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वैकल्पिक संकल्पनाएः ऊष्मा और तापमान

यह इकाई किस बारे में है

छोटी आयु से ही विद्यार्थी अपने आसपास की दुनिया और वह किस प्रकार से काम करती है, इसकी व्याख्या करने के लिए विचारों और व्यक्तिगत सिद्धांतों को विकसित करते हैं। अपनी भविष्यवाणियों और क्रिया के लिए नियमों के आधार पर बच्चों के विचार उदाहरण के लिए, विद्यार्थी तेजी से इन बात को सीख लेते हैं कि आग गर्म होती है और उसे छूना नहीं चाहिए। वे जान लेते हैं कि पत्थर डूब जाते हैं और लकड़ी तैरती रहती है। जिस समय तक विद्यार्थी स्कलू जाते हैं, उस समय तक वे पहले ही विज्ञान की उस परिघटना के बारे में स्वयं के सिद्धांतों को निर्मित कर चुके होते हैं, जिसको आप पढ़ा रहे होते हैं। ज्यादातर, उनके विचार स्वीकृत वैज्ञानिक समझ से भिन्न होते हैं।

यह इकाई ऊष्मा और तापमान के विषय से जुड़ी वैकल्पिक संकल्पनाओं (इन्हें कई बार लघु संकल्पनाएं कहा जाता है) का परीक्षण करती है। यह इस बात पर गौर करने करने के लिए आगे बढ़ती है कि किस प्रकार से आप अपने शिक्षण के जरिये विज्ञान के स्वीकृत विचारों को अपनाने के लिए अपने विद्यार्थियों की वैकल्पिक संकल्पनाओं को विकसित करने में मदद कर सकते हैं।

आप इस इकाई में क्या सीख सकते हैं

  • आपके विद्यार्थियों की वैकल्पिक संकल्पनाएं क्या हैं? इसका पता किस प्रकार से लगाएं या इसका आकलन किस प्रकार करें
  • उन वैकल्पिक संकल्पनाओं के बारे में, जो कि ऊष्मा और तापमान के संबंध में आपके विद्यार्थियों की हो सकती है।
  • आप विद्यार्थियों के सरल विचारों और वैकल्पिक संकल्पनाओं को किस प्रकार से बदल और विकसित कर सकते हैं
  • ऊष्मा और तापमान में के बीच अंतर को समझने के लिए अपने विद्यार्थियों की मदद करने के लिए गतिविधियों को किस प्रकार से नियोजित करें

यह दृष्टिकोण क्यों महत्वपूर्ण है

अपने विद्यार्थियों के विचारों से अवगत होना और इस बात को जानना कि किस प्रकार से उनके विचार को विकसित किया जाए जो महत्वपूर्ण है। क्योंकि–

  • उनके विचार इस बात को विकसित कर सकते हैं कि विद्यार्थी किस प्रकार से सीखते हैं और किस सीमा तक वे उन वैज्ञानिक विचारों को स्वीकार सकते हैं, जिनके बारे में आप उन्हें पढ़ाते हैं
  • रटन्त पढ़ाई करवाने की बजाय सार्थक समझ को सहायता देने से आपका अध्यापन ज्यादा सफल होगा।
  • यह ज्ञान की योजना बनाने में आपको समर्थ बनाता है, जो कि उनके विचारों को विकसित या परिवर्तित करेगा।

विचार के लिए रुकें

  • ऊष्मा व ताप से जुड़े अनुभव विद्यार्थियों ने स्कूल के बाहर किस प्रकार प्राप्त किये इन अनुभवों की सूची बनायें।
  • आपकी समझ में इन अनुभवों से उन्होंने ऊष्मा और तापमान के बारे में क्या सीखा है?

1 स्वयं की समझ

शिक्षक के रूप में आपको उस विषय की अच्छी समझ होनी चाहिए, जिसे कि आप पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा आपको इस बात से भी अवगत होना चाहिए कि आपके विद्यार्थियों को अवधारणात्मक रूप से कौन सी चीज़ कठिन लग सकती है और गलतफहमियों के संभावित क्षेत्र कौन से हैं। आप इस बात का पता लगा सकते हैं कि आपके विद्यार्थी आकलन की विभिन्न तकनीक, जैसे कि अवधारणा का पता लगाने (इकाई पर्यवेक्षण के नमूने–छाया और रात व दिन) को देखें, किन विचारों को संजोये रहते हैं। पूर्वानुमान लगाना, पर्यवेक्षण करना, व्याख्या करना (इकाई को देखें प्रदर्शन विधि–भोजन), चित्र और सही/गलत प्रश्नोत्तरियों को देखें।

गतिविधि 1: स्वयं की समझ का पता लगाना

ऊष्मा और तापमान के बारे में संसाधन 1 सही/गलत प्रश्नोत्तरी है। इस प्रश्नोत्तरी को स्वयं बिना उत्तर देखे हल करें। जब आप इसे पूरा कर लें तो ऐसे किन्हीं भी प्रश्नों, जिनके बारे में आप आश्वस्त नहीं हों, अपने उत्तर की जाचं करने के लिए संदर्भ सामग्री का उपयोग करें।

संसाधन 2 और 3, ‘प्रगति और कार्य-प्रदर्शन का आकलन करना’ तथा ‘अनुश्रवण और फीडबैक देना’ इस बात का पता लगाने के बारे में उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराता है कि आपके विद्यार्थी क्या जानते हैं? और जब उनकी सोच गलतफहमी पैदा करने वाली हो तो उसे चुनौती देना। सहयोग और उपयोगी फीडबैक प्रदान करने से आपके विद्यार्थी अपनी अवधारणाओं पर और अधिक प्रश्न करने के लिए प्रेरित होंगे तथा अपने विचारों की और अधिक जांच-पड़ताल करेंगे।

विचार के लिए रुकें

  • जब आपने इस प्रश्नोत्तरी को किया तो आपको कैसा लगा?
  • क्या आपको कोई भी प्रश्न मुश्किल लगा? अगर हां तो कौन सा? और क्यों?
  • क्या प्रश्नोत्तरी ने आपको अपने विद्यार्थियों के लिए विषय के सर्वाधिक चुनौतीपूर्ण पहलुओं की पहचान करने में आपकी मदद की? आपकी समझ में ये क्या हो सकती हैं।
  • आपकी समझ में किन गलत धारणाओं को यह प्रश्नोत्तरी प्रकट करेगी?

शुरू-शुरू में ये प्रश्न अपेक्षाकृत आसान लगते हैं, लेकिन कुछ उत्तरों को लेकर अनिश्चित रहना असामान्य नहीं है। हालांकि इसे कम चुनौतिपूर्ण बनाने के लिए ‘परीक्षण’ की बजाय ‘प्रश्नोत्तरी’ कहा गया है। फिर भी हो सकता है कि आपने अपनी समझ की परख किये जाने के बारे में थोड़ी-बहुत चिंता महसूस की हो। आपके विद्यार्थियों को भी इसी तरह की अनुभूतियाँ होंगी। अतः जब आप किसी विषय की अपने विद्यार्थियों की समझ की जांच कर रहे होते हैं, तो यह जरूरी है कि उन्हें सहज बनाये रखें। उन्हें इस बात का भरोसा दिलाये जाने की ज़रूरत होती है कि उनका परीक्षण नहीं किया जा रहा है। उन्हें यह जानने की ज़रूरत होती है कि उनके विचारों में आपकी दिलचस्पी है, जिससे आप उन्हें ज्यादा प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।

वीडियो: प्रगति और कार्यप्रदर्शन का आकलन करना

केस स्टडी 1: विद्यार्थियों के विचारों के बारे में पता लगाना

श्री मिश्रा जी ने इस बात का पता लगाने के लिए पूर्वानुमान का उपयोग किया कि जब तरल पदार्थों को मिलाया जाता है, तो ऊष्मा और तापमान के बारे में उनके कक्षा सात के विद्यार्थी क्या समझते? और मानते हैं? यहां वे यह बताते हैं कि उन्होंने क्या किया? और किस चीज़ का पता लगाया

मैंने विद्यार्थियों से इस बारे में पूर्वानुमान लगाने के लिए कहा कि जब मैं विभिन्न तापमान पर पानी की विभिन्न मात्राओं को मिलाता हूं तो क्या होगा? मैंने विद्यार्थियों से यह पूछकर शुरुआत की कि थर्मामीटर क्या करता है? अधिकतर विद्यार्थी यह जानते थे कि इसका उपयोग तापमान मापने के लिए किया गया था, लेकिन कुछ का विचार था कि यह ऊष्मा को भी मापता था। मैंने उन्हें उत्तर बताने की बजाय बस वही बात कही जो कि रोचक थी, क्योंकि मैं चाहता था कि वे अपने विचारों को प्रकट करने में सहज महसूस करें।

