जो इन विशेषताओं का इस्तेमाल करते हैं।
इस अंक में अपने विद्यार्थियों के साथ गतिविधियों के उपयोग का प्रयास करने से पहले अच्छा होगा कि आप सभी गतिविधियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से स्वयं करके देखें। यह और भी बेहतर होगा अगर आप अपने किसी सहकर्मी के साथ मिलकर इसे करने का प्रयास करें क्योंकि स्वयं के अनुभव के आधार पर सिखाना आसान होगा। स्वयं प्रयास करने से आपको शिक्षार्थी के उन अनुभवों के भीतर झांकने का मौका मिलेगा जो आपके शिक्षण और एक शिक्षक के रूप में आपके अनुभवों को प्रभावित कर सकते हैं। जब आप तैयार हों, तब गतिविधियों का अपने विद्यार्थियों के साथ उपयोग करें और फिर से इस बात पर विचार करें कि गतिविधि कैसी हुई और क्या सीख मिली। इससे आपको सीखने वाले विद्यार्थियों पर ध्यान केंद्रित रखने वाला अधिक शैक्षिक वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।
इस गतिविधि को आयोजित करने की योजना से पहले वाले दिन, अपने विद्यार्थियों से कहें कि वे अगले पाठ के लिए किसी भी लंबाई की एक पतली सूखी छड़ी लेकर आएँ जिसको आसानी से तोड़ा जा सकें।
अलग अलग लंबाई की छड़ियाँ होने पर यह गतिविधि बेहतर ढंग से काम करती है। यदि आपको लगता है कि अधिकांश विद्यार्थियों के पास लगभग समान लंबाई की छड़ियाँ हैं तो उनसे लंबाई कम करने के लिए अपनी अपनी छड़ियों का कुछ हिस्सा काटने को कहें। वे टुकड़े उन विद्यार्थियों को दिए जा सकते हैं जो छड़ी लेकर नहीं आए हैं।
पाठ के आरंभ में, प्रत्येक विद्यार्थी से अपने हाथ में ली हुई छड़ी को पकड़े रहने और अपना हाथ उठाने के लिए कहें। यदि कुछ विद्यार्थी छड़ी लाना भूल गए हैं तो अन्य विद्यार्थियों से कहें कि वे उदारता दिखाते हुए अपनी छड़ी का कुछ हिस्सा उन विद्यार्थियों से बांटे ।

विद्यार्थियों को जोड़े या छोटे समूह में व्यवस्थित करें।
विद्यार्थियों से निम्न प्रश्नों के उत्तर अपने समूहों या जोड़ों में देने के लिए कहें:
गुणन के भौतिक प्रभावों का पता लगाने में विद्यार्थियों को मार्गदर्शित करते हुए, अब चर्चा शुरू करने के लिए कुछ समूहों को अपने निष्कर्ष कक्षा के समक्ष प्रस्तुत करने दें।
यह एक अध्यापिका की कहानी है जिसने अपने प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों के साथ गतिविधि 1 का प्रयास किया।
विद्यार्थियों को पतली छड़ियाँ लेकर आने का विचार पसंद आया और उनमें से अधिकांश लेकर भी आए, लेकिन जैसा कि होता है उनमें से कुछ फिर भी छड़ी लाना भूल गए। उन्हें छड़ी न लाना बुरा लगा किंतु उन्होंने अपने सहपाठियों से छड़ियाँ प्राप्त कर सकने के सुझाव का स्वागत किया। मैंने विद्यार्थियों को चार के समूहों में रखा। मैं प्रत्येक समूह में दो विद्यार्थियों को मुड़ने और दो अन्य के सम्मुख अपना चेहरा करने के द्वारा इसे आसानी से व्यवस्थित कर सकती थी।
एक बार सबके पास छड़ी हो जाने और अपने समूह में बैठ जाने पर, उन्होंने गतिविधि में सुझाए गए दोनों तरीकों से तुलना किया। मैंने उन्हें अपने अवलोकनों का नोट बनाने के लिए भी कहा ताकि वे बाद में होने वाली चर्चा में अपना योगदान दे सकें।
