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गणितीय संयोजन : गुणनखंड और गुणज ज्ञात करना

यह इकाई किस बारे में है

गुणनखंडों और गुणजों का पता लगाना गणित का एक अनिवार्य हिस्सा है। इन अवधारणाओं का उपयोग कम उम्र से शुरू हो जाता है, जब कम उम्र के विद्यार्थी गुणा और सहभाजन पर काम कर रहे हों। विद्यालय स्तर पर, वर्षों गणित शिक्षण के उपरान्त यह अवधारणा बन पाती है, और इन अवधारणाओं का अत्यंत उच्च स्तरीय गणित में उपयोग किया जाता है।

इस इकाई में, आप गुणनखंडों और गुणजों की अवधारणाओं के अपने अध्यापन के बारे में विचार करेंगे, और महत्तम समापवर्तक (HCF) और लघुतम गुणज (LCM) की धारणाओं का प्रयोग करेंगे। गतिविधियों के दौरान आप भी गणितीय विचारों और गणितीय अवधारणाओं के बीच सम्बन्ध बनाने के लिए अपने विद्यार्थीयों की क्षमता के विस्तार करने के विषय में सोचेंगे। पाठ्यपुस्तक अक्सर एक गणित के शिक्षक का सबसे मूल्यवान संसाधन है, लेकिन वह अध्यापन का दायरा सीमित कर सकता है। इस इकाई में आप पाठ्यपुस्तक का और अधिक रचनात्मक तरीके़ से उपयोग करने के बारे में सोचेंगे।

आप इस इकाई में क्या सीख सकते हैं

  • पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों को किस प्रकार समृद्ध और अधिक दिलचस्प सवालों में बदलें।
  • आपके विद्यार्थियों को उत्तर खोजने में ध्यान केंद्रित करने के बजाय गणित के सवाल हल करने की प्रक्रिया पर संकेंद्रण (फोकस) में मदद के लिए कुछ सुझाव।
  • गणितीय अवधारणाओं और गुणों के बीच किस प्रकार संबंध स्थापित करें।

इस यूनिट का संबंध संसाधन 1 में दर्शाई गई NCF (2005) और NCFTE (2009) शिक्षण आवश्यकताओं से है।

1 पाठ्यपुस्तकों से सीखने में कुछ समस्याएँ

गणितीय अवधारणाओं के बीच संबंध जोड़ना एक विषय के रूप में गणित को समझने का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। अनुसंधान से पता चलता है कि जो शिक्षक अपने अध्यापन में संबंध जोडत़े हैं, वे उनसे कहीं ज्यादा सफल होते हैं जो संबंध नहीं जोडत़े हैं (Askew etal., 1997)– संबंध जोड़ना अक्सर गणित का मज़ेदार हिस्सा भी होता है। संबंध जोड़ना प्रायः कारगर नहीं होता, जब विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों के प्रश्नों का उपयोग कर रहे हों, क्योंकि तब ध्यान इस बात पर केंद्रित होता है कि जल्द से जल्द प्रश्नों को हल कर लें, और ये प्रश्न प्रायः अवधारणा के केवल एक पहलू के बारे में होते हैं, जैसे कि किसी संख्या के सभी गुणनखंडों को सूचीबद्ध करना।

जब विद्यार्थी पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करते हैं, तब हमेशा शिक्षा का उद्देश्य उन्हें स्पष्ट नहीं किया जाता है। वे प्रश्नों का सही हल ढूँढ़ने में इतने उलझ सकते हैं कि वे शिक्षा के किसी परिप्रेक्ष्य के बारे में जानना भूल जाएँ, जोकि सिखाया जाना है।

विचार के लिए रुकें

अपनी कक्षा के किसी हाल के गणित पाठ के बारे में सोचे। आपके विद्यार्थी क्या गणित सीख रहे थे? वे गणितीय रूप से किस हद तक सोच रहे थे? वे गणितीय अवधारणाओं और अनुमानों के बीच किस हद तक संबंध बना रहे थे? आपको ऐसा क्यों लगता है?