इसके बाद, मैंने समान आयतन और तापमान के पानी के दो टोंटीदार पात्रों को लिया जिसमें पानी ठंडा था। मैंने एक विद्यार्थी से प्रत्येक टोंटीदार पात्र का तापमान मापने के लिए कहा, जिससे कि इस बात को देखा जा सके कि वे समान हैं। मैंने इस बारे में विद्यार्थियों से उनके पूर्वानुमानों को लिखने के लिए कहा कि उस समय पानी के तापमानों का क्या होगा? यदि पानी के दोनों टोंटीदार पात्रों को एक अन्य पात्र में मिश्रित कर दिया जाए। क्या तापमान कम होगा? बढ़ेगा? या वही बना रहेगा? इसके अलावा मैंने अंतिम तापमान का पूर्वानुमान लगाने के लिए भी कहा। अधिकतर विद्यार्थियों ने सोचा कि यह वही होगा लेकिन कुछ ने सोचा कि तापमान कम हो जाएगा क्योंकि यह पानी का बड़ा आयतन था, जिसकी कि मैंने अपेक्षा नहीं की थी।

मैंने पानी के विभिन्न आयतनों और तापमानों के लिए समान कार्य-विधियों का अनुसरण किया। मैंने उपयोग किया–

  • एक लीटर गर्म पानी और एक लीटर ठंडा पानी
  • आधा लीटर गर्म पानी और एक लीटर ठंडा पानी
  • एक लीटर गर्म पानी और आधा लीटर ठंडा पानी

इस गतिविधि को करने में अधिक समय नहीं लगा और विद्यार्थियों ने जिस बात का पूर्वानुमान लगाया और उनके पूर्वानुमानों के पीछे के जो कारण थे, उनसे मुझे उनके वर्तमान चिंतन को समझने में मदद मिली। उदाहरण के लिए, दो विद्यार्थियों ने सोचा कि ‘गर्म’ ‘ठडें’ के मुकाबले ज्यादा सशक्त था। यद्यपि अधिकतर ने इस बारे में सही-सही पूर्वानुमान व्यक्त किया कि क्या तापमान बढ़ेगा? अथवा घटेगा? या वही बना रहेगा? परन्तु वे मिश्रणों के तापमान का पूर्वानुमान लगाते समय उतने अधिक आश्वस्त नहीं थे। कुछ विद्यार्थियों ने बस एक तापमान को दूसरे से घटा दिया। कुछ ने उन्हें जोड़ दिया।

विचार के लिए रुकें

  • आपकी समझ में श्री मिश्रा जी के विद्यार्थियों ने तापमान के बारे में क्या समझा?
  • उन्होंने कौन सी वैकल्पिक संकल्पनाएं खोजीं?
  • उन्होंने उनके वास्तविक चिंतन को प्रकट करने के लिए उन्हें किस तरह से प्रोत्साहित किया?

2 ऊष्मा और तापमान के बारे में वैकल्पिक संकल्पनाएं

आपने गतिविधि 1 में जो सही/गलत प्रश्नोत्तरी के लिए है। वह अनुसंधानकर्ताओं द्वारा ऊष्मा और तापमान के बारे में पायी गयीं कुछ वैकल्पिक संकल्पनाओं पर आधारित है (जिन्हें कई बार गलत धारणाएं कहा जाता है)। विद्यार्थियों के दिमाग में बैठीं कुछ वैकल्पिक धारणाओं में से कुछ इस प्रकार से हैं–

  • पानी और हवा की तरह ताप एक पदार्थ है, जो कि वस्तुओं के अंदर जाता है और बाहर निकलता है।
  • गर्मी और ठंडी पृथक स्थितियां हैं और वे एक वस्तु का हिस्सा नहीं हैं।
  • ठंडी गर्मी का विलोम है।
  • संबंधित वस्तु के स्रोत या गुणधर्मों के द्वारा चिह्नित गर्मी के विभिन्न प्रकार होते हैं।
  • गर्मी में वातावरण गर्म होता है लेकिन तापमान ठंडा या गर्म हो सकता है।
  • तापमान और ऊष्मा एक ही चीज़ हैं।

  • ठंडी चीज़ों में ऊष्मा नहीं होती।

विचार के लिए रुकें

विद्यार्थियों को स्कूल के बाहर अपने जीवन में ऊष्मा और तापमान के बारे में होने वाले संभावित अनुभवों के बारे में आपने जो सूची बनाई थी वापस उस सूची को देखें।

  • ‘ऊष्मा’ शब्द का किस प्रकार से उपयोग किया जाता है?
  • ऊष्मा के बारे में ऐसे किन वाक्यांशों का उपयोग किया जाता है, जो कि गलतफहमियों को जन्म दे सकते हैं?

विज्ञान का विषय विद्यार्थियों को मुश्किल लगता है। ये कठिनाइयां आंशिक रूप से उस तरीके के कारण हैं, जिस तरीके से ‘ऊष्मा’ शब्द का उपयोग रोजमर्रा की भाषा में किया जाता है। मिलर (2000) ने इस बात का उल्लेख किया है कि ‘ऊष्मा’ का उपयोग संज्ञा (उदाहरण के लिए वस्तु में ऊष्मा) और क्रिया के रूप में (उदाहरण के लिए किसी वस्तु को ऊष्मा देना) किया जाता है। इस प्रकार से ‘ऊष्मा’ शब्द का प्रयोग गर्म वस्तु में ऊर्जा के वर्णन करने के साथ-साथ तापमान में अंतर के कारण दो वस्तुओं के बीच में ऊर्जा के हस्तांतरण की प्रक्रिया के लिए भी किया जाता है (2,000, पी. 9)। यह शिक्षक के रूप में आपके लिए भाषा के अपने उपयोग के साथ सजग रहने और अपने विद्यार्थियों को उपयोग में लायी गयी शब्दावलियों के पीछे के अर्थों को खोजने का अवसर देने की ज़रूरत को चिह्नांकित करता है।

विचार के लिए रुकें

क्या आप विज्ञान के किसी ऐसे दूसरे विषय के बारे में सोच सकते हैं, जहां पर वैज्ञानिक व्याख्या को इस कारण से आत्मसात करना मुश्किल हो कि वह हमारे रोजमर्रा के अनुभव के विपरीत जान पड़ती है?

3 ऐसे विचार जोकि विद्यार्थियों में ऊष्मा और तापमान के बारे में होते हैं

अब आप इस बात का पता लगाने जा रहे हैं कि आपके विद्यार्थियों का ऊष्मा और तापमान के बारे में क्या विचार हैं।

गतिविधि 2: आपके विद्यार्थियों के विचार क्या हैं?

आप या तो श्री मिश्रा की तरह का दृष्टिकोण अपना सकते हैं या सही / गलत की प्रश्नोत्तरी का उपयोग कर सकते हैं। आप चाहे जिस दृष्टिकोण का उपयोग करें , आपको यह तय करने की ज़रूरत पड़ेगी कि आपके विर्द्याथियों की आयु के लिए क्या उपयुक्त ह? उदाहरण के लिए, इस बात का पता लगाना अनुपयुक्त होगा कि बहुत छोटे विद्यार्थी थर्मामीटर के बारे में क्या जानते हैं।

एक सही या गलत प्रश्नोत्तरी में ऐसे प्रश्न होने चाहिए, जो कि समझे जाएं और प्रश्नों की संख्या छोटे विद्यार्थियों के लिए कम की जानी चाहिए। आप कथनों को ब्लैकबोर्ड पर लिख सकते हैं और विद्यार्थियों को अपनी पुस्तकों में अपने उत्तरों को लिखने दे सकते हैं या विद्यार्थियों को अपने विचारों को आपको बताने के लिए कह सकते हैं।

इसके पहले कि आप शुरुआत करें, विद्यार्थियों को यह बताएं कि–

  • उनके विचारों में आपकी दिलचस्पी है
  • आप नहीं चाहते कि इस बार वे साथ मिलकर काम करें, क्योंकि आप चाहते हैं कि यह केवल उनके अपने विचार हों
  • यह परीक्षा नहीं है और गलत या सही उत्तरों के बारे में चिंता करने की कोई ज़रूरत नहीं है
  • आप उनके उत्तरों को संकलित करने जा रहे हैं, जिससे कि आपको अपने अध्यापन की योजना बनाने में मदद मिले।

विचार के लिए रुकें

  • आपके विद्यार्थियों ने गतिविधि के प्रति किस प्रकार से फीडबैक दिया? आपने उन्हें किस प्रकार से समझाया?
  • आपने अपने विद्यार्थियों के विचारों से क्या सीखा?
  • क्या आपके विद्यार्थियों के पास वैकल्पिक संकल्पनाएं थीं? वे क्या थीं? क्या इस इकाई में पहले सूचीबद्ध वैकल्पिक संकल्पनाओं में से कोई शामिल थीं?
  • अगर आप इसे दोबारा करते हैं, तो गतिविधि को बेहतर बनाने के लिए आप क्या करेंगे?