कुछ को समस्या थी, उनका कहना था कि वे आसानी से अंतर बता सकते हैं लेकिन उतनी आसानी से गुणन के बारे में नहीं बता सकते। लेकिन सभी ने कोशिश की और कुल मिलाकर चर्चा दिलचस्प रही। उनमें से कुछ बेहद शांत थे और उन्हें अपना निष्कर्ष बताने के लिए राजी करना था। उनमें से अधिकांश सामान्यतः इस बात को लेकर चिंतित थे कि उन्होंने जो कहा शायद वो निरर्थक हो और बाकी विद्यार्थी कहीं उन पर हंसने न लगें। इसलिए, मैंने उन्हें इस बात के लिए राजी किया कि गलत उत्तर या निष्कर्ष देने में भी कोई समस्या नहीं क्योंकि कोई भी हर चीज़ में विशेषज्ञ नहीं होता है और गलतियाँ करने से उन्हें अपने अधिगम में मदद ही मिलेगी। मुझे यह महसूस नहीं हुआ कि विद्यार्थियों के लिए उत्तर देने में आश्वस्त महसूस करना और जोखिम उठाना कितना कठिन है क्योंकि हो सकता है उनके उत्तर गलत साबित हो जाएँ।
एक विद्यार्थी मोना ने टिप्पणी की कि वे आकलन कर रहे थे। उनके पास इस्तेमाल के लिए कोई मानकीकृत मापन उपकरण यथा- रूलर या टेप नहीं था जिसका अर्थ था कि माप किसी भी तरीके से सटीक नहीं थे, इसलिए वे बस अनुमान लगा रहे थे। ऐसा महसूस हुआ कि विद्यार्थी अपनी कल्पना का इस्तेमाल करने को लेकर अधिक इच्छुक और आश्वस्त थे और अपने विचार और उत्तर देने के लिए तत्पर थे। इन बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर किया कि यदि मैं अपने विद्यार्थियों को गणित के उनके अधिगम में अधिक जोखिम उठाने के लिए प्रवृत्त करना चाहती हूं तो मुझे उन्हें ऐसी और भी गतिविधियाँ देनी चाहिए जहाँ कोई गलत उत्तर न हो, बल्कि कई सारे सही उत्तर हों।
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विचार के लिए रुकें श्रीमती कपूर ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने विद्यार्थियों को राजी करने के लिए कड़ी मेहनत की कि कोई भी उत्तर न देने से एक गलत उत्तर देना ज्यादा अच्छा है, क्योंकि गलतियाँ करने से उन्हें अपने अधिगम में मदद मिलेगी। इस दृष्टिकोण के बारे में आप कैसा अनुभव करते हैं? श्रीमती कपूर को अपनी कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करने के लिए कौन सी दीर्घकालीन रणनीतियाँ अपनानी चाहिए जिसमें सभी विद्यार्थी अपने अधिगम में मदद के लिए जोखिम उठाने में सहजता महसूस कर सकें? |
अपनी कक्षा के साथ ऐसा कोई अभ्यास करने पर बाद यह सोचें कि क्या ठीक रहा और कहाँ गड़बड़ी हुई। ऐसे प्रश्न सोचें जिनसे विद्यार्थियों में रुचि पैदा हो तथा उनके बारे में उन्हें समझाएँ ताकि वे उन्हें हल करके आगे बढ़ सकें। ऐसे चिंतन से वह ‘स्क्रिप्ट’ मिल जाती है, जिसकी मदद से आप विद्यार्थियों के मन में गणित के प्रति रुचि जगा सकते हैं और उसे मनोरंजक बना सकते हैं। अगर विद्यार्थियों को समझ नहीं आ रहा है और वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो इसका मतलब है कि उनकी इसमें सम्मिलित होने की रुचि नहीं है। जब भी आप गतिविधियां करवाएं तो इस विचारात्मक अभ्यास का उपयोग करें, यह ध्यान रखें कि श्रीमती कपूर ने कुछ छोटे परिवर्तन किए जो काफी महत्वपूर्ण रहे।
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विचार के लिए रुकें ऐसे चिंतन को गति देने वाले अच्छे प्रश्न निम्नलिखित हैं:
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रचनात्मकता के समर्थन में मनोरंजक तरीकों को महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि खेल-खेल में आप सहज ढंग से कई संभावित समाधानों को तलाश लेते हैं। मनोरंजक शब्द अक्सर छोटे बच्चों से संबद्ध होता है लेकिन यह उन्हीं तक सीमित नहीं होना चाहिए। खेल का दायरा अन्वेषण और प्रयोग तक फैला हुआ है जिसे कोई भी व्यक्ति किसी भी उम्र में कर सकता है और उसे करना भी चाहिए। बच्चों के खेल देखते भर रहना बच्चों की रचनात्मकता का एक अच्छा रिमाइंडर है।
अन्वेषण और प्रयोग की प्रक्रिया में, यह महत्वपूर्ण है कि विद्यार्थियों के पास विकल्प मौजूद हो – यानी अलग अलग तरीकों से किसी समस्या को देखने का विकल्प, गलतियाँ करने का विकल्प, अपने स्वयं के अनुमान लगाने का विकल्प और यह जांचने का विकल्प कि वे सही हैं या नहीं। गणितीय पाठों में मनोरंजक चिंतन विधि अपनाने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए, यह आसान और मजेदार उदाहरणों का इस्तेमाल करने में मदद करता है।
अगली गतिविधि विद्यार्थियों के समक्ष एक अत्यधिक बड़े जूते का चित्र प्रस्तुत करती है और उन्हें यह कल्पना करने के लिए कहती है कि यह जूता उन्हें फ़िट आने के लिए कितना बड़ा होना चाहिए। संभावनाओं की तलाश द्वारा, गणित के सवालों के लिए उन्हें अपना विकल्प प्रस्तुत करने की अनुमति देने और इस दौरान उत्तर गलत होने पर भी परेशान न होने के लिए कहने से, विद्यार्थी अपने आनुपातिक तर्क कौशलों को विकसित कर सकेंगे।
यह कार्य जोड़ों में काम करने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त है। हालांकि, सुनिश्चित करें कि उनके पास जोड़ करने के माध्यम से काम करने और स्वयं द्वारा विचार करने का अवसर उपलब्ध है। आप इस गतिविधि के लिए उन्हें तैयार करने में मदद के लिए प्रमुख संसाधन सभी को शामिल करना’ पर नज़र डाल सकते हैं।
अपने विद्यार्थियों से कहें कि चित्र 2 दुनिया में जूतों की सबसे बड़ी जोड़ी को दर्शाता है। यह जूता 5.29 मीटर (17.4 फुट) लंबा और 2.37 मीटर (7 फुट 9 इंच) चौड़ा है। ऐसा माना जाता है कि यह 753 साइज़ वाले फ़्रांसीसी जूतों के बराबर है। 34 साइज़ के फ़्रांसीसी जूते 6 साइज़ के भारतीय जूतों के बराबर होते हैं।
यदि आपके विद्यार्थी इंटरनेट का उपयोग करते हैं, तो वे जूते की इस जोड़ी के बारे में और अधिक तस्वीरें और जानकारी खोजने के लिए किसी सर्च इंजन का उपयोग कर सकते हैं। यह आगे और भी उनकी उत्सुकता जगाने वाला सकता है! यदि आप प्रिंटर का उपयोग करते हैं, तो आप कक्षा के साथ बांटनेके लिए कुछ बड़ी तस्वीरों का प्रिंट ले सकते हैं या गतिविधि के बाद विद्यार्थियों के कार्यों का एक रोमांचक दीवार प्रदर्शन बनाने में मदद कर सकते हैं।

यदि यह आपका जूता होता तो आप कितने लंबे होते? अपने विद्यार्थियों से बताने के लिए कहें कि वे इस समस्या को कैसे हल करेंगे। कुछ मिनट के बाद, पूरी कक्षा को विचार के बारे में बताएं और बताएँ कि कौन से विचार को आगे वर्णित किया जाना चाहिए।
क्या आपके सभी विद्यार्थियों ने भाग लिया? यदि नहीं तो आप अगली बार अधिक सहभागिता के लिए उन्हें कैसे प्रोत्साहित कर सकते हैं?
