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धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं को पढ़ाने के लिए संख्या रेखा और 'कल्पना करना यदि' ...की अभिव्यक्ति का उपयोग करना।

यह इकाई किस बारे में है

इस इकाई में आप वे उपाय देखेंगे जिनके तहत आप विद्यार्थियों को संख्याओं का अर्थ और यह जानने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं कि ‘ऋणात्मक संख्याओं’ की अवधारणा क्यों विकसित की गई थी।

विद्यार्थी सबसे पहले ऋण चिह्न को तब देखते हैं जब उसका उपयोग अंकों को घटाने के लिए किया जाता है; इसलिए, ऋणात्मक संख्याओं में उसके उपयोग का ध्यान पूर्वक परिचय कराना होगा। यह समझाने से कि यह चिह्न अलग तरीके से इस्तेमाल किया जाता है और यह पता लगाने से कि ऋणात्मक संख्याओं के लिए इसका उपयोग क्यों किया जाता है, आपके विद्यार्थियों को इस चिह्न के उपयोग की समानताएं और अंतरों को समझने और पहचानने में मदद मिलेगी।

इस इकाई की गतिविधियों के माध्यम से आप एक संख्या रेखा के उपयोग को विकसित करने के बारे में भी सोचेंगे ताकि आपके विद्यार्थी धनात्मक और ऋणात्मक अंकों के द्वारा दर्शाए गए परिवर्तनों को समझ सकें। दरअसल उन परिवर्तनों को खुद करने से विद्यार्थियों को यह भी समझने में आगे मदद मिलेगी कि ‘धनात्मक’ और ‘ऋणात्मक’ का अर्थ क्या होता है। गणित पढ़ाते समय कल्पना को पंख देने के लिए ‘कल्पना करें यदि …’ कहने का महत्व भी समझाया गया है।

आप इस इकाई में क्या सीख सकते हैं

  • धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं के बीच अंतर को समझने में आपके विद्यार्थियों की मदद करने के लिए कुछ विचार।
  • गणित सीखने के लिए आपके विद्यार्थियों की कल्पना को प्रोत्साहित करने के लिए ‘कल्पना करें यदि …’ कथन की भूमिका।
  • धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं को समझने के लिए संख्या रेखा का उपयोग कैसे करें।

इस इकाई का संबंध NCF (2005) और NCFTE (2009) की दर्शाई गई शिक्षण आवश्यकताओं से है। संसाधन 1

1 संख्याओं का अर्थ

संख्याओं का आविष्कार संभवतः जानवरों या अन्य वस्तुओं को गिनने के उद्देश्य से किया गया था। संख्या प्रणाली में मूल रूप से केवल ‘एक’, ‘दो’ और ‘कई’ के लिए शब्द होते थे क्योंकि बस इसी की ज़रूरत होती थी। आगे विकास होने पर मवेशियों को गिनने की ज़रूरत पड़ी, और आज की प्रचलित संख्या प्रणाली विकसित की गई, जिसमें शून्य और ऋणात्मक संख्याएं शामिल हैं। संख्याओं के नाम लगभग हमेशा एक तार्किक प्रणाली का उपयोग करके निर्मित किए जाते हैं ताकि वे ऐसी संख्याओं को व्यक्त कर सकें जो सभी आशयों और उद्देश्यों के लिए, अनंत हों।

संख्याएं निम्नलिखित का प्रतिनिधित्व करने के लिए उपयोग की जाती हैं:

  • मात्रा या परिमाण, जैसे ‘कितने?’ या ‘कितनी दूर?’ आदि प्रश्नों का उत्तर देने के लिए
  • संख्याओं के बीच संबंध दर्शाने के लिए, ‘और कितने अधिक?’ या, ‘और कितने कम?’ जैसे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए
  • मात्रा या परिमाण के संदर्भ में रूपांतरण, ‘मान लीजिए ज़ूरी पर मैरी के तीन रुपए उधार हैं। उसमें से उसने मैरी को एक रुपया दे दिया। तो अब उसका कितना उधार बाकी है?’, या ‘मनु ने पहले मैच में तीन गोटियां जीतीं और दूसरे मैच में पांच गोटियां हारीं। उसने कुल कितनी गोटियां हारीं?’ जैसे प्रश्नों का उत्तर देने के लिए

विचार के लिए रुकें

विचार करें कि ऋणात्मक नंबर आपके विद्यार्थियों के समक्ष कैसे और कहां आए होंगे। उदाहरण के लिए, उनके मन में यह विचार आया होगा कि आइसक्रीम फ़्रीज़र में तापमान शून्य से कम होता है। ऐसे विचार उनके समक्ष और कहां आए होंगे?

शून्य एक संख्या है

संख्याओं को समझने में शून्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गणितीय रूप से, शून्य को कई उपयोग और अर्थ दिए गए हैं जिनके साथ विद्यार्थियों को कार्य करना पड़ता है। एक अर्थ में, मात्रा ‘कुछ नहीं’ दर्शाई जाती है। इसका अर्थ ‘कोई नहीं’ हो सकता है, जैसे ‘एक फ़ुटबॉल मैच में एक टीम ने कोई गोल नहीं किया’, या इसका मतलब किसी संख्या जैसे 600 में ‘कोई इकाई या दहाई नहीं’ हो सकता है।

शून्य का उपयोग एक एकपक्षीय संदर्भ बिंदु या मूल के एक निर्देशांक के रूप में भी किया जाता है, उदाहरण के लिए (0, 0)। इस बिंदु से कम से कम दो परस्पर विपरीत दिशाओं पर विचार किया जा सकता है। ऋणात्मक संख्याएं सिखाते समय यह समझना महत्वपूर्ण है कि शून्य के ये सारे अलग अलग अर्थ हैं।

ऋणात्मक संख्याएं

जब किसी संख्या के आगे एक ऋणात्मक या ऋण चिह्न लगाया जाता है, तो वह शून्य के सापेक्ष उस संख्या की ऋणात्मकता दर्शाता है। प्राकृतिक संख्याओं को धनात्मक संख्या माना जाता है।

धनात्मक और ऋणात्मक दोनों संख्याओं के परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। ऋणात्मक संख्याएं परिमाण और क्रम के बीच ग़लतफहमी उत्पन्न कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, –4 पारंपरिक रूप से –1 से कम होता है, इसके बावजूद कि –4 का परिमाण –1 से अधिक दिखाई देता है।

विचार के लिए रुकें

उस समय की सोचें जब आप ऋणात्मक संख्याएं सीख रहे थे। क्या वह उस समय एकदम सीधा प्रतीत हुआ था?