4 वैकल्पिक संकल्पनाओं को बदलने के लिए विद्यार्थियों की मदद करना

आपके द्वारा यह पता लगा लिये जाने के बाद कि आपके विद्यार्थियों के क्या विचार हैं? विज्ञान के शिक्षक के रूप में आप उनकी वैकल्पिक संकल्पनाओं को बदलने और ज्यादा वैज्ञानिक समझ बनाने में उनकी मदद करने के लिए क्या कर सकते हैं? अगले केस स्टडी में आप इस बात का पता लगाएंगे कि एक शिक्षक अपने पाठ को लेकर क्या दृष्टिकोण अपनाता है?

केस स्टडी 2: विद्यार्थियों की समझ को विकसित करना

श्रीमती मनीषा के विद्यार्थियों ने इस बात को सीखा कि थर्मामीटर का उपयोग किस प्रकार से किया जाए? और उन्होंने एक सही या गलत की प्रश्नोत्तरी आयोजित की। इस केस स्टडी में उस चीज़ की बात करती हैं, जिसको उन्होंने देखा होता है और उस पाठ की जिसे उन्होंने विद्यार्थियों के विचारों को बदलने के लिए पढ़ाया होता है।

मैं कक्षा छह के 66 विद्यार्थियों की एक बड़ी कक्षा को पढ़ाती हूं। मैंने पाया था कि उनमें से बहुत से यह मानते थे कि किसी वस्तु का तापमान इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस पदार्थ से बनी है। मैं उन्हें तापमान के बारे में और इस बारे में पढ़ाना चाहती थी कि किस प्रकार से समस्त वस्तुओं का तापमान अपने परिवेश के समान होगा। इसके अलावा, मैं उन्हें यह समझाना चाहती थी कि तापमान क्यों बदलता है?

मैंने निर्णय किया कि विद्यार्थियों को विभिन्न पदार्थों का तापमान मापने के लिए कहा जाए। मेरे पास कपड़े, फर, टाइल, धातु के चम्मच, फल, कुछ मिट्टी, लकड़ी के ब्लॉक जिसमें कि थर्मामीटर के लिए छेद हो, गर्म चाय के प्याले, कमरे के तापमान वाला कुछ पानी और बहुत अधिक ठंडा पानी समेत ढेर सारे उदाहरण थे।

मैंने विद्यार्थियों से छहः के समूहों में काम करने के लिए कहा। मेरे पास प्रत्येक समूह को पूरा सेट देने के लिए पर्याप्त उपकरण नहीं थे। इसके अलावा मैं गर्म तरल पदार्थ को गिरा देने को लेकर भी चिंतित थी। इसलिए मैंने थर्मामीटर के साथ कक्षा के इर्द-गिर्द पदार्थों को रखने का निर्णय लिया। मैंने विद्यार्थियों को बताया कि उन्हें वस्तु का तापमान मापने के लिए समूह से दो लोगों को भेजना है। दोनों को ही तापमान लेना था, जिससे कि उनके पास दो रीडिंग्स हों। इस तरह से, विद्यार्थियों का थर्मामीटर को उपयोग में लाने के साथ-साथ इस बात का भी अभ्यास हो गया कि उन्होंने उसे ठीक प्रकार से पढ़ा है। मैंने उनके लिए कॉपी करने और पूरा करने के लिए ब्लैकबोर्ड पर एक तालिका बनायी (तालिका 1)।

तालिका 1 वस्तुओं के तापमानों को रिकार्ड करना।
पदार्थतापमान 1तापमान 2

मैंने उन्हें दर्शाया कि रीडिंग को कैसे करें? और उन्हें इस बात की याद दिलायी कि थर्मामीटर पर पैमाने को कैसे पढ़ें? प्रत्येक जोड़ियों ने दो या तीन पदार्थों का तापमान रिकार्ड किया।

उनके काम संपन्न कर लेने पर हमने कक्षा के रूप में उनके परिणामों को जांचा। उन सभी ने अधिकतर पदार्थों के लिए वही तापमान पाया था। मैंने पूछा कि क्या किसी परिणाम ने उन्हें चौंकाया है? कुछ विद्यार्थियों ने सोचा था कि फर और कपड़े का तापमान टाइल और धातु के चम्मच के मुकाबले अधिक होगा, जिसे कि उन्होंने ज्यादा ठंडा पाया।

एकमात्र अंतर गर्म पानी और ठंडे पानी के बीच था। समूहों ने विभिन्न तापमानों को रिकार्ड किया था। मैंने पूछा ऐसा क्यों है? क्या थर्मामीटर टूट गया है? वे ऐसा नहीं सोचते थे और उनका विचार था कि ऐसा इसलिए था कि गर्म पानी ऊष्मा खो रहा है और ठंडा पानी गर्म होता जा रहा है। मैंने पूछा कि अगर हम उन्हें पर्याप्त समय तक छोड़ दें, तो दोनों के तापमान में क्या होगा? उनके उत्तर दिलचस्प और विविध प्रकार के थे। वहां से, मैंने इस बात को समझाया कि किस प्रकार से तापमान किसी वस्तु में ऊष्मा की तीव्रता को मापता है और यह किस प्रकार से उस समय तक स्थानान्तरित होता है, जब तक कि यह अपने परिवेश के बराबर के तापमान तक नहीं पहुंच जाता है।

विचार के लिए रुकें

  • श्रीमती मनीषा ने किस प्रकार से तापमान के बारे में अपने विद्यार्थियों की वैकल्पिक संकल्पनाओं को बदलने की कोशिश किया?
  • उनके पाठ की मुख्य विशेषताएं क्या थीं, जिससे कि विद्यार्थियों को अपने विचार बदलने में मदद मिली?
  • इस बात को सुनिश्चित बनाने के लिए श्रीमती मनीषा को अब क्या करने की ज़रूरत है? कि उनके विद्यार्थियों के पास वैज्ञानिक समझ हो?
  • क्या आप ऐसे मॉडल के बारे में सोच सकते हैं? जिसका कि आप तापमान और ऊष्मा के बीच फर्क को स्पष्ट करने या इस बात को बताने के लिए उपयोग कर सकते हैं कि गर्म पानी के तापमान में गिरावट क्यों आई?

एक बार जब आप अपने विद्यार्थियों के विचारों को विकसित करने की कोशिश कर लेते हैं तो आपको उनकी समझ का आकलन करने की ज़रूरत होती है। आप उसी प्रविधि का उपयोग कर सकते हैं, जिसका कि आपने उनकी गलत धारणाओं का पता लगाने के लिए किया था या उन्हें नयी परिस्थितियां प्रदान कर सकते हैं, जिसमें कि वे अपनी नयी समझ को लागू कर सकते हैं।

5 विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समझ को विकसित करना

अब केस स्टडी 3 को पढ़ें और संसाधन 2, ‘प्रगति और कार्य-क्षमता का आकलन करना’ को पढ़ें, विशेष रूप से विद्यार्थी अपनी पढ़ाई में कहां हैं? इसका आकलन करने और पता लगाने से संबंधित खंडों को।

केस स्टडी 3: विद्यार्थियों में ऊष्मा और तापमान के बीच अंतर की समझ को विकसित करना

इस केस स्टडी में, श्री मिश्रा जी उस पाठ के बारे में बात करते हैं, जिसे कि उन्होंने ऊष्मा और तापमान के बारे में अपने विद्यार्थियों के विचारों से अवगत होने के बाद पढ़ाया था, जैसा कि केस स्टडी 1 में वर्णित किया गया है।

जब विभिन्न तापमानों पर पानी को विभिन्न आयतनों में मिलाया जाता है, तो तापमान में परिवर्तनों की खोज करने से यह पाठ विद्यार्थियों को जोड़ता है। मैंने उन्हें ऐसा करने के लिए कुछ आयतन प्रदान किये, लेकिन कहा कि वे अन्य कामों को भी कर सकते हैं, अगर उनके पास समय हो। मैंने ब्लैकबोर्ड पर निर्देशों को लिख दिया। विद्यार्थियों को परिणामों की तालिका पूरी करनी थी। उन्होंने पानी के आयतनों और शुरुआती तापमान को रिकार्ड किया। उन्हें परिणामी तापमान का पूर्वानुमान लगाना था और फिर वास्तविक तापमान को रिकार्ड करना था।