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वीडियो: सभी को शामिल करना |
मैंने इस गतिविधि को अपनी आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के साथ किया। मैंने सोचा कि पूरी कक्षा के साथ एक खुली चर्चा आरंभ करना अच्छा रहेगा, अतः मैंने उन्हें तस्वीरें दिखाने और पूरी कक्षा में पास करने का निश्चय किया ताकि सभी विद्यार्थी नजदीक से उसे देख सकें। जब सबने जूते को देखा तो हंसने लगे और मैंने महसूस किया कि वे इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि उनकी गणित की कक्षा में जूते का क्या काम!
मैंने ब्लैकबोर्ड पर जूते की माप लिखा और उनसे यह प्रश्न पूछा: यदि यह आपका जूता होता तो आपकी ऊँचाई क्या होती?’ फिर, रानू अपनी भीतरी भावना के वशीभूत होकर चिल्लाया (मेरी कक्षा के दौरान चिल्लाने की आम तौर पर अनुमति नहीं है लेकिन मैंने इस बार उसे यूं ही छोड़ दिया): इस धरती पर कोई भी व्यक्ति यह कैसे जान पाएगा कि उसकी ऊँचाई क्या होगी?’ मनीषा ने अपना हाथ उठाया और फिर कहा कि वह अपने जूते की साइज़ और ऊँचाई की तुलना करने की कोशिश कर सकती है।
भरत ने सोचा कि यह हमेशा सही हो सकता है क्योंकि उसका कहना था कि कभी कभी समान ऊँचाई के लोगों के जूते की साइज़ अलग अलग होती है।
तो उसने प्रत्येक विद्यार्थी से यह पूछना चाहा कि उनके जूते की साइज़ और उनकी ऊँचाई क्या है। मुझे लगा कि यह एक अच्छा विचार है लेकिन फिर यह सोचा कि मेरी कक्षा के 86 विद्यार्थियों द्वारा अपनी ऊँचाई और पैर की लंबाई को मापना और फिर पूरी कक्षा से वह डेटा साझा करने में काफी उथल-पुथल होगी।
मैंने अपनी यह आशंका विद्यार्थियों से बताई, तब उन्होंने यह सुझाव प्रकट किया कि लंच टाइम में वे छड़ी और रूलर की मदद से अपनी माप निकाल कर रखेंगे और उसे ब्लैकबोर्ड पर लिख देंगे। दो विद्यार्थियों ने स्वैच्छिक रूप से इस घटना का अच्छे तरीके से निरीक्षण किया।
हमने लंच के बाद इस गतिविधि को करना जारी रखा। मैंने पहले उनसे चार के समूह में काम करने के लिए कहा ताकि यह ज्ञात हो सके कि समान फुट लंबाई से ऊँचाई हमेशा मेल खा रही है या नहीं। फिर, व्यक्तिगत रूप से उनकी ऊँचाई और पैर की लंबाई के बीच के आनुपातिक संबंध पर काम हुआ और उनसे यह भी कहा गया कि वे एक दूसरे को देखें कि उनकी गणनाएँ सही से हो रही हैं या नहीं। इस तरीके से वे अनुपातों के साथ काम करने में पर्याप्त अनुभव हासिल करेंगे और वे अलग अलग तरीकों से काम करने के बारे में भी जानेंगे।
फिर, मैंने पूरी कक्षा से बड़े जूते के बारे में पूछा और प्रश्न किया कि यदि यह आपका जूता होता तो आपकी ऊँचाई क्या होती?’ इसके लिए कई सुझाव आए जैसे कि:
बड़े जूते से अपने जूते की साइज़ की तुलना करना और फिर अपनी ऊँचाई को गुणा करने के लिए उस अनुपात का इस्तेमाल करना
मैंने उनसे कहा कि वे किसी भी सुझाई गई विधि का इस्तेमाल कर सकते हैं और यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अलग अलग विधियों के अलग अलग परिणाम हैं – ऐसी स्थिति में मैंने उन्हें यह सोचने के लिए कहा कि ऐसा कैसे हुआ और उनसे अपने समूह में एक दूसरे के साथ चर्चा करने के लिए कहा। इसके बारे में कई सारे विद्यार्थियों ने अंत में नहीं सोचा, लेकिन तब भी मैं प्रश्न पूछकर खुश थी क्योंकि इससे उनके मस्तिष्क में सोचने के लिए अवश्य ही छोटी सी भी प्रेरणा मिली होगी। हमने जिंदगी की उन विभिन्न चीज़ों पर चर्चा के साथ पाठ का समापन किया जिन्हें आप प्रकृति में देख सकते हैं और जो अनुपात वाली हैं और जो अनुपात में नहीं हैं।
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विचार के लिए रुकें