यह बताने का प्रयास करें कि ऋणात्मक संख्याएं आपको सीधी क्यों प्रतीत हुईं (यदि हुईं तो)। क्या शायद ऐसा इसलिए था क्योंकि ऋणात्मक संख्याएं प्राकृतिक संख्याओं के बारे में आपके विचार के साथ एकदम उपयुक्त थीं और उसने उस सोच को संतोषजनक रूप से आगे बढ़ाया? यह याद करने का प्रयास करें कि आप ऋणात्मक संख्याओं पर गणितीय विधियों को करना कैसे समझ सके - क्या आपने पहले उन नियमों को याद कर लिया था?

अपनी कक्षा के कुछ विद्यार्थियों के बारे में सोचें और प्राकृतिक संख्याओं के साथ उन्हें आने वाली समस्याओं के बारे में सोचें। उन विद्यार्थियों के बारे में सोचें जिन्हें आपने पढ़ाया है, कि कैसे वो ‘दो ऋण मिल कर एक धन बनाते हैं’ नियम को लागू करने के बारे में दुविधा में पड़ सकते हैं। कैसे आपके विद्यार्थियों को केवल नियमों को याद करने पर निर्भर रहने के बजाय उन्हें ऋणात्मक संख्याओं को समझने में मदद की जा सकती है?

2 ऋणात्मक संख्याओं की आवश्यकता

इस इकाई की गतिविधियों के माध्यम से आप इस बारे में अपने विद्यार्थियों की समझ को विकसित कर सकेंगे कि ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग क्यों किया जाता है और ये कितनी उपयोगी हो सकती हैं। इसमें आपको युक्तियां भी बताई जाएंगी कि आपके विद्यार्थियों को यह समझने में कैसे मदद की जाए कि केवल नियमों को याद करने के बजाय ऋणात्मक संख्याओं के साथ कैसे काम किया जाए। पहली गतिविधि इस तरह डिज़ाइन की गई है कि विद्यार्थियों को संख्या प्रणाली के एक हिस्से के रूप में ऋणात्मक संख्याओं की ज़रूरत को समझने में मदद मिले।

इस अंक में अपने विद्यार्थियों के साथ गतिविधियों के उपयोग का प्रयास करने से पहले अच्छा होगा कि आप सभी गतिविधियों को पूरी तरह या आंशिक रूप से स्वयं करके देखें। यह और भी बेहतर होगा यदि आप इसका प्रयास अपने किसी सहकर्मी के साथ करें क्योंकि जब आप अनुभव पर विचार करेंगे तो आपको मदद मिलेगी। स्वयं प्रयास करने से आपको शिक्षार्थी के अनुभवों के भीतर झांकने का मौका मिलेगा जिसके फलस्वरूप यह आपके शिक्षण और एक शिक्षक के रूप में आपके अनुभवों को प्रभावित करेगा।

गतिविधि 1: ऋणात्मक संख्याओं की आवश्यकता को समझना

तैयारी

इस गतिविधि में संख्या प्रणाली के एक हिस्से के रूप में ऋणात्मक संख्याओं की ज़रूरत को समझने में विद्यार्थियों की मदद के लिए तीन अलग अलग उपाय सुझाए गए हैं। इन सभी उपायों का उपयोग करने से, आवश्यक नहीं कि एक ही अध्याय में, विद्यार्थियों को ऋणात्मक संख्याओं के बारे में सोचने का एक व्यापक क्षेत्र प्राप्त होगा।

‘धनात्मक’ और ‘ऋणात्मक’ को दर्शाने के लिए पर्वतों और गहरे समुद्र के चित्र लाकर दिखाएं ताकि ‘ऊपर’ और ‘नीचे’ और साथ ही शून्य यानी समतल की चर्चा की जा सके। क्या आप ऐसी अन्य स्थितियों के बारे में सोच सकते हैं जहां धनात्मक और ऋणात्मक समझना विद्यार्थियों के लिए स्वाभाविक या सहज होगा?

गतिवधि

विचार 1: समुद्र तल के ऊपर और नीचे

एक बड़े कागज के टुकड़े पर, दीवार पर या ब्लैकबोर्ड पर एक बड़ा चित्र बनाएं। आपके चित्र में समुद्र, समुद्र के ऊपर पर्वत, और समुद्र स्तर के नीचे का स्थान दर्शाया जाना चाहिए। पत्रिकाओं से इकट्ठा किए गए या खुद बनाए हुए चित्रों का उपयोग करें। उपयुक्त वस्तुएं होंगी एक जहाज़, एक ऑक्टोपस, एक व्हेल, एक नाव, एक कार, एक मछली, आदि।

विद्यार्थियों से पूछें कि वे आपके चित्र पर वस्तुओं को कहां रखेंगे। उन्हें ‘समुद्र स्तर के ऊपर’ या ‘समुद्र स्तर से नीचे’ कहने के लिए प्रोत्साहित करें। जब सारी वस्तुएं चिपका दी जाएं, तो चर्चा कीजिए कि कोई हवाई जहाज़ कितना ऊंचा जा सकता है और ऑक्टोपस समुद्र के नीचे कितना अंदर जा सकता है। ‘समुद्र तल के नीच’ दर्शाने के लिए विद्यार्थियों को ऋण चिह्न के बारे में बताएं।

विचार 2: रोबोट कदम

कक्षा के मध्य में एक स्थान बनाएं, सुनिश्चित करें कि सभी विद्यार्थी इस मार्ग को देख सकें। उसके केन्द्र को एक चॉक के क्रॉस से चिह्नित करें और एक विद्यार्थी को उस क्रॉस पर खड़े रहने के लिए कहें। कक्षा से यह कल्पना करने को कहें कि विद्यार्थी एक रोबोट है जो एक सरल रेखा में केवल आगे और पीछे जाता है। क्रॉस से आगे कदम क्रमांकित करने के लिए कागज़ के टुकड़ों या चॉक चिह्नों का उपयोग करे।ं

रोबोट को 2 पर जाने के लिए कहें, फिर उसे दो स्थान पीछे जाने के लिए कहें। विद्यार्थियों से यह बताने को कहें कि क्रॉस पर कौन सी संख्या रखी जानी चाहिए – उम्मीद है वो शून्य कहेंगे।

दूसरों से कहें कि रोबोट को एक खास संख्या पर जाने का और फिर वापस एक खास संख्या पर जाने का निर्देश दें। अब रोबोट को 3 पर जाने को और फिर चार स्थान पीछे जाने को कहें। वो शून्य से नीचे चले गए! शून्य से पीछे एक कदम को दर्शाने के लिए कौन सी संख्या का उपयोग किया जा सकता है? शून्य से परे वाली अन्य संख्याएं बताएं और विद्यार्थियों को रोबोट को कहां जाना है यह बता कर ऋणात्मक संख्याएं कहने का अभ्यास करने को कहें।