उनके इस काम को खत्म कर लेने पर क्या होता है? इसे समझाने के लिए एक प्रदर्शन किया। मैंने अपनी व्याख्या में सहायता के लिए एक मॉडल का उपयोग किया। मैंने ऊष्मा का प्रतिनिधित्व करने के लिए डाई (रंग) का उपयोग किया। रंग की सघनता ने तापमान का प्रतिनिधित्व किया। मेरे पास विभिन्न तापमानों पर पानी का प्रतिनिधित्व करने के लिए डाई की विभिन्न मात्राओं से पहले से ही तैयार अनेक खाली डिब्बे थे। मैंने विद्यार्थियों से यह बताने के लिए कहकर कि सबसे ठंडे से सबसे गर्म में रखने के लिए डिब्बों को किस क्रम में रखा जाए? इस बात की जांच की कि वे मॉडल को समझते हैं। यहां तक कि ‘ठंडे’ टोंटीदार पात्र में भी कुछ डाई थी, हालांकि वह काफी फीका था। इसके बाद मैंने यह दर्शाने के लिए विभिन्न सांद्रता की विभिन्न मात्राओं को मिश्रित किया कि उस समय क्या होता है? जब पानी के विभिन्न आयतन विभिन्न तापमानों पर मिश्रित किये जाते हैं। प्रत्येक बार मैंने विद्यार्थियों से उनका पूर्वानुमान बताने के लिए कहा और अपने पास बैठे विद्यार्थी के साथ बात करने के लिए उन्हें समय दिया।

विद्यार्थियों ने इसे पसंद किया और इस बारे में पूर्वानुमान लगाने का आनंद लिया कि रंग का क्या होगा? ऐसा जान पड़ा मानो पूर्वानुमान लगाना उनके लिए आसान था और वही गलतियाँ नहीं कीं, जो कि उन्होंने पहले की थीं।

एक बार उनके प्रदर्शन को देखने के बाद मैंने उनसे उनकी व्यावहारिक खोज के परिणामों पर चर्चा करने और उसकी व्याख्या करने और इस बात का पूर्वानुमान लगाने के लिए कहा कि मेरे द्वारा उन्हें दी गयी अन्य स्थितियों में क्या होगा? मैं इस बात को देख सकता था कि ऊष्मा और तापमान के बारे में बेहतर समझ हासिल करने में इस गतिविधि ने उनकी मदद की थी। इसने ऊष्मा और तापमान के बारे में उनके विचारों को बदल दिया था।

श्री मिश्रा का मॉडल उनके विद्यार्थियों की ऊष्मा और तापमान को समझने में मदद करता जान पड़ा। उन्होनें तापमान की जगह पर रंग की सघनता को रखकर उसकी अमूर्त अवधारणा को ज्यादा ठोस बना दिया। विद्यार्थी परिणामी ‘तापमान’ को देख सकते थे। इसने उनकी मात्रात्मक समझ को विकसित करने के लिए आगे बढ़ने से पहले गुणात्मक समझ को हासिल करने में मदद की।

विचार के लिए रुकें

  • आप इस बात को स्पष्ट करने के लिए किस प्रकार से श्री मिश्रा जी के मॉडल का उपयोग कर सकते हैं कि गर्म चाय के प्याले की तुलना में बर्फ के पहाड़ में ज्यादा तापीय ऊर्जा (ऊष्मा) होती है।
  • इसके पहले सूचीबद्ध वैकल्पिक संकल्पनाओं में से किसको इस मॉडल का उपयोग करके संपर्क किया जा सकता है?
  • इस मॉडल की सीमाएं या खतरे क्या हैं?
  • क्या ऐसी कोई वैकल्पिक संकल्पनाएं हैं, जिसे कि यह मॉडल अनजाने में बल प्रदान कर सकता है?

उपमाओं और मॉडलों का उपयोग करते समय आपको अवश्य ही उनकी सीमाओं और वैकल्पिक संकल्पनाओं को बल प्रदान करने की संभावना के प्रति सजग रहना होगा। श्री मिश्रा द्वारा उपयोग में लाया गया डाई मॉडल इस विचार को बल प्रदान कर सकता है कि ऊष्मा एक ऐसा पदार्थ है, जो कि प्रवाहित होता है। यह स्थिर निरूपण होने के द्वारा भी सीमित है। गर्म तरल पदार्थ ठंडा हो जाएगा, लेकिन डाई मॉडल में इसे दर्शाया नहीं गया है। इन सीमाओं से निपटने का सर्वश्रेष्ठ तरीका विद्यार्थियों से यह पूछना है कि यह मॉडल अच्छा मॉडल क्यों नहीं है? और यह किस चीज़ को दर्शाता है। इस बात को भी ध्यान में रखें कि श्री मिश्रा ने विद्यार्थियों के सामने पानी में डाई नहीं मिलाई, इससे इस विचार को बल मिला होता कि ऊष्मा एक पदार्थ है।

गतिविधि 3: ऊष्मा और तापमान के बारे में पढ़ाना

अब आप ऊष्मा और तापमान के बीच अंतर को अपने विद्यार्थियों की समझ को विकसित करने के क्रम में उन्हें पढ़ाने जा रहे हैं। अपनी योजना की शुरुआत करने से पहले आपको संसाधन 4 को पढ़ना चाहिए। इससे आपको इस बात का निर्णय लेने में मदद मिलेगी कि क्या करना है? आपको इन कदमों के बाद गतिविधि के लिए योजना बनाने की ज़रूरत है, लेकिन शुरुआत करने से पूर्व प्रमुख संसाधन ‘पाठ योजना बनाना’, को पढ़ें, जो कि योजना बनाने में प्रमुख चरणों को सार रूप में व्यक्त करता है और नियोजन के महत्व की समझ प्रदान करता है। आपको इन कदमों के बाद गतिविधि के लिए योजना बनाने की ज़रूरत है–

  • इस उद्देश्य की पहचान करें कि आप क्या चाहते हैं? कि आपके विद्यार्थी इस गतिविधि से क्या सीखें? और आप किन वैकल्पिक संकल्पनाओं पर ध्यान केंद्रित करेंगे?
  • इस बात का निर्णय करें कि आप उनकी वैकल्पिक संकल्पनाओं को किस प्रकार से चुनौती देंगे या नये विचारों को प्रस्तुत करेंगे। उदाहरण के लिए, आप बर्फीले पानी का तापमान माप सकते हैं, मोमबत्ती से पानी को गर्म कर सकते हैं और यह पूछ सकते हैं कि ऊष्मा कहां चली गयी, जबकि पानी अभी भी ठंडा है।
  • उन उपकरणों और सामग्रियों की सूची बनायें जिनकी कि आपको ज़रूरत पड़ेगी।
  • इस बात का निर्णय करें कि आप किस प्रकार से गतिविधि को क्रियान्वित करेंगे। इस गतिविधि को कक्षा में प्रयोग करके या प्रदर्शन विधि द्वारा करा सकते हैं।
  • इस बात का निर्णय करें कि क्या आप चाहते हैं? कि विद्यार्थी जोड़ियों में, समूहों में या अलग-अलग कार्य करें।
  • इस बात का निर्णय करें कि आप उन विद्यार्थियों की सहायता कैसे करेंगे, जिन्हें अपनी पढ़ाई में ज्यादा मदद की ज़रूरत है।
  • आप जिन विचारों को पढ़ाना चाहते हैं उन्हें किस प्रकार स्पष्ट करेंगे, की योजना बनाएं। क्या आपकी व्याख्या मॉडल या उपमा का उपयोग करेगी? उदाहरण के लिए, आप यह दर्शाने के लिए डाई मॉडल का उपयोग कर सकते हैं कि ठंडी वस्तुओं में भी तापीय ऊर्जा होती है।

  • नये विचारों को सुदृढ़ बनाने के लिए आपके विद्यार्थी उनके साथ क्या करेंगे? क्या वे नये संदर्भों पर बात–चीत करेंगे और उन्हें लागू करेंगे? या क्या वे दूसरे उदाहरणों पर बात–चीत करेंगे? उदाहरण के लिए, आप उन्हें कुछ सही या गलत प्रश्न दे सकते हैं।

आपके द्वारा पढ़ाये जाने वाले विज्ञान के बहुत से पाठ में अधिकतर विद्यार्थियों के पास स्वयं की वैकल्पिक संकल्पनाएं, मान्यताएं या सिद्धांत होंगे। इसलिए आपको उन विचारों को सुनने की ज़रूरत पड़ेगी, जो कि आपके विद्यार्थियों में विज्ञान के बारे में पहले से बना रखी है। आप उनके विचारों को प्रकट करने और उन पर चर्चा करने के अवसर प्रदान कर सकते हैं। जब आप अपने पाठ की योजना बनाते हैं, तो इन विचारों के लिए सही समाधान हो।

6 सारांश

इस इकाई के द्वारा आपको वैकल्पिक संकल्पनाओं के बारे में जानकारी है और उन संकल्पनाओं के उदाहरणों का परीक्षण किया है, जो कि ऊष्मा और तामपान के बारे में पूर्व निर्धारित विचार हैं। ये वैकल्पिक संकल्पनाएं केवल विद्यार्थियों तक सीमित नहीं होती हैं। आप पाएंगे कि ऐसे बहुत से वयस्क लोग हैं, जिनके विचार वैज्ञानिक रूप से स्वीकृत विचारों से भिन्न होते हैं। ऐसे बहुत से तरीके होते हैं, जिन्हें अपनाकर आप इस बात का पता लगा सकते हैं कि आपके विर्द्याथियों के क्या विचार हैं? क्योंकि परीक्षा के परंपरागत प्रश्न अक्सर विद्यार्थियों की अवधारणात्मक समझ को प्रकट नहीं करते हैं।