इस इकाई में गतिविधियाँ किसी भी पाठ्यपुस्तक में पाए जाने वाले प्रश्नों और उदाहरणों के आधार पर हैं। उसके बाद अतिरिक्त प्रश्न पूछे जाएँगे ताकि विद्यार्थियों को यंत्रवत हल ढूँढ़ने के बजाय उनके द्वारा किए जा रहे कार्य के बारे में वास्तव में सोचने के लिए विवश करें, जैसे कि:

  • आपने यह हल कैसे निकाला?
  • उन प्रश्नों के लिए आपके उत्तर में क्या एकसमान है और क्या अलग है?
  • आपके सोचने की प्रक्रिया में क्या समान है और क्या अलग है?

जब विद्यार्थियों को सीखने और संबंध जोड़ने की प्रक्रिया के बारे में सोचने का अवसर दिया जाता है, वे सीखना सीखेंगे। लेकिन, पहले विद्यार्थी इस प्रकार के प्रश्नों के बारे में सोचने में असहज महसूस कर सकते हैं, क्योंकि उनके लिए पहले इस प्रकार सोचना ज़रूरी नहीं था। अतः, उदाहरण के लिए समूहों या जोड़ों में उनके साथियों के साथ काम करने के माध्यम से, विद्यार्थियों के लिए सहायता की आवश्यकता होगी।

2 गणित समझने के लिए संबंध जोड़ना

विद्यार्थी बहुत ही कम उम्र में गुणनखंडों और गुणजों का अध्ययन और उपयोग करते हैं। माध्यमिक स्कूल में, विद्यार्थियों के लिए आवश्यक होता है कि वे संख्याओं के HCF (महत्तम समापवर्तक) और LCM (लघुत्तम गुणज) का अध्ययन करें। व्यंजकों के साथ काम करते समय उन्हें इस ज्ञान को लागू करने में सक्षम होना चाहिए। इस प्रकार इन विषयों और अवधारणाओं का अलग–अलग समय पर, और अलग–अलग वर्षों में अध्ययन किया जाता है। इसलिए, विद्यार्थी जो वे पढ़ रहे हैं, उसके विभिन्न पहलुओं के बीच संबंध को देखने के लिए असफल हो सकते हैं, और इसके परिणामस्वरूप उनका ज्ञान खंडित हो सकता है। विद्यार्थी अक्सर अंतर्निहित सिद्धांतों को समझने के बजाय, हर चरण पर शब्दशः याद करने पर भरोसा करते हैं, जिससे गुणनखंडों और गुणजों की शक्ति को पहचानने में कमी रह जाती है।

गतिविधि 1 का उद्देश्य संख्याओं के गुणनखंडों और व्यंजकों का पता लगाने के लिए शामिल गणितीय सोच प्रक्रियाओं पर ध्यान केंद्रित करके इस विखंडन को संबोधित करना है। विद्यार्थियों को गुणनखंड क्या है, संख्याओं के गुणनखंडों और व्यंजकों में गुणनखंडों के बीच संबंध जोड़ने के लिए कहा जाता है। गतिविधि अपेक्षा करती है कि विद्यार्थी जोड़ों या छोटे समूहों में काम करें और अन्य विद्यार्थियों के साथ अपने विचारों का आदान–प्रदान करें।

इस यूनिट में अपने विद्यार्थियों के साथ गतिविधियों के उपयोग का प्रयास करने के पहले अच्छा होगा कि आप सभी गतिविधियों को पूरी तरह (या आंशिक रूप से) स्वयं करके देखें। यह और भी बेहतर होगा यदि आप इसका प्रयास अपने किसी सहयोगी के साथ करें, क्योंकि जब आप अनुभव पर विचार करेंगे तो आपको मदद मिलेगी। गतिविधियों को स्वयं करके देखने से आपको शिक्षार्थी के अनुभवों के भीतर झांकने का मौका मिलेगा, जो अप्रत्यक्ष रूप से आपके शिक्षण और एक शिक्षक के रूप में आपके अनुभवों को प्रभावित करेगा। जब आप तैयार हों, तो अपने विद्यार्थियों के साथ गतिविधियों का उपयोग करें। पाठ के बाद, सोचें कि गतिविधि किस तरह हुई और उससे क्या सीख मिली। इससे आपको विद्यार्थी केन्द्रित शैक्षिक वातावरण के निर्माण में अधिक मदद मिलेगी।

गतिविधि 1: संख्याओं और व्यंजकों के गुणनखंडों का पता लगाना

चित्र 1 छोटे समूहों में कार्य कर रहे विद्यार्थी।

अपने विद्यार्थियों से कहें:

  • निम्नलिखित संख्याओं और व्यंजकों