विचार 3: बेंच का खेल

कमरे के अगले भाग में जितनी हो सके बेंच रखें और बेंचों को चॉक की मदद से रेखाएं बना कर अलग अलग सीटों में विभाजित कर दें। किसी एक सीट पर (कोने वाली सीट को छोड़कर) चॉक से शून्य लिखें और फिर बेंचों की अन्य सीटों को शून्य के दाईं ओर से 1, 2, 3 इस तरह क्रमांकित करें। विद्यार्थियों से पूछें कि बाईं ओर की सीटों को किस तरह से क्रमांकित किया जा सकता है। यदि वे नहीं सोच पाते हैं तो उन्हें ऋण चिह्न का सुझाव दें।

फिर ऐसे खेल खेलें जिनमें ऋणात्मक और धनात्मक संख्याएं शामिल हों। उदाहरण के लिए:

  • किसी विद्यार्थी को एक सीट के पीछे खड़े होने को कहें। कक्षा के बच्चों से कहें कि वे जहां चाहें उस विद्यार्थी को जाने के लिए कहें, जैसे ‘5’ या ‘–2’ इस तरह।
  • किसी विद्यार्थी को एक सीट पर बैठने को कहें और कक्षा से पूछें कि विद्यार्थी को किस सीट पर बैठना चाहिए। उन्हें शून्य से दाईं ओर की संख्याओं के लिए ‘3’ या ‘5’ और बाईं ओर की संख्याओं के लिए ‘ऋण 2’ या ‘ऋण 4’ का उपयोग करने को कहें।

इसके बाद, इस कार्य को और कठिन बना दें। एक विद्यार्थी को 5 के लेबल वाली सीट पर बिठाएं और कक्षा से पूछें कि सीट 2 पर जाने के लिए कौन सी ‘चाल’ चलनी होगी। यह ज़्यादा कठिन है क्योंकि ‘ऋण 3’ शून्य के सापेक्ष स्थिति दर्शा सकता है और बाईं ओर तीन सीट चलने की गतिविधि दर्शा सकता है। सुनिश्चित करें कि आप इन दो अर्थों पर चर्चा करेंगे।

अब विद्यार्थी को एक चाल चलने के लिए कहें और पूछें उस चाल को ‘पहले जैसा’ करने के लिए कौन सी चाल चलनी होगी।

आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा इस तरह के गेम का उपयोग करें। आप कुर्सियों का उपयोग करने के बजाय संख्याओं को दीवार पर चिपका सकते हैं। इस तरह से विद्यार्थी गेम खेल कर ऋणात्मक संख्याओं को जोड़ना और घटाना सीख सकेंगे।

वीडियो: स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए

केस स्टडी 1: गतिविधि 1 के उपयोग का अनुभव श्रीमती कपूर बताती हैं

यह एक अध्यापिका की कहानी है जिसने अपने प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थियों के साथ गतिविधि 1 का प्रयास किया। मुझे याद है कि मेरी कक्षाएं ऋणात्मक संख्याओं को नापसंद करने लगी थीं क्योंकि बहुत कुछ याद करना पड़ता था और अक्सर सबकुछ गड़बड़ हो जाता था।

मैंने गतिविधि 1 में उनके साथ कुछ खेलने का निर्णय लिया। ऋणात्मक संख्याओं के बारे में उन्हें पहले से पता था इसलिए उन्होंने तुरंत बताया कि ऑक्टोपस ऋण 8 मीटर पर होगा। मैंने दीवार पर लगे कागज़ पर चित्र बनाया जिसके साथ धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नित की गई एक स्केल थी, और इस छोटी सी गतिविधि के पूरा होने के बाद उसे वहीं छोड़ दिया। सुबह बहुत से विद्यार्थी अपने बनाए हुए चित्रों के साथ आए तो हमने बड़े चित्र में उन्हें उनकी सही जगह पर रख दिया और धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं के बारे में किसी और समय सोचने का तय किया।

बाद के समय में हमने बेंच गेम खेला। उन्हें इसमें बहुत मज़ा आया, हालांकि कई बार उन्हें शून्य से आगे की चाल को गिनने में काफी मुश्किल हुई, जैसे 5 से –2 तक, लेकिन उन्होंने इसका बहुत अभ्यास किया क्योंकि वो खेलते रहना चाहते थे। मुझे वाकई लगता है कि जब हमने पाठ्यपुस्तक में ऋणात्मक संख्यों पर अभ्यास करना आरंभ किया, तो खुद अपनी चाल चलने या दूसरों को चाल चलने के निर्देश देने से उन्हें यह समझने में काफी आसानी रही कि क्या हो रहा है।

पाठ्यपुस्तक के उपयोग वाले चरण को और आसान बनाने के लिए, मेरे ख्याल से मैं इनमें से कुछ उपायों को दोहराउंगी और फिर विद्यार्थियों के साथ इस पर चर्चा भी करूंगी कि हम जो कर रहे हैं उसे गणितीय अंकन में दर्ज कैसे कर सकते हैं और फिर उसे ब्लैकबोर्ड पर लिखेंगे। उम्मीद है फिर वे यह समझेंगे कि गतिविधियां गणितीय अंकनों और सवालों, और पाठ्यपुस्तक में क्या पूछा गया है उससे कैसे संबद्ध होती है।ं

आपके शिक्षण अभ्यास के बारे में सोचना

अपनी कक्षा के साथ ऐसा कोई अभ्यास करने पर बाद में यह सोचें कि क्या ठीक रहा और कहाँ गड़बड़ी हुई। ऐसे प्रश्न सोचें जिनसे विद्यार्थियों में रुचि पैदा हो तथा उनके बारे में उन्हें समझाएँ ताकि वे उन्हें हल करके आगे बढ़ सकें। ऐसे चिंतन से वह ‘समझ’ मिल जाती है, जिसकी मदद से आप विद्यार्थियों के मन में गणित के प्रति रुचि जगा सकते हैं और उसे मनोरंजक बना सकते हैं। जब आप सोचते हैं कि गतिविधि 1 के उपाय आपकी कक्षा के साथ कैसे रहे, तो श्रीमती कपूर की तरह छोटी छोटी खास बातों का एक नोट बना लें।

विचार के लिए रुकें

केस स्टडी में, श्रीमती कपूर ने कहा कि वह उनमें से कुछ गतिविधियां दोहरा कर उनके परिणामों को गणितीय अंकनों और सवालों की मदद से ब्लैकबोर्ड पर दर्ज करने के बारे में सोच रही थीं। विद्यार्थियों द्वारा गतिविधियों और गेम्स का बहुत अधिक अनुभव लेने के बाद आपके विचार से ऐसा करने के क्या फ़ायदे हो सकते हैं?