अपने विद्यार्थियों की वैकल्पिक संकल्पनाओं को बदलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि उन्हें छोड़ना और बदलना विद्यार्थियों के लिए कठिन हो सकता है। एक दृष्टिकोण यह हो सकता है कि विज्ञान की गहराई में जाएं और दिखाएं की किस तरह वैज्ञानिक ज्ञान और सिद्धांत समय के साथ विकसित हुए हैं। यह प्रमाण हासिल करने और विभिन्न अवलोकनों के लिए विभिन्न व्याख्याओं के द्वारा होता है। इसलिए, इस प्रकार से विज्ञान को पढ़ाने से युवा विज्ञानी बनने में आपके विद्यार्थियों को मदद मिलने के साथ-साथ उनकी वैज्ञानिक समझ भी विकसित होती है।

संसाधन

संसाधन 1: ऊष्मा और तापमान सही या गलत प्रश्नोत्तरी

तालिका आर 1.1 के प्रत्येक कथन को पढ़ें और इस बात का निर्णय करें कि आपको यह सही लगता है या गलत। अगर आप विश्वास से कुछ नहीं कह सकते, तो ‘पता नहीं’ खाने पर सही का निशान लगाएं।

तालिका आर 1.1 ऊष्मा और तापमान सही या गलत प्रश्नोत्तरी।
कथनसहीगलतपता नहीं
1ऊष्मा वस्तु में ऊर्जा की कुल मात्रा है।
2समस्त वस्तुओं में ऊष्मा होती है।  
3तापीय ऊर्जा का वही अर्थ होता है, जो ऊष्मा का होता है।
4ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है।
5तापमान ऊष्मा को मापता है।
6तापमान और गर्मी एक ही शब्द हैं।
7बर्फ के टुकड़े में गर्म चाय के प्याले के मुकाबले अधिक ऊष्मा होती है।
8ऊष्मा वह ऊर्जा होती है, जो कि वस्तुओं के बीच तापमान में अंतर के कारण उनके बीच हस्तांतरित होती है।
9‘गर्म’ और ‘ठंडा’ वे शब्द हैं, जो कि वस्तु के तामपान को बताते हैं।
10‘गर्म’ और ‘ठंडा’ वे शब्द हैं, जो कि ऊष्मीय ऊर्जा की उस मात्रा का वर्णन करते हैं, जो कि पदार्थ में होती है।
11पानी और हवा की तरह ऊष्मा एक पदार्थ है, जो कि वस्तुओं के अंदर होती है और बाहर निकलता है।
12गर्म का विलोम ठंडा है।
13केवल गर्म वस्तुओं में ऊष्मा होती है।
14ऊष्मा के विभिन्न प्रकार होते हैं, जैसे कि प्राकृतिक ऊष्मा और सामान्य ऊष्मा।
15कुछ पदार्थ दूसरों के मुकाबले ज्यादा ठंडे होते हैं और इसकी वजह उनके निर्मित होने में लगी वस्तुएं होती हैं, उदाहरण के लिए फर्श की टाइलें और धातु।
16जब समान तापमान के दो कप में ठंडे पानी को मिश्रित किया जाता है तो पानी दोगुना ठंडा हो जाएगा।
17थर्मामीटर का उपयोग ऊष्मा को मापने के लिए किया जाता है।
180°C पर बर्फीले पानी का तापमान उस समय नीचे चला जाएगा जब और अधिक बर्फ मिलायी जाएगी।

संसाधन 2: प्रगति और कार्य प्रदर्शन का आकलन करना

विद्यार्थियों के सीखने का मूल्यांकन करने के दो उद्देश्य हैं–

  • योगात्मक मूल्यांकन पीछे मुड़ कर देखता है और जो पहले से सीखा गया है उसका निर्णय करता है। यह सामान्यतया परीक्षाओं के स्वरूप में आयोजित किया जाता है, जहाँ विद्यार्थियों को परीक्षा में प्रश्नों के प्रति उनकी उपलब्धियों को बताते हुए श्रेणीकृत किया जाता है। इससे परिणामों की रिपोर्टिंग में मदद मिलती है।
  • निर्माणात्मक मूल्यांकन (या शिक्षण का मूल्यांकन) काफ़ी अलग है, जो अधिक अनौपचारिक स्वरूप का होता है। शिक्षक उन्हें शिक्षण प्रक्रिया के अंग के रूप में उपयोग करते हैं, उदाहरण के लिए, जहाँ यह पता लगाने के लिए प्रश्न पूछने का इस्तेमाल किया जाता है कि क्या विद्यार्थियों ने किसी चीज़ को समझा है या नहीं। इस मूल्यांकन के परिणामों का फिर अगले शिक्षण अनुभव को बदलने के लिए उपयोग किया जाता है। निगरानी और फ़ीडबैक निर्माणात्मक मूल्यांकन का हिस्सा है।

निर्माणात्मक मूल्यांकन शिक्षा-प्राप्ति को बढ़ाता है, क्योंकि सीखने के लिए, अधिकांश विद्यार्थियों को:

  • समझना चाहिए कि उनसे क्या सीखने की उम्मीद की जा रही है?
  • जानना चाहिए कि अपनी पढ़ाई में वे इस समय किस स्तर पर हैं?
  • समझना चाहिए कि विद्यार्थी किस प्रकार प्रगति कर सकते हैं? (अर्थात् क्या पढ़ना चाहिए? और कैसे पढ़ना चाहिए?)
  • जानना चाहिए कि कब विद्यार्थियों ने लक्ष्य और आपेक्षित परिणाम हासिल कर लिए हैं?

शिक्षक के रूप में, अगर आप प्रत्येक पाठ में उपर्युक्त चार बिंदुओं पर ध्यान देंगे, तो आप अपने विद्यार्थियों से सर्वश्रेष्ठ परिणाम प्राप्त करेंगे। इस प्रकार पढ़ाने से पहले, पढ़ाते समय और पढ़ाने के बाद मूल्यांकन किया जा सकता है:

  • पहले: पढ़ाने से पहले मूल्यांकन से आपको यह जानने में मदद मिलती है कि विद्यार्थी क्या जानते हैं और पढ़ाने से पहले क्या कर सकते हैं। यह आधार-रेखा निर्धारित करता है और आपको अपनी शिक्षण योजना तैयार करने के लिए प्रारंभिक बिंदु देता है। विद्यार्थी क्या जानते हैं? इस बारे में अपनी समझ को बढ़ाने से, विद्यार्थियों को जिसमें पहले से ही पारंगत है, उसे दोबारा पढ़ाने या संभवतः उन्हें जो जानना या समझना है (लेकिन नहीं जानते), उसे छोड़ने के मौक़े कम होंगे।
  • पढ़ाते समय: कक्षा में पढ़ाते समय मूल्यांकन करने में यह देखना शामिल है कि क्या विद्यार्थी सीख रहे हैं? और उनमें सुधार हो रहा है। इससे आपको अपनी शिक्षण पद्धति, संसाधनों और गतिविधियों का समायोजन करने में मदद मिलेगी। आपको यह समझने में मदद करेगा कि विद्यार्थी वांछित उद्देश्य की दिशा में किस प्रकार प्रगति कर रहा है और आपका शिक्षण कितना सफल है?
  • पढ़ाने के बाद: शिक्षण के बाद किया जाने वाला मूल्यांकन पुष्टि करता है कि विद्यार्थियों ने क्या सीखा है? और आपको दर्शाता है कि किसने सीखा है और किसे अभी मदद की ज़रूरत है। इससे आप अपने शिक्षण लक्ष्यका प्रभावी आकलन कर सकेंगे।

पहले: आपके विद्यार्थी क्या सीखेंगे? इस बारे में स्पष्ट रहना।

जब आप तय करते हैं कि विद्यार्थियों को पाठ या पाठों की श्रृंखला में क्या सीखना चाहिए, तो आपको उसे उनके साथ साझा करना चाहिए। सावधानी से अंतर करें कि विद्यार्थियों को आप क्या करने के लिए कह रहे हैं, और विद्यार्थियों से क्या सीखने की उम्मीद की जा रही है? ऐसा प्रश्न पूछिये जिससे कि आपको इस बात का आकलन करने का अवसर प्राप्त हो कि क्या उन्होंने वास्तव में समझा है या नहीं। उदाहरण के लिए–

विद्यार्थियों को जवाब देने से पहले सोचने के लिए कुछ समय दें, विद्यार्थियों को पहलेया छोटे समूहों में अपने जवाब पर बात–चीत करने के लिए कहें। जब वे आपको अपना उत्तर बताएँ, आप जान जाएँगे कि क्या वे समझते हैं? कि उन्हें क्या सीखना है

पहले: जानना कि विद्यार्थी अपने शिक्षण के किस स्तर पर हैं?