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गतिविधि 2 में विद्यार्थियों को खेलने के लिए, जूते की साइज़ और पैर की लंबाई और विद्यार्थियों की लंबाई के बीच के आनुपातिक संबंध का पता लगाने और जाँच-पड़ताल करने के लिए प्रेरित करने वाले यदि ऐसा है…’ से शुरू होने वाले प्रश्नों का इस्तेमाल किया गया।
इसे कैसे करें का विकल्प होने के साथ - अपने आप से विधि का इस्तेमाल कर और गलतियाँ कर - बड़े जूते के मज़ेदार उदाहरण ने विद्यार्थियों में उत्साह पैदा किया और उन्हें इस कार्य के साथ संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित किया।
मनोरंजक विधियों में स्थितियों में बदलाव के बारे में विचार करना शामिल है - इसे कभी कभार क्या होता है यदि …?’ चिंतन से संदर्भित किया जाता है। यह गणित में चरों के बारे में विचार करने के साथ बेहतरीन ढंग से काम करता है: क्या होगा यदि मैं इस चर को बदल दूँ? तो फिर अन्य चरों का क्या होगा?’ संभावनाओं की इस चिंतन प्रक्रिया में, चरों एवं अचरों की भूमिका और उनके बीच के आनुपातिक संबंध का भी पता लगाया जा सकता है।
अगली गतिविधि विद्यार्थियों से क्या होगा यदि मैं … को बदल दूँ?’ के बारे में विचार करने के लिए कहती है। उनके अंदर स्वामित्व की भावना में वृद्धि हो सकती है और वे अपने अनुमानपरक निष्कर्षों के आधार पर अपनी चिंतन शक्तियों के लिए स्वयं को महत्वपूर्ण महसूस करेंगे। स्वामित्व की भावना में आगे वृद्धि के लिए, विद्यार्थियों से उन्हें अपनी खुद की मिठाई की दुकान खोलने के भाग के रूप में गणितीय क्रियाओं की कल्पना के लिए कहा जाता है।
अपनी कक्षा को निम्न परिदृश्य से परिचित कराएँ।
संत मिष्ठान्न भंडार गुलाब जामुन बनाता है जो 1.5 इंच के व्यास में गोलाकार होता हैं। प्रत्येक गुलाब जामुन की कीमत रू 12 है। हर 1 किग्रा के बॉक्स में, संत मिष्ठान्न भंडार 24 गुलाब जामुन पैक कर सकता है।
क्या आपको लगाता है कि भारत में सभी मिष्ठान्न भंडार अपना गुलाब जामुन रू. 12 में बेचते हैं?
अब, कल्पना करें कि आप एक मिष्ठान्न भंडार खोल रहे हैं और आप गुलाब जामुन बेचने के बारे में सोच रहे हैं (चित्र 3), लेकिन आप अपना गुलाब जामुन संत मिष्ठान्न भंडार से थोड़ा अलग आकार का बनाना चाहते हैं।
कारोबार में, इस बात को हमेशा ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है कि यदि आप कुछ बदलते हैं तो क्या होगा। अब तक की आपकी प्रतिक्रिया के आधार पर, नीचे सारणी 1 की कॉपी भरें। सारणी में, जोड़ (+) कीमत में वृद्ध को इंगित करता है और घटाव (–) कीमत में कमी को इंगित करता है। प्रत्येक पंक्ति के लिए, आपको एक चर दिया गया है। आपको दो अन्य चर पता लगाने हैं।

गतिविधि का यह भाग एक वार्तालाप गतिविधि में विकसित किए जाने के लिए उपयुक्त है। उदाहरण के लिए, आप अपनी कक्षा को समूहों में व्यवस्थित करना चाह सकते हैं, जिसमें प्रत्येक समूह अपनी मिठाई की दुकान के लिए एक नाम तय करता है और समूह सदस्यों को भूमिकाएँ निर्दिष्ट करता है। यदि आप इस दृष्टिकोण का इस्तेमाल करना तय करते हैं तो प्रमुख संसाधन ‘कहानी कहना, गाना, रोल प्ले और नाटक’ से आपको मदद मिलेगी।
| गुलाब जामुन का आकार | गुलाब जामुन की कीमत | 1 किग्रा के बॉक्स में गुलाब जामुनों की संख्या |
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नीचे केस स्टडी 3 में, श्रीमती कपूर प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष और कोई अनुपात नहीं के वर्णन के साथ उनके उदाहरण देकर इस गतिविधि को समाप्त करती हैं। आप अपने पाठ को कैसे समाप्त करेंगे और शिक्षण का सारांश प्रस्तुत करेंगे?