अब निम्नलिखित प्रश्नों के बारे में सोचें:

  • आपकी कक्षा में गतिविधियां और गेम कैसे रहे?
  • विद्यार्थियों से किस प्रकार की प्रतिक्रिया अनपेक्षित थी? इससे धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं की उनकी समझ के बारे में आपको क्या पता चलता है?
  • अपने विद्यार्थियों की समझ का पता लगाने के लिए आपने क्या सवाल किए?
  • किन बिंदुओं पर आपको लगा कि आपको और समझाना होगा?
  • अपने शिक्षण में अगली बार इन गतिविधियों को उपयोग करने पर आप क्या अलग करेंगे?

3 धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं की समझ विकसित करने के लिए संख्या रेखाओं का उपयोग करना

संख्या रेखा, जैसे कि चित्र 1 में दी गई है, एक ज्यामितीय विचार है जिसे एक सरल रेखा में एक खास क्रम में व्यवस्थित किए गए बिंदुओं के एक समूह के रूप में कल्पित किया जा सकता है। एक गणितीय रेखा की लंबाई अनंत होती है और साथ ही साथ परस्पर विरोधी दिशाओं में भी अनंत होती है, लेकिन उसका मध्य हमेशा मूल, या शून्य पर होता है। एक संख्या रेखा विद्यार्थियों को ऋणात्मक संख्याएं समझने और उन्हें जोड़ना और घटाना आरंभ करने में मदद कर सकती है।

चित्र 1 एक संख्या रेखा।

एक संख्या रेखा इतनी उपयोगी हो सकती है कि गणित सिखाने वाली किसी कक्षा में समान अंतरों पर विभाजित एक लंबी रेखा को बनाना और दर्शाना एक अच्छा विचार हो सकता है, जैसा कि चित्र 2 में दिखाया गया है

चित्र 2 एक खाली संख्या रेखा

रेखा को इस प्रकार बनाना कि उसके द्वारा दर्शाई गई संख्याएं लिखी जा सकें या अलग से नत्थी की जा सकें, इसका अर्थ होगा कि उसका उपयोग संख्या प्रणाली के किसी भी हिस्से के बारे में सोचने के लिए किया जा सकता है। फिर प्रत्येक खंड दर्शाएगा:

  • इकाई, दहाई या सैकड़ा आदि।
  • अंश या दशमलव, बहुत छोटे दशमलव सहित
  • मानक प्रारूप

– और बहुत से अन्य गणितीय विचार।

एक बार विद्यार्थी दीवार पर या अपनी डेस्क पर एक संख्या रेखा देखने के आदी हो गए, तो वे अपने तर्क की जांच के लिए उस रेखा की कल्पना कर सकेंगे।

ऋणात्मक संख्या की धारणा का अस्तित्व केवल शून्य को मूल के रूप में उपयोग करके धनात्मक संख्याओं के सापेक्ष ही होता है। अर्थात, संख्या रेखा पर एक बिंदु चुन लिया जाता है और उसे शून्य आवंटित कर दिया जाता है ताकि शून्य के एक ओर धनात्मक और दूसरी ओर ऋणात्मक होता है। विद्यार्थियों को विपरीत के मायनों में सोचने में मदद करने के लिए पारंपरिक रूप से एक क्षैतिज रेखा के दाएं हिस्से को धनात्मक संख्याओं को दर्शाने के लिए और बाएं हिस्से को ऋणात्मक संख्याओं को दर्शाने के लिए उपयोग किया जाता है। हालांकि एक उर्ध्वाधर रेखा का उपयोग करना भी एक अच्छा विचार है, जिसमें शून्य के ऊपर की संख्याओं को धनात्मक संख्याओं द्वारा और शून्य के नीचे की संख्याओं को ऋणात्मक संख्या द्वारा दर्शाया जाता है।

चाहे आप क्षैतिज रेखा का उपयोग कर रहे हों या उर्ध्वाधर रेखा का, शून्य को आवंटित किए गए बिंदु को हटाने से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि यह बस एक अनंत रेखा का एक हिस्सा है, और ऋणात्मक संख्याओं के अध्यायों में इस हिस्से को माना जाता है क्योंकि शून्य पर ही सबकुछ बदल जाता है।

निम्नलिखित गतिविधि में ब्लैकबोर्ड पर बनाई गई एक संख्या रेखा का उपयोग इस तरह किया जाता है कि उससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिले कि ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग कैसे किया जाना चाहिए और उन संख्याओं को जोड़ना और घटाना कैसे चाहिए। इस गतिविधि में अभिव्यक्ति ‘कल्पना करें यदि...’ का भी उपयोग किया जाता है। इस अभिव्यक्ति से विद्यार्थियों को अपनी कल्पना का उपयोग करने में मदद मिलती है और वे इस विश्वास की सीमा में नहीं रहते कि गणित केवल ‘सही’ या ‘गलत’ ही हो सकता है। यह जानना गणितीय मॉडलिंग में (जैसे शब्द समस्याओं में) खास तौर पर महत्वपूर्ण होता है जहां एक मॉडल एक कल्पित स्थिति दर्शाता है, जो कि आवश्यक नहीं कि सभी मामलों में वैध हो, या शायद कोई सच्ची वास्तविक जीवन स्थिति भी प्रतिबिंबित न करती हो (ब्रूनर, 1986)।

गतिविधि 2: गलतफहमियों और गलतियों से सीखना

भाग 1: ये कितना धनात्मक था?

ब्लैकबोर्ड पर -10 से 10 तक की एक संख्या रेखा बनाएं। विद्यार्थियों से उन धनात्मक बातों की कल्पना करने को कहें जो घटित हो सकती हैं और उनसे ये कल्पना करने को कहें कि वो उन्हें संख्या रेखा पर कहां रखना चाहेंगे। उदाहरण के लिए, ‘किसी ने मुझे रु 10 दिए’ ये थोड़ा धनात्मक है; ‘किसी ने मुझे रु 100 दिए’ ज़्यादा धनात्मक है।

फिर उन्हें ऋणात्मक बातें सुझाने के लिए कहें, जैसे, ‘जब एक रिक्शा मेरे पास से गया और मेरा ध्यान नहीं था तो मेरा नया ड्रेस कीचड़ से भर गया’, या ‘मेरी क्रिकेट टीम एक मैच हार गई’। हर बार उनसे यह कल्पना करने को कहें कि उनके विचार को संख्या रेखा पर कहां रखें, और उनसे यह सोचने के लिए कहें, ‘आप कितना धनात्मक महसूस करते हैं?’ या ‘वो कितना ऋणात्मक था?’