आपके विद्यार्थियों में सुधार के लिए मदद करने के क्रम में आपको उनके ज्ञान और समझदारी की वर्तमान अवस्था को जानने की ज़रूरत पड़ेगी। जैसे ही आप वांछित शिक्षण परिणामों या लक्ष्यों को साझा कर लें, आप निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं–

  • विद्यार्थियों को मानसिक मानचित्र बनाने या उस विषय के बारे में वे पहले से क्या जानते हैं, उसे सूचीबद्ध करने के लिए जोड़ियों में कार्य करने के लिए कहें, और उन्हें उसे पूरा करने के लिए पर्याप्त समय दें, लेकिन उन चंद विचारों के लिए बहुत ज्यादा समय नहीं देना चाहिए। उसके बाद आप उन मानसिक मानचित्र या सूचियों की समीक्षा करें।
  • महत्वपूर्ण शब्दावली को बोर्ड पर लिखें और प्रत्येक शब्द के बारे में वे क्या जानते हैं? यह बताने के लिए स्वेच्छा से उन्हें आगे आने के लिए कहें। फिर बाक़ी कक्षा से कहें कि यदि वे शब्द समझते हैं, तो अपना अंगूठा ऊपर उठाएँ, यदि वे बहुत कम जानते हैं या बिल्कुल नहीं जानते हैं, तो नीचे करें और यदि वे कुछ जानते हैं, तो अंगूठे को क्षैतिज यानी बीच में रखें।

कहाँ से शुरुआत करनी है, यह जानने का मतलब है कि आप अपने विद्यार्थियों के लिए प्रासंगिक और रचनात्मक रूप से पाठ की योजना बना सकते हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि आपके विद्यार्थी यह मूल्यांकन करने में सक्षम हों कि वे कितनी अच्छी तरह सीख रहे हैं, ताकि आप और वे, दोनों जान सकें कि उन्हें आगे क्या सीखने की ज़रूरत है। आपके विद्यार्थियों को स्वयं अपने शिक्षण का भार उठाने का अवसर प्रदान करने से उन्हें आजीवन शिक्षार्थी बनाने में मदद मिलेगी।

पढ़ाते समय: शिक्षा में विद्यार्थियों की प्रगति सुनिश्चित करना

जब आप विद्यार्थियों से उनकी वर्तमान प्रगति के बारे में बात करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि उन्हें आपका फीडबैक उपयोगी और रचनात्मक, दोनों लगे। निम्नांकित के द्वारा इस काम को करें–

  • विद्यार्थियों को यह जानने में मदद करना कि उनके मजबूत पक्ष कौन से है? वे कैसे इनमें सुधार कर सकते हैं?
  • इस बारे में स्पष्ट रहना कि आगे और किस चीज़ के विकास की ज़रूरत है?
  • इस बारे में सकारात्मक रहना कि विद्यार्थी किस प्रकार सीखने की क्षमता का विकास कर सकते हैं, इसका ध्यान रखना कि आपकी सलाह का उपयोग करने में सहज महसूस करते हैं।

आपको विद्यार्थियों के लिए उनके शिक्षण को बेहतर बनाने के लिए अवसर उपलब्ध कराने की ज़रूरत पड़ेगी। इसका अर्थ यह हुआ कि पढ़ाई के मामले में विद्यार्थियों के वर्तमान स्तर और जहाँ आप उन्हें देखना चाहते हैं, इसके बीच के अंतराल को भरने के लिए हो सकता है कि आपको अपनी पाठ योजना को संशोधित करना पड़े। ऐसा करने के लिए आपको निम्नलिखित कार्य करना होगा–

  • कुछ ऐसे कार्य पर वापस नज़र दौड़ाना होगा, जिनके बारे में आपने सोचा था कि वे पहले से जानते हैं
  • आवश्यकता के अनुसार विद्यार्थियों के समूह बनाना, उन्हें अलग-अलग कार्य देना
  • विद्यार्थियों को स्वयं यह निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करना कि उन्हें किन संसाधनों को पढ़ने की ज़रूरत है जिससे वे ‘स्वयं अपना अंतराल भर सकें’
  • ‘निम्न प्रवेश, ऊँची सीमा’ वाले कार्यों का उपयोग करना, ताकि सभी विद्यार्थी प्रगति कर सकें - इन्हें इसलिए अभिकल्पित किया गया है कि सभी विद्यार्थी काम शुरू कर सकें, लेकिन अधिक समर्थ को प्रतिबंधित न किया जाए और वे अपने ज्ञान के विस्तार के लिए प्रगति कर सकें।

पाठों की रफ्तार को धीमा करके, अक्सर आप शिक्षण को तेज़ करते हैं, क्योंकि आप विद्यार्थियों को उस पर सोचने और समझने का समय और आत्मविश्वास देते हैं, जिसमें उन्हें सुधार लाने की ज़रूरत होती है। विद्यार्थियों को आपस में अपने काम के बारे में बात करने का मौक़ा देकर, और इस बात पर चिंतन करके कि अंतराल कहाँ पर है? और वे इसे किस प्रकार से ख़त्म कर सकते हैं? आप उन्हें स्वयं का आकलन करने के तरीक़े उपलब्ध करा रहे हैं।

पढ़ाने के बाद: प्रमाण एकत्रित करना और उसकी व्याख्या करना, और आगे की योजना बनाना

जब शिक्षण–अधिगम (सीखना) चल रहा हो और कक्षा-कार्य और गृह-कार्य निर्धारित करने के बाद, ज़रूरी है कि:

  • इस बात का पता लगाएँ कि आपके विद्यार्थी कितनी अच्छी तरह कार्य कर रहे हैं
  • इसे अगले पाठ के लिए अपनी योजना बनाने के लिए उपयोग में लाएँ
  • विद्यार्थियों को फीडबैक दें।

मूल्यांकन की चार प्रमुख स्थितियों की नीचे चर्चा की गई है।

सूचना या प्रमाण एकत्रित करना

प्रत्येक विद्यार्थी, स्वयं अपनी गति और शैली में, स्कूल के अंदर और बाहर अलग प्रकार से सीखता है। इसलिए, विद्यार्थियों का मूल्यांकन करते समय आपको दो चीज़ें करनी होंगी–

  • विविध सूत्रों से जानकारी एकत्रित करें - स्वयं अपने अनुभव से, विद्यार्थी, अन्य विद्यार्थियों, अन्य शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के सदस्यों से।
  • विद्यार्थियों का व्यक्तिगत रूप से, जोड़ियों में और समूहों में मूल्यांकन करें, तथा स्व-मूल्यांकन को बढ़ावा दें। अलग विधियों का प्रयोग महत्वपूर्ण है, क्योंकि कोई एक पद्धति आपके वह सभी जानकारी उपलब्ध नहीं कराती, जिसकी आपको ज़रूरत है। विद्यार्थियों के सीखने और प्रगति के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के विभिन्न तरीक़ों में शामिल हैं, देखना, सुनना, पाठों और प्रकरणों पर चर्चा, तथा लिखित कार्य और गृह-कार्य की समीक्षा करना।

अभिलेखन

भारत भर के सभी स्कूलों में रिकॉर्डिंग का सबसे आम स्वरूप रिपोर्ट कार्ड के उपयोग के माध्यम से होता है, लेकिन इसमें आपको एक विद्यार्थी के सीखने या व्यवहार के सभी पहलुओं को रिकॉर्ड करने की अनुमति नहीं हो सकती है। इस काम को करने के कुछ सरल तरीक़े हैं, जिन पर भी आप विचार कर सकते हैं, जैसे कि–

  • शिक्षण–अधिगम (सीखने) के समय जो आप देखते हैं उसे डायरी/नोटबुक/रजिस्टर में रिकार्ड करना।
  • विद्यार्थियों के कार्य के नमूने (लिखित, कला, शिल्प, परियोजनाएँ, कविताएँ आदि) प्रोफाइल में रखना।
  • प्रत्येक विद्यार्थी का प्रोफ़ाइल तैयार करना।
  • विद्यार्थियों की किन्हीं असामान्य घटनाओं, परिवर्तनों, समस्याओं, शक्तियों और शिक्षण प्रमाणों को रिकार्ड करना।

प्रमाण की व्याख्या

जैसे ही सूचना और प्रमाण एकत्रित और अभिलिखित हो जाए, उसकी व्याख्या करना ज़रूरी है, जिससे यह समझ सकें कि प्रत्येक विद्यार्थी किस प्रकार सीख रहा है? और प्रगति कर रहा है। इस पर सावधानी से विचार करने और विश्लेषण की आवश्यकता है। फिर आपको शिक्षण में सुधार करने, संभवतः विद्यार्थियों को फ़ीडबैक देकर या नए संसाधनों की खोज करके, समूहों को पुनर्व्यवस्थित करके, या शिक्षण बिंदु को दोहरा कर अपने निष्कर्षों पर कार्य करने की आवश्यकता है।