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वीडियो: कहानी सुनाना, गीत, रोल–प्ले और नाटक |
मुझे लगता है कि इस गतिविधि ने समूह में अच्छा काम किया हो सकता है, जिससे प्रत्येक विद्यार्थी की बेहतर भागीदारी हो सके। उन्होंने गतिविधि के अलग अलग भागों में चर्चा करने में अच्छा समय व्यतीत किया। मैंने प्रत्येक समूह से अपनी चर्चाओं का एक लिखित नोट बनाकर भी रखने को कहा। शोर अपनी चरम स्थिति में था लेकिन बातचीत मुख्यतः गणितीय शब्दावलियों के उपयोग पर थे, जैसे कि: ‘यदि कीमत में सामग्री की लागत शामिल होगी, तो निस्संदेह मैं कीमत बढ़ाउंगा यदि इसकी त्रिज्या बढ़ती है’; ‘देखें यदि बॉक्स समान साइज़ का है। हम उस बॉक्स में अधिक कैसे रख सकते हैं?’ निश्चय ही संख्या भी कम होगी।’
सारणी में उनके द्वारा भरे जाने पर, मैंने सबसे आश्वस्त समूह से ब्लैकबोर्ड पर अपनी सारणी लिखने को कहा और फिर मैंने दूसरों से पूछा कि वे इससे सहमत हैं या नहीं; यदि नहीं, तो मैंने उनसे उस कथन पर अपनी राय देने के लिए कहा। मैंने इसे बेहद अच्छी तरह संपन्न किया और शीघ्र ही मैंने यह देखा कि विद्यार्थी यह कहने में आश्वस्त थे कि क्यों उन्होंने मात्राओं में प्रत्यक्षतः बदलाव महसूस किया और क्यों उन्होंने व्युत्क्रम ढंग से बदलाव महसूस किया। सर्वाधिक महत्वपूर्ण रूप से, वे यह बताने में सक्षम थे कि प्रत्यक्ष या व्युत्क्रम भिन्नता से वे क्या समझते हैं। मैंने गृहकार्य के रूप में गतिविधि का अगला भाग उन्हें दिया ताकि वे अगले दिन चर्चा कर सकें।
अगले दिन, मैंने ब्लैकबोर्ड पर प्रत्यक्ष, व्युत्क्रम और गैर-आनुपातिक भिन्नता के वर्णन लिखे और विद्यार्थियों से अपने सहपाठियों के साथ ‘उनकी’ दुकान में उपलब्ध वस्तुओं की मात्राओं की उन जोड़ियों पर अपने विचार रखने के लिए कहा जिन्हें वे एक दूसरे से संबंधित मानते हैं। मैंने उनसे इस बारे में विचार करने के लिए कहा: (a) क्या कोई संबंध था; और (b) किस तरह का यह संबंध था: प्रत्यक्ष, व्युत्क्रम या कोई नहीं। एक समग्र कक्षा चर्चा में, फिर मैंने सबसे उन मात्राओं के उदाहरण पूछे जो प्रत्यक्ष अनुपात वाले थे, फिर प्रतिवर्ती अनुपात के उदाहरण पूछे, उसके बाद उन उदाहरणों के बारे में पूछा जहाँ कोई आनुपातिक संबंध नहीं था। कई सारे उदाहरण सामने आए और यद्यपि कई के वर्णन बार बार के दोहराव वाले थे, तथापि मुझे यकीन है कि पाठ की समाप्ति पर विद्यार्थी अंतर जानने में सक्षम हो चुके थे!
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विचार के लिए रुकें
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उन संभाव्यता चिंतन की विशेषताओं के बारे में पुनः विचार करें जिन्हें गतिविधियों की अभिकल्पना और खुले सवाल पूछने के माध्यम से कारगर ढंग से संबोधित किया जा सकता है। वे यहाँ सूचीबद्ध हैं:
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विचार के लिए रुकें
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इस इकाई के अध्ययन में, आपने यह सोचा कि रचनात्मक संभाव्यता चिंतन को प्रेरित करने के लिए गतिविधियों के उपयोग द्वारा आनुपातिक तर्क को विकसित करने के लिए आपने अपने विद्यार्थियों को कैसे सक्षम बनाया।
संभाव्यता चिंतन विद्यार्थियों से रचनात्मक होने, कोशिश करने और अपना निर्णय खुद लेने और इसके चलते गलतियाँ करने के लिए कहता है। शिक्षक कभी कभार सोचते हैं कि अपने विद्यार्थियों को गलतियाँ करने से रोकना उनका कर्तव्य है; यह इकाई बताती है कि शिक्षकों का दायित्व विद्यार्थियों को गलतियाँ करने देना और उनसे सीखने देना है। विद्यार्थियों से ‘विचारों के साथ खेलने’ के लिए कहने का अर्थ है कि वे अपने रचनात्मक पक्ष को उभारें, कई सारे विचारों को आज़माएँ और विचारों को वास्तव में जानने और समझने के साथ समाप्त करें।
आपके विद्यार्थियों को रचनात्मक और मनोरंजक होने और अपने से विकल्प चुनने के लिए कहने का यह भी अर्थ है कि जब उनसे किसी अपरिचित प्रसंग में किसी चीज़ के बारे में पूछा जाए जो वे बेहतर ढंग से उसका जवाब देने में समर्थ हों, जैसा कि अक्सर परीक्षाओं में होता है। वे जानते हैं कि यदि वे किसी विचार का मनन करते हैं और उन्हें प्रयोग रूप में आज़माते हैं, तो वे वैसी समस्याओं को हल कर सकते हैं जो शुरू में कठिन दिखती है, जैसा कि उन्होंने पहले किया हुआ होता है।
विचार के लिए रुकें
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यह इकाई एनसीएफ (2005) और एनसीएफटीई (2009) की निम्नलिखित शिक्षण आवश्यकताओं के साथ संबंध स्थापित करती है तथा उन आवश्यकताओं को पूरा करने में आपकी मदद करेगी:
तृतीय पक्षों की सामग्रियों और अन्यथा कथित को छोड़कर, यह सामग्री क्रिएटिव कॉमन्स एट्रिब्यूशन-शेयरएलाइक लाइसेंस के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई है( http://creativecommons.org/ licenses/ by-sa/ 3.0/ ). । नीचे दी गई सामग्री मालिकाना हक की है तथा लाइसेंस के अंतर्गत ही इस प्रोजेक्ट में उपयोग की गई है, तथा इसका Creative Commons Licence से कोई वास्ता नहीं है। इसका अर्थ यह है कि यह सामग्री अपरिवर्तित रूप से केवल TESS-India प्रोजेक्ट में ही उपयोग की जा सकती है और यह किसी अनुवर्ती OER संस्करणों में उपयोग नहीं की जा सकती। इसमें TESS-India, OU और UKAID लोगो का उपयोग भी शामिल है।
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चित्र 2: © रैमोन एफ़. वेलास्क्वीज http://commons.wikimedia.org/ wiki/ File:MarikinaRiverBankShoesjf9425_34.JPG के तहत http://creativecommons.org/ licenses/ by-sa/ 3.0/ deed.en उपलब्ध कराया गया .
चित्र 3 : : http://commons.wikimedia.org/ wiki/ File:Gulab_Jamun.jpg ,के तहत http://creativecommons.org/ licenses/ by-sa/ 3.0/ deed.en उपलब्ध कराया गया .
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वीडियो (वीडियो स्टिल्स सहित): भारत भर के उन अध्यापक शिक्षकों, मुख्याध्यापकों, अध्यापकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार प्रकट किया जाता है जिन्होंने उत्पादनों में दि ओपन यूनिवर्सिटी के साथ काम किया है।