भाग 2: प्रसन्नता मॉडल

भाग 1 के उपायों का फिर ऋणात्मक संख्याओं को जोड़ने और घटाने तक विस्तार किया जा सकता है।

कक्षा से कहें:

  • मुझे आज ठीक लग रहा है, मान लो कि (संख्या रेखा की ओर इशारा करके) इस प्रसन्नता के पैमाने पर मेरा स्कोर 2 है।
  • मान लो किसी ने मुझे नौ मिठाई (एक धनात्मक) दीं, तो मुझे फिर कैसा महसूस होगा? हां, मेरा स्कोर 4 बढ़कर 6 हो जाएगा।
  • अब सोचिए यदि कोई मुझसे कहे कि मुझे स्कूल के बाद रुकना है (ऋणात्मक) तो मुझे कैसा महसूस होगा? हां, 1 कम होकर, 5 हो जाएगा।
  • कल्पना करें यदि मेरी चॉकलेटों में से सात आप ले जाएं, मुझे कैसा महसूस होगा? और भी उदास? हां, मुझे और 7 नीचे जाना पड़ेगा,-2 पर।
  • और यदि आप मुझे कहें कि मैं घर जल्दी जा सकता हूं?
  • कुछ धनात्मक जोड़ना या कुछ ऋणात्मक निकाल लेना स्थिति को बेहतर बनाता है (संख्या रेखा पर ऊपर बढ़ना)
  • कुछ ऋणात्मक जोड़ना या कुछ धनात्मक निकाल लेना स्थिति को खराब बनाता है (संख्या रेखा पर नीचे जाना)।
  • (स्रोत: भाग 2 को NRICH, अदिनांकित, से गृहीत किया गया था।)

वीडियो: सीखने के लिए बातचीत

केस स्टडी 2: श्रीमती अग्रवाल गतिविधि 2 के उपयोग का अनुभव बताती हैं

मैंने अपनी कक्षा को धनात्मक और ऋणात्मक संख्याएं समझाने के लिए गतिविधि 2 के उपायों का उपयोग किया। आरंभ करने से पहले मैंने कहा, ‘मैं मानती हूं कि ऋणात्मक संख्याओं को जोड़ने और घटाने में समझदारी है’

मैंने अपने ब्लैकबोर्ड के ऊपरी भाग पर एक बड़ी सी संख्या रेखा खींची। विद्यार्थियों के साथ मैंने एक चर्चा की जिसका विषय था ‘चीज़ें जो धनात्मक हैं’ और ‘चीज़ें जो ऋणात्मक हैं’। हमने काफ़ी लंबे समय तक इस संबंध में बात की कि यदि कोई आपको धनात्मक चीज़ देता है, या कोई आपसे कुछ ले लेता है, तो आपको कैसा लगेगा। हमने इस बारे में भी बात की कि यदि आपको कोई एक ऋणात्मक चीज़ देता है, या ले लेता है, तो आपको कैसा महसूस होगा।

फिर हमने प्रसन्नता मॉडल का उपयोग किया। मैंने मिठाई प्राप्त करने और मिठाई खोने के उदाहरण दिए, और उन्हें बताया कि मैं प्रसन्नता पैमाने पर कहां थी और फिर मैं जो कह रही थी उसकी गणितीय अभिव्यक्ति मैंने लिख ली। मैंने कई विद्यार्थियों से पैमाने का उपयोग करके उनकी अपनी कहानी कहने को कहा और आरंभ में उनके कहानी कहने के दौरान मैंने सवाल लिखे।

फिर मैंने विद्यार्थियों को तीन या चार के समूहों में काम करने को कहा। उन्होंने अपने डेस्क पर चॉक से एक संख्या रेखा बनाई और फिर एक ने एक कहानी सुनाई जबकि दूसरे ने यह दर्शाया कि वे संख्या रेखा पर कहां थे और दूसरे ने इससे होने वाले जोड़ और घटाने की संख्याएं लिखीं। मैंने आज तक इतनी मुस्कराहटें नहीं देखीं!

विचार के लिए रुकें

  • आपकी कक्षा में गतिविधि 2 कितने अच्छे ढंग से निष्पादित हुई?
  • विद्यार्थियों से किस प्रकार की प्रतिक्रिया अनपेक्षित थी? क्यों?
  • क्या आपने कार्य में किसी भी तरीके का संशोधन किया? अगर हाँ, तो इसके पीछे आपका क्या कारण था?
  • धनात्मक और ऋणात्मक संख्याएं समझने के बारे में आपके विद्यार्थियों की समझ के बारे में आपने क्या सीखा?

4 जोड़ने और घटाने की प्रक्रिया के अर्थ

जोड़ना और घटाना परस्पर व्युत्क्रम गणितीय विधियां हैं। उदाहरण के लिए:

  • 5 + 1 = 6
  • 6 – 1 = 5
  • 6 – 5 = 1

कुछ शोधकर्ताओं (लिंचविस्की और विलियम्स, 1999; ब्रूनो और मार्टिनॉन, 1999) के अनुसार, घटाने के कौशल विद्यार्थियों को ऋणात्मक संख्याओं की धारणा सीखने में सहायता करते हैं। पूर्णांकों के मामले में जोड़ने और घटाने की प्रक्रियाएं आपस में बदलने योग्य होती हैं। उदाहरण के लिए:

  • 3 + 5 = 8 = 3 – (–5)

अगली गतिविधि का उद्देश्य है आपके विद्यार्थियों को धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं की गणना करने में शामिल विचार प्रक्रियाओं पर ध्यान केन्द्रित करने में मदद करना।

गतिविधि 3: धनात्मक और ऋणात्मक संख्याओं को जोड़ना

भाग 1: ऋणात्मक संख्याओं के साथ जोड़ने और घटाने की प्रक्रिया को समझने के लिए ‘काउंटर’ मॉडल का उपयोग करना

इस गतिविधि के लिए आपको काउंटर या दो अलग अलग रंगों में कार्ड के टुकड़ों की आवश्यकता होगी। एक रंग धनात्मक चिह्न और दूसरा रंग ऋणात्मक चिह्न दर्शाएगा। इस गतिविधि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है विद्यार्थियों को ऋणात्मक संख्याओं के साथ जोड़ने और घटाने के बारे में बात करने के लिए प्रेरित करना और उनकी विचार प्रक्रिया को समझाना। जब आप अपना अध्याय नियोजित कर रहे हों, तो आप शायद संसाधन 2, ‘सीखने के लिए चर्चा’ पर एक नज़र डालना चाहें।

अपने विद्यार्थियों को बताएं कि काउंटरों की सारी निम्नलिखित व्यवस्था कुल चार होती है।

चित्र 3 कुल चार होने वाले काउंटरों की विभिन्न व्यवस्थाएं।
  • विद्यार्थियों से कोई अन्य संभावनाएं सुझाने को कहें।
  • फिर उनसे यह समझाने को कहें कि ये सारी प्रस्तुतियां 4 कैसे दर्शाती हैं।
  • अब -2 को बहुत से अलग अलग तरीकों में दर्शाने के लिए धनात्मक और ऋणात्मक काउंटरों का उपयोग करें, आरंभ केवल दो ‘ऋणात्मक’ काउंटरों से करें। विद्यार्थियों से उनके अपने सुझाव देने को कहना न भूलें
  • क्या वे यह समझा सकते हैं कि सारी अलग अलग प्रस्तुतियां -2 क्यों दर्शाती हैं?