सुधार के लिए योजना बनाना

मूल्यांकन, विशिष्ट और विभेदक शिक्षण गतिविधियों की स्थापना द्वारा प्रत्येक विद्यार्थी को सार्थक रूप से सीखने के अवसर प्रदान करने, ज़रूरतमंद विद्यार्थियों पर ध्यान देने और अधिक उन्नत विद्यार्थियों को चुनौती देते हुए सार्थक शिक्षण अवसर उपलब्ध कराने में आपकी मदद कर सकते हैं।

संसाधन 3: निगरानी करना और फीडबैक देना

विद्यार्थियों के कार्यप्रदर्शन में सुधार करने में लगातार निगरानी करना और उन्हें फीडबैक देना शामिल होता है, जिससे उन्हें पता रहे कि उनसे क्या अपेक्षित है? और उन्हें कार्यों को पूरा करने पर फीडबैक प्राप्त हो। आपकी रचनात्मक फीडबैक के माध्यम से विद्यार्थी अपने कार्य प्रदर्शन में सुधार कर सकते हैं।

निगरानी करना

प्रभावी शिक्षक अधिकांश समय अपने विद्यार्थियों की निगरानी करते हैं। सामान्य तौर पर, अधिकांश शिक्षक अपने विद्यार्थियों के काम की निगरानी वे कक्षा में जो कुछ करते हैं उसे सुनकर और देखकर करते हैं। विद्यार्थियों की प्रगति की निगरानी करना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे उन्हें निम्नलिखित में मदद मिलती है–

  • अधिक ऊँचे ग्रेड प्राप्त करना।
  • अपने कार्य प्रदर्शन के बारे में अधिक सजग रहना और अपनी सीखने की प्रक्रिया के प्रति अधिक जिम्मेदार होना।
  • सीखने की प्रक्रिया में सुधार करना।
  • प्रादेशिक और स्थानीय मानकीकृत परीक्षाओं में उपलब्धि का पूर्वानुमान करना।

इससे आपको एक शिक्षक के रूप में निम्नलिखित तैयारी करने में भी मदद मिलती है–

  • कब प्रश्न पूछें या प्रोत्साहित करें?
  • कब प्रशंसा करें?
  • चुनौती दें या नहीं?
  • एक कार्य में विद्यार्थियों के अलग अलग समूहों को कैसे शामिल करें।
  • गलतियों के सम्बन्ध में क्या करें?

विद्यार्थी सबसे अधिक सुधार तब करते हैं जब उन्हें उनकी प्रगति के बारे में स्पष्ट और शीघ्र फीडबैक दी जाती है। निगरानी करने से आपको विद्यार्थियों को बताने में सुविधा होगी कि वे कैसे काम कर रहे हैं? और उनके सीखने की प्रकिया को सुधार करने में उन्हें किस अन्य चीज की जरूरत है इस बारे में समय–समय पर फीडबैक देना ठीक होगा।

आपके सामने आने वाली चुनौतियों में से एक चुनौती यह भी आप विद्यार्थियों को स्वयं के सीखने के लक्ष्य को तय करने में मदद करना, जिसे स्व-निगरानी भी कहा जाता है। विद्यार्थी, विशेष तौर पर, कठिनाई अनुभव करने वाले विद्यार्थी, अपनी स्वयं की सीखने की प्रक्रिया का बोझ उठाने के आदी नहीं होते हैं। लेकिन आप किसी परियोजना के लिए अपने स्वयं के लक्ष्य या उद्देश्य तय करने, अपने काम की योजना बनाने और समय सीमाएं तय करने और अपनी प्रगति की स्व-निगरानी करने में किसी भी विद्यार्थी की मदद कर सकते हैं। स्व-निगरानी के कौशल की प्रक्रिया का अभ्यास और उसमें विशिष्टता प्राप्त करना उनके स्कूल और उनके सारे जीवन में उपयोगी साबित होगा।

विद्यार्थियों की बात सुनना और प्रेक्षण करना

अधिकांश समय, शिक्षक स्वाभाविक रूप से विद्यार्थियों की बात सुनते और उनका अवलोकन करते हैं। यह निगरानी करने का एक सरल साधन है। उदाहरण के लिए, आप:

  • अपने विद्यार्थियों को ऊँची आवाज में पढ़ते समय सुन सकते हैं
  • जोड़ियों या समूहकार्य में बात–चीत में सुन सकते हैं
  • विद्यार्थियों को कक्षा के बाहर या कक्षा में संसाधनों का उपयोग करते देख सकते हैं
  • समूहों को काम करते समय उनकी शारीरिक भाषा का अवलोकन कर सकते हैं।

यह सुनिश्चित करें कि आप जो विचार एकत्रित करते हैं वे विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया या प्रगति का सच्चा प्रमाण हो। सिर्फ वही बात रिकार्ड करें जो आप देख सकते हैं, सुन सकते हैं, सिद्ध कर सकते हैं या जिस पर आप विश्वास कर सकते हैं।

जब विद्यार्थी काम करें, तब कमरे में घूमें और संक्षिप्त प्रेक्षण रिकार्ड बनाएं। आप कक्षा सूची का उपयोग करके रिकार्ड कर सकते हैं कि किन विद्यार्थियों को अधिक मदद की जरूरत है, और किसी भी उभरती गलतफहमी को भी रिकार्ड कर सकते हैं। इन प्रेक्षणों और रिकार्ड का उपयोग आप सारी कक्षा को फीडबैक देने या समूहों अथवा व्यक्ति विशेष को प्रेरित और प्रोत्साहित करने के लिए कर सकते हैं।

फीडबैक देना

फीडबैक वह जानकारी होती है जो आप किसी विद्यार्थी को यह बताने के लिए देते हैं कि उन्होंने किसी घोषित लक्ष्य या अपेक्षित परिणाम के संबंध में कैसा कार्य किया है? प्रभावी फीडबैक विद्यार्थी को:

  • जानकारी देती है कि क्या हुआ है?
  • इस बात का मूल्यांकन बताती है कि कोई कार्यवाही या काम कितनी अच्छी तरह से किया गया?
  • यह मार्गदर्शन देती है कि कार्य प्रदर्शन को कैसे सुधारा जा सकता है?

जब आप प्रत्येक विद्यार्थी को फीडबैक देते हैं, तब उसे यह जानने में उनकी मदद करनी चाहिए कि–

  • वे वास्तव में क्या कर सकते हैं?
  • वे अभी क्या नहीं कर सकते हैं?
  • उनका काम अन्य लोगों की तुलना में कैसा है?
  • वे कैसे सुधार कर सकते हैं?

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि प्रभावी फीडबैक विद्यार्थियों की मदद करती है। आप नहीं चाहते कि आपकी फीडबैक के अस्पष्ट या अन्यायपूर्ण होने के कारण सीखने की प्रक्रिया में कोई रूकावट आए। प्रभावी फीडबैक–

  • विद्यार्थी को दिया गया कार्य और विद्यार्थी द्वारा सीखी जा रही बात पर संकेंद्रित होती है।
  • स्पष्ट और ईमानदार होती है, और विद्यार्थी को बताती है कि उसके सीखने की प्रक्रिया के बारे में क्या अच्छी बात है और उसे कहाँ सुधार करना चाहिए।
  • कार्यवाही के योग्य होती है, और विद्यार्थी को ऐसा कुछ करने को कहती है जिसे करने में वे सक्षम होते हैं।
  • विद्यार्थी के समझ सकने योग्य उपयुक्त भाषा में दी जाती है।
  • सही समय पर दी जाती है – यदि वह बहुत जल्दी दी गई तो विद्यार्थी सोचेगा ‘मैं यही तो करने जा रहा था।’ बहुत देर से दी गई तो विद्यार्थी का ध्यान और कहीं चला जाएगा और वह वापस लौटकर वह नहीं करना चाहेगा जिसके लिए उसे कहा गया है।

फीडबैक चाहे बोला जाए या विद्यार्थियों की कार्य–पुस्तिका में लिखा जाए, वह तभी अधिक प्रभावी होती है यदि वह नीचे दिए गए दिशा–निर्देशों का पालन करती है।

प्रशंसा और सकारात्मक भाषा का उपयोग करना

जब हमारी प्रशंसा की जाती है और हमें प्रोत्साहित किया जाता है तो आमतौर पर हम उस समय के मुकाबले काफी बेहतर महसूस करते हैं, जबकि हमारी आलोचना की जाती है या हमारी गलती सुधारी जाती है। सुदृढ़ीकरण और सकारात्मक भाषा पूरी कक्षा और सभी आयु के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक होती है। याद रखें कि प्रशंसा को विशिष्ट और विद्यार्थी की बजाय किए गए काम पर लक्षित होना चाहिए, अन्यथा वह विद्यार्थी की प्रगति में मदद नहीं करेगी। ‘शाबाश’ अविशिष्ट शब्द है, इसलिए निम्नलिखित में से कोई बात कहना बेहतर होगा–

संकेत देने के साथ-साथ सुधार करना

अपने विद्यार्थियों के साथ आप जो बातचीत करते हैं वह उनके सीखने की प्रक्रिया में मदद करती है। यदि आप उन्हें बताते हैं कि उनका उत्तर गलत है और संवाद को वहीं समाप्त कर देते हैं, तो आप सोचने और स्वयं प्रयास करने में उनकी मदद करने का अवसर खो देते हैं। यदि आप विद्यार्थियों को संकेत देते हैं या आगे कोई प्रश्न पूछते हैं, तो आप उन्हें अधिक गहराई से सोचने को प्रेरित करते हैं और उत्तर खोजने तथा अपने स्वयं के सीखने का दायित्व लेने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते हैं। उदाहरण के लिए, आप बेहतर उत्तर के लिए प्रोत्साहित या किसी समस्या पर किसी अलग दृष्टिकोण को प्रेरित करने के लिए निम्नलिखित बातें कह सकते हैं–

दूसरे विद्यार्थियों को एक दूसरे की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना उपयुक्त हो सकता है। आप यह काम निम्नलिखित जैसी टिप्पणियों के साथ शेष कक्षा के लिए अपने प्रश्नों को प्रस्तुत करके कर सकते हैं:

विद्यार्थियों को हां या नहीं के साथ सुधारना स्पेलिंग या संख्या के अभ्यास की तरह के कामों के लिए उपयुक्त हो सकता है, लेकिन यहां पर भी आप विद्यार्थियों को उभरते प्रतिमानों पर नजर डालने या समान उत्तरों से संबंध बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं या बात–चीत शुरू कर सकते हैं कि कोई उत्तर गलत क्यों है।

स्वयं सुधार करना और अपने साथियों से सुधार करवाना प्रभावी होता है। एक समय में एक पहलू को सही करने पर ध्यान केंद्रित करना सबसे अच्छा होता है जिससे गलतफहमियों में डालने वाली ढेर सारी जानकारी न हो।

संसाधन 4: समझ विकसित करना

वैकल्पिक गलतफहमी धारणाओं को बदलना कठिन हो सकता है और वे विज्ञान की सार्थक पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न कर सकती हैं। इसलिए आपको जो काम करने की ज़रूरत है, वह यह है कि इस तरह से पढ़ाया जाए जिससे कि आपके विद्यार्थियों को अपने ‘त्रुटिपूर्ण’ विचारों को पुनर्निमित करने और अपनी अवधारणात्मक समझ को बदलने में मदद मिले। सांगेर और ग्रीनबोव (2000) ने ‘नये विचारों को समायोजित करने के क्रम में मौजूदा गलतफहमियों धारणाओं’ को फिर से बनाने, पुनर्गठित करने और पुनःस्थापित करने के लिए अवधारणात्मक परिवर्तन को वर्णित किया (2000, पी. 522)।

पढ़ाई बस आवश्यक रूप से मौजूदा विचारों और सिद्धांतों में नयी जानकारी को जोड़ने का ही मामला नहीं होता है। मौजूदा विचारों के विखंडन और उनकी जगह लेने के लिए नये विचारों को बनाने की आवश्यकता पड़ सकती है। खासकर विज्ञान में ऐसा होता है। Vosniadou et al। (2001) ने इस बात का उल्लेख किया कि भौतिक परिघटना की वैज्ञानिक व्याख्या प्रायः सहज नहीं होती और हमारे रोजमर्रा के अनुभव के विपरीत होती है।

शिक्षक किस प्रकार से विद्यार्थियों की वैज्ञानिक समझ को विकसित कर सकते हैं और उनकी वैकल्पिक संकल्पनाओं को बदल सकते हैं इस बारे में ढेर सारा अनुसंधान साहित्य उपलब्ध है। उन्हें इसके बारे में बस जानकारी प्रदान करना बहुत से मामलों में असफल रहा है। विद्यार्थियों की वैकल्पिक संकल्पनाएं नये विचारों की पढ़ाई में व्यवधान उत्पन्न करती हैं और वे दूसरी ओर ले जा सकती हैं। ऐसे कुछ प्रमुख दृष्टिकोण जिनका कि आप उपयोग कर सकते हैं, नीचे सूचीबद्ध हैं।

  • संज्ञानात्मक संघर्ष उस समय उत्पन्न होता है जबकि आप ऐसे प्रमाण का अनुभव करते हैं, जो कि आपके मौजूदा विचारों के साथ टकराता है और उन पर से विश्वास को खत्म कर देता है। उदाहरण के लिए, अगर आप इस विचार को मानते हैं कि बर्फ पानी को उस समय भी ठंडा बनाती है जबकि वह 0°C पर होता है तो ऐसा प्रमाण उपलब्ध कराना आसान है जो कि इसका विरोध करे। आपको संज्ञानात्मक संघर्ष की घटनाओं का सावधानीपूर्वक उपयोग करने की ज़रूरत है। ऐसे टकरावपूर्ण प्रमाण को उपलब्ध कराना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है जिसके फलस्वरूप विचारों से असंतोष उत्पन्न होता है। उस दशा में इन विचारों के स्थान पर रखने के लिए किसी चीज़ की ज़रूरत पड़ती है, यदि विद्यार्थी को दिग्भ्रमित और वापस उसके पिछले विचारों पर जाने के लिए स्वतंत्र नहीं छोड़ना है। अतः आपको एक बेहतर विश्वसनीय लगने वाली व्याख्या या एक ऐसा सिद्धांत प्रस्तुत करने की ज़रूरत है, जो कि पढ़ने वाले के लिए समझ में आने योग्य और सार्थक हो।
  • उपमाएं और मॉडल उस समय उपयोग हो सकते हैं, जबकि वे नये विचारों को प्रस्तुत करते हों। उदाहरण के लिए, आप उस समय पानी में कणों का नमूना प्रदर्शित करने के लिए स्वयं विद्यार्थियों के नमूनों का उपयोग कर सकते हैं, जब वह गर्म करके ठंडा किया गया हो।
  • चर्चा का समय इस बात की दलील देता है कि पढ़ाई व्यक्तिगत गतिविधि नहीं वरन सामाजिक गतिविधि है। चर्चा के जरिये, विद्यार्थी अन्य के साथ अपने स्वयं के विश्वासों की तुलना कर सकते हैं। चर्चाएं विद्यार्थियों को प्रश्न उठाने और नये विचारों के लिए प्रमाण का समर्थन करने के मूल्य पर विचार करने में समर्थ बनाती हैं। चर्चा संज्ञानात्मक संघर्ष के अनुभव और नये विचारों का बोध प्राप्त करने में विद्यार्थियों की मदद करती है। चर्चाएं हालांकि समय लेती हैं पर अगर सार्थक पढ़ाई करनी है, तो ये अति आवश्यक हैं।
  • विज्ञान का इतिहास हो सकता है आपके विद्यार्थी विज्ञान को एक कठिन विषय पाएं और सोचें कि यह ‘तीक्ष्ण बु्द्धि वाले’ लोगों के लिए है। यह तथ्य प्रायः एक चमत्कार पैदा करने वाली जानकारी से कम नहीं होता कि पूर्व के कतिपय अति मेधावी वैज्ञानिकों के भी वही विचार थे जो उनके अपने हैं। अनेक लेखक अवधारणात्मक परिवर्तन के लिए अध्यापन में कथा वाले दृष्टिकोण के उपयोग समर्थन करते हैं (मैसन और वैजक्वेज-अबाद, 2006)। इसमें काल-क्रम के अनुसार वैज्ञानिक संकल्पना के क्रमिक विकास की कहानी कही जाती है। इस प्रकार की अवधारणाएं अक्सर सरल से जटिल तथा मूर्त से अमूर्त की ओर जाती हैं। वैज्ञानिकों के विचारों के परीक्षण के जरिये विद्यार्थी अपने स्वयं के विचारों की जांच कर सकते हैं और यह काम वे सहज तरीके से कर सकते हैं।

अतिरिक्त संसाधन

References

Masson, S. and Vázquez-Abad, J. (2006) ‘Integrating history of science in science education through historical microworlds to promote conceptual change’, Journal of Science Education and Technology, vol. 15, no. 3, pp. 257–68.
Millar, R. (2000) ‘Energy’ in Sang, D. (ed.) Teaching Secondary Physics. London: John Murray.
Sanger, M.J. and Greenbowe, T.J. (2000) ‘Addressing student misconceptions concerning electron flow in aqueous solutions with instructions including computer animations and conceptual change strategies’, International Journal of Science Education, vol. 22, no. 5, pp. 521–37.
Vosniadou, S., Ioannides, C., Dimitrakopoulou, A. and Papademetriou, E. (2001) ‘Designing learning environments to promote conceptual change in science’, Learning and Instruction, vol. 11, no. 4, pp. 381–419.

Acknowledgements

अभिस्वीकृतियाँ

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