भाग 2: छोटे समूहों में, बड़ी संख्याओं के लिए ‘काउंटर’ मॉडल का उपयोग करना

अपने विद्यार्थियों को छोटे समूहों में रखें और उनसे कहें:

  • काउंटर या रंगीन कागज़ के टुकड़ों का उपयोग करके, दस से कम कोई संख्या चुनें और धनात्मक और ऋणात्मक काउंटरों की मदद से उस संख्या की कम से कम चार प्रस्तुतियां बनाएं।
  • अपनी प्रस्तुतियों को अतिरिक्त सवालों के रूप में दर्ज करें।
  • एक ऋणात्मक संख्या चुनें और इसे दोहराएं।
  • यदि आपके पास समय है, तो एक और संख्या चुनें जो आपको लगता है आपके लिए कठिन होगी।
  • अपनी प्रत्येक प्रस्तुति के लिए सवाल लिखें।
  • उन्हें चिह्नित करने के लिए दूसरे समूह के साथ उन्हें बदलें।

यदि आप कर सकें, तो NRICH वेबसाइट पर जा कर धनात्मक और ऋणात्मक काउंटरों के उपयोग के उपाय विकसित करने के कई ओर तरीके खोजें

(स्रोत: भाग 1 NRICH, अदिनांकित से गृहीत।)

वीडियो: स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए

केस स्टडी 3: श्रीमती नागराजु गतिविधि 3 के उपयोग का अनुभव बताती हैं

मैंने मेरी कक्षा में धनात्मक और ऋणात्मक काउंटरों का उपयोग किया क्योंकि उन्हें ऋणात्मक संख्याओं के साथ कैसे काम करें यह समझने में कठिनाई आ रही थी। मैंने धनात्मक और ऋणात्मक चिह्नों वाली कुछ कागज़ी प्लेटों के साथ आरंभ किया और विद्यार्थियों को प्लेट पकड़ कर कक्षा के सामने खड़ा होने को कहा।

उन्होंने कुछ अच्छे संयोजन के उपाय सुझाए जो 4 तक थे। ऋणात्मक 2 के लिए सुझाव देना आरंभ करने में उन्हें कुछ समय लगा लेकिन जल्द ही वो ये भी करने लगे। मैंने ब्लैकबोर्ड पर धनात्मक की कुल संख्या और ऋणात्मक की कुल संख्या लिखी और फिर विद्यार्थियों से वह चिह्न पूछा जिसका मतलब था उन्हें एक साथ करना। उन्होंने तुरंत ‘धन’ का निशान बताया।

अगली गतिविधि के लिए मैंने विद्यार्थियों को छह के समूह में रखा क्योंकि मेरी कक्षा में लगभग 60 विद्यार्थी हैं और वे सब साथ में ठीक कार्य करते हैं। प्रत्येक समूह के पास दो रंगों में दस कागज़ के टुकड़े थे और उन्होंने खुद ही धनात्मक और ऋणात्मक चिह्न लिखे। उन्होंने अपने द्वारा चुनी हुई हर संख्या के लिए अलग अलग प्रस्तुतियां बनाईं और मैंने भी ये सुनिश्चित किया कि वे पड़ोस के समूहों से अलग संख्याएं चुनें। उन्होंने अपने जोड़ के सवाल कागज़ के टुकड़ों पर लिखे जिन्हें हमने दीवार पर चिपका दिया ताकि हर कोई उन्हें देख सके।

मैं देखना चाहती थी कि क्या मैं इन्हीं उपायों का उपयोग कर उन्हें यह समझने में मदद कर सकती हूं कि जब आप एक ऋणात्मक ले जाते हैं तो क्या होता है, और हां आप ले जा सकते हैं! मैंने एक बार फिर कागज़ी प्लेट निकालीं और 8 धनात्मक और 3 ऋणात्मक से 5 बनाया। मैंने पूछा कि 2 ऋणात्मक निकाल लेने से हमें क्या मिलेगा और उन्होंने मुझे बताया कि उत्तर अब 7 था।

मैंने ब्लैकबोर्ड पर लिखा:

  • 5 – (–2) = 7

गृहकार्य के लिए मैंने उनसे उनकी पाठ्यपुस्तक में 5 – (–2) = 7 से मिलते जुलते तीन उदाहरण देखने को और ये सवाल कैसे दिखें उसका एक प्रति चित्र बनाने को कहा।

विचार के लिए रुकें

केस–स्टडी में श्रीमती नागराजु ने सारी कक्षा से एक सवाल पूछा सारे संयोजनों को एक साथ रखने के लिए किस चिह्न की आवश्यकता थी। सही जवाब दिया गया, लेकिन क्या आपको लगता है कि वह सुनिश्चित हो सकता हैं कि यह बिंदु सभी विद्यार्थियों को पूरी तरह समझ में आ गया था? उन्होंने और कौन सी कार्यनीतियां उपयोग में लाई होंगी यह सुनिश्चित करने के लिए कि सारे विद्यार्थी उत्तर के बारे में सोचने और उस पर चर्चा करने में शामिल थे?

अब निम्नलिखित प्रश्नों के बारे में सोचें:

  • जब आपने गतिविधि 3 पूरी की, तो आपने अपने विद्यार्थियों की समझ को ताड़ने के लिए कौन से प्रश्न पूछे?
  • क्या किसी भी समय आपको ऐसा लगा कि हस्तक्षेप करना चाहिए?
  • क्या कुछ ऐसे बिंदु थे जिन्हें आपको लगता है कि आपके कुछ या सभी विद्यार्थियों को अपनी समझ को बेहतर बनाने के लिए एक बार फिर देखना चाहिए?

5 सारांश

इस इकाई में ऋणात्मक संख्याओं, उनकी आवश्यकता की समझ और उनके साथ कैसे काम किया जा सकता है, इस पर पूरा ध्यान दिया गया है। इस इकाई को पढ़ कर आपने यह सोचा कि आपके विद्यार्थियों को ऋणात्मक संख्याएं असल में क्या होती हैं यह कल्पना करने के तरीके और उन्हें ऋणात्मक संख्याओं के साथ धन और ऋण देखने के तरीके विकसित करने में कैसे सक्षम करें। आप अपने विद्यार्थियों की कल्पना को उड़ान देने के लिए अभिव्यक्ति ‘कल्पना करें यदि...’ का भी उपयोग कर सकते हैं।

यदि विद्यार्थियों को ऋणात्मक संख्याओं को दुनिया में गणित के उपयोग के सामान्य भाग के रूप में देखना है तो उनके पास ऋणात्मक संख्याओं के साथ काम करने का समृद्ध और विविध अनुभव होना चाहिए। इस इकाई की गतिविधियों में ऋणात्मक संख्याओं को अनुभव करने और उन्हें समझने के लिए विद्यार्थियों को कई अलग अलग तरीके बताए गए हैं।

आपने यह भी देखा है कि कैसे सीखने पर और सीखा कैसे जाता है इस पर विचार करना शिक्षण में बेहतर होने के लिए महत्वपूर्ण है।

संसाधन

संसाधन 1: एनसीएफ/एनसीएफटीई शिक्षण आवश्यकताएँ

यह यूनिट NCF (2005) तथा NCFTE (2009) की निम्न शिक्षण आवश्यकताओं से जोड़ता है तथा उन आवश्यकताओं को पूरा करने में आपकी मदद करेगा:

  • शिक्षार्थियों को उनके शिक्षण में सक्रिय प्रतिभागी के रूप में देखें न कि सिर्फ ज्ञान प्राप्त करने वाले के रूप में; ज्ञान निर्माण के लिए उनकी क्षमताओं को कैसे प्रोत्साहित करें; रटने वाली पद्धतियों से शिक्षण को दूर कैसे ले जाएँ।
  • विद्यार्थियों को गणित को किसी ऐसी चीज़ के रूप में लेने दें जिसके बारे में वे बात करें, जिसके द्वारा संवाद करें, जिसकी आपस में चर्चा करें, जिस पर साथ मिलकर कार्य करें।

संसाधन 2: सीखने के लिए बातचीत

सीखने के लिए बातचीत क्यों जरूरी है

बातचीत मानव विकास का हिस्सा है, जो सोचने-विचारने, सीखने और विश्व का बोध प्राप्त करने में हमारी मदद करती है। लोग भाषा का इस्तेमाल तार्किक क्षमता, ज्ञान और बोध को विकसित करने के लिए औज़ार के रूप में करते हैं। अत:, विद्यार्थियों को उनके शिक्षण अनुभवों के भाग के रूप में बात करने के लिए प्रोत्साहित करने का अर्थ होगा उनकी शैक्षणिक प्रगति का बढ़ना। सीखे गए विचारों के बारे में बात करने का अर्थ होता है:

  • उन विचारों को परखा गया है
  • तार्किक क्षमता विकसित और सुव्यवस्थित है
  • जिससे विद्यार्थी अधिक सीखते हैं।

किसी कक्षा में रटा-रटाया दोहराने से लेकर उच्च श्रेणी की चर्चा तक विद्यार्थी वार्तालाप के विभिन्न तरीके होते हैं।

पारंपरिक तौर पर, शिक्षक की बातचीत का दबदबा होता था और वह विद्यार्थियों की बातचीत या विद्यार्थियों के ज्ञान के मुकाबले अधिक मूल्यवान समझी जाती थी। तथापि, पढ़ाई के लिए बातचीत में पाठों का नियोजन शामिल होता है ताकि विद्यार्थी इस ढंग से अधिक बात करें और अधिक सीखें कि शिक्षक विद्यार्थियों के पहले के अनुभव के साथ संबंध कायम करें। यह किसी शिक्षक और उसके विद्यार्थियों के बीच प्रश्नोत्तर सत्र से कहीं अधिक होता है क्योंकि इसमें विद्यार्थी की अपनी भाषा, विचारों और रुचियों को ज्यादा समय दिया जाता है। हम में से अधिकांश कठिन मुद्दे के बारे में या किसी बात का पता करने के लिए किसी से बात करना चाहते हैं, और अध्यापक बेहद सुनियोजित गतिविधियों से इस सहज-प्रवृत्ति को बढ़ा सकते हैं।

कक्षा में शिक्षण गतिविधियों के लिए बातचीत की योजना बनाना

शिक्षण की गतिविधियों के लिए बातचीत की योजना बनाना महज साक्षरता और शब्दावली के लिए नहीं है, यह गणित एवं विज्ञान के काम तथा अन्य विषयों के नियोजन का हिस्सा भी है। इसे समूची कक्षा में, जोड़ी कार्य या सामूहिक कार्य में, आउटडोर गतिविधियों में, भूमिका पर आधारित गतिविधियों में, लेखन, वाचन, प्रायोगिक छानबीन और रचनात्मक कार्य में योजनाबद्ध किया जा सकता है।

यहां तक कि साक्षरता और गणना के सीमित कौशलों वाले नन्हें विद्यार्थी भी उच्चतर श्रेणी के चिंतन कौशलों का प्रदर्शन कर सकते हैं, बशर्ते कि उन्हें दिया जाने वाला कार्य उनके पहले के अनुभव पर आधारित और आनंदप्रद हो। उदाहरण के लिए, विद्यार्थी तस्वीरों, आरेखणों या वास्तविक वस्तुओं से किसी कहानी, पशु या आकृति के बारे में पूर्वानुमान लगा सकते हैं। विद्यार्थी भूमिका निभाते समय कठपुतली या पात्र की समस्याओं के बारे में सुझावों और संभावित समाधानों को सूचीबद्ध कर सकते हैं।

जो कुछ आप विद्यार्थियों को सिखाना चाहते हैं, उसके इर्दगिर्द पाठ की योजना बनायें और इस बारे में सोचें, और साथ ही इस बारे में भी कि आप किस प्रकार की बातचीत को विद्यार्थियों में विकसित होते देखना चाहते हैं। कुछ प्रकार की बातचीत खोजी होती है, उदाहरण के लिए: ‘इसके बाद क्या होगा?’, ‘क्या हमने इसे पहले देखा है?’, ‘यह क्या हो सकता है?’ या ‘आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि वह यह है?’ कुछ अन्य प्रकार की वार्ताएं ज्यादा विश्लेषणात्मक होती हैं, उदाहरण के लिए विचारों, साक्ष्य या सुझावों का आकलन करना।

इसे रोचक, मज़ेदार और सभी विद्यार्थियों के लिए संवाद में भाग लेना संभव बनाने की कोशिश करें। विद्यार्थियों को उपहास का पात्र बनने या गलत होने के भय के बिना दृष्टिकोणों को व्यक्त करने और विचारों का पता लगाने में सहज होने और सुरक्षित महसूस करने की जरूरत होती है।

विद्यार्थियों की वार्ता को आगे बढ़ाएं

शिक्षण के लिए वार्ता अध्यापकों को निम्न अवसर प्रदान करती है:

  • विद्यार्थी जो कहते हैं उसे सुनना
  • विद्यार्थियों के विचारों की प्रशंसा करना और उस पर आगे काम करना
  • इसे आगे ले जाने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना।

सभी उत्तरों को लिखना या उनका औपचारिक आकलन नहीं करना होता है, क्योंकि वार्ता के जरिये विचारों को विकसित करना शिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपको उनके शिक्षण को प्रासंगिक बनाने के लिए उनके अनुभवों और विचारों का यथासंभव प्रयोग करना चाहिए। सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी वार्ता खोजी होती है, जिसका अर्थ होता है कि विद्यार्थी एक दूसरे के विचारों की जांच करते हैं और चुनौती पेश करते हैं ताकि वे अपने प्रत्युत्तरों को लेकर विश्वस्त हो सकें। एक साथ बातचीत करने वाले समूहों को किसी के भी द्वारा दिए गए उत्तर को स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। आप समूची कक्षा की सेटिंग में ‘क्यों?’, ‘आपने उसका निर्णय क्यों किया?’ या ‘क्या आपको उस हल में कोई समस्या नजर आती है?’ जैसे जांच वाले प्रश्नों के अपने प्रयोग के माध्यम से चुनौतीपूर्ण विचारशीलता को तैयार कर सकते हैं। आप विद्यार्थी समूहों को सुनते हुए कक्षा में घूम सकते हैं और ऐसे प्रश्न पूछकर उनकी विचारशीलता को बढ़ा सकते हैं।

अगर विद्यार्थियों की वार्ता, विचारों और अनुभवों की कद्र और सराहना की जाती है तो वे प्रोत्साहित होंगे। बातचीत करने के दौरान अपने व्यवहार, सावधानी से सुनने, एक दूसरे से प्रश्न पूछने, और बाधा न डालना सीखने के लिए अपने विद्यार्थियों की प्रशंसा करें। कक्षा में कमजोर बच्चों के बारे में सावधान रहें और उन्हें भी शामिल किया जाना सुनिश्चित करने के तरीकों पर विचार करें। कामकाज के ऐसे तरीकों को स्थापित करने में थोड़ा समय लग सकता है, जो सभी विद्यार्थियों को पूरी तरह से भाग लेने की सुविधा प्रदान करते हों।

विद्यार्थियों को खुद से प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें

अपनी कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करें जहां अच्छे चुनौतीपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं और जहां विद्यार्थियों के विचारों को सम्मान दिया जाता है और उऩकी प्रशंसा की जाती है। विद्यार्थी प्रश्न नहीं पूछेंगे अगर उन्हें उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर भय होगा या अगर उन्हें लगेगा कि उनके विचारों का मान नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित करना उनको जिज्ञासा दर्शाने के लिए प्रोत्साहित करता है, उनसे अपने शिक्षण के बार में अलग ढंग से विचार करने के लिए कहता है और उनके नजरिए को समझने में आपकी सहायता करता है

आप कुछ नियमित समूह या जोड़े में कार्य करने, या शायद ‘विद्यार्थियों के प्रश्न पूछने का समय’ जैसी कोई योजना बना सकते हैं ताकि विद्यार्थी प्रश्न पूछ सकें या स्पष्टीकरण मांग सकें। आप:

  • अपने पाठ के एक भाग को ‘अगर आपका प्रश्न है तो हाथ उठाएं’ नाम रख सकते हैं
  • किसी विद्यार्थी को हॉट-सीट पर बैठा सकते हैं और दूसरे विद्यार्थियों को उस विद्यार्थी से प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं जैसे कि वे पात्र हों, उदाहरणत: पाइथागोरस या मीराबाई
  • जोड़ों में या छोटे समूहों में ‘मुझे और अधिक बताएं’ खेल खेल सकते हैं
  • मूल पूछताछ का अभ्यास करने के लिए विद्यार्थियों को कौन/क्या/कहां/कब/क्यों वाले प्रश्न दे सकते हैं
  • विद्यार्थियों को कुछ डेटा (जैसे कि विश्व डेटा बैंक से उपलब्ध डेटा, उदाहरणत: पूर्णकालिक शिक्षा में बच्चों की प्रतिशतता या भिन्न देशों में स्तनपान की विशेष दरें) दे सकते हैं, और उनसे उन प्रश्नों के बारे में सोचने के लिए कह सकते हैं जो आप इस डेटा के बारे में पूछ सकते हैं
  • विद्यार्थियों के सप्ताह भर के प्रश्नों को सूचीबद्ध करते हुए प्रश्न दीवार डिज़ाइन कर सकते हैं।

जब विद्यार्थी प्रश्न पूछने और उन्हें मिलने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए मुक्त होते हैं तो उस समय आपको रुचि और विचारशीलता के स्तर को देखकर हैरानी होगी। जब विद्यार्थी अधिक स्पष्टता और सटीकता से संवाद करना सीख जाते हैं, तो वे न केवल अपनी मौखिक और लिखित शब्दावलियां बढ़ाते हैं, अपितु उनमें नया ज्ञान और कौशल भी विकसित होता ह।ै

अतिरिक्त संसाधन

References

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Egan, K. (1986) Teaching as Story Telling: An Alternative Approach to Teaching and Curriculum in the Elementary School. University of Chicago Press, Chicago.
Fishbein, E. (1987) Intuition in Science and Mathematics: An Educational Approach. Dordrecht: Reidel.
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National Council for Teacher Education (2009) National Curriculum Framework for Teacher Education (online). New Delhi: NCTE. Available from: http://www.ncte-india.org/ publicnotice/ NCFTE_2010.pdf (accessed 5 February 2014).
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NRICH (undated) ‘Making sense of positives and negatives: stage 3’ (online). Available from: http://nrich.maths.org/ 9958 (accessed 6 February 2014).
Watson, A., Jones, K. and Pratt, D. (2013) Key Ideas in Teaching Mathematics. Oxford: Oxford University Press.

Acknowledgements

अभिस्वीकृतियाँ

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इस यूनिट में सामग्री को पुनः प्रस्तुत करने की अनुमति के लिए निम्न स्रोतों का कृतज्ञतापूर्ण आभार:

गतिविधि 3, भाग 1: 'धनात्मक और ऋणात्मक को समझना', http://nrich.maths.org, © 1997–2014 यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैम्ब्रिज से गृहीत (Activity 3, Part 1: adapted from ‘Making sense of positives and negatives’, http://nrich.maths.org © 1997–2014 University of Cambridge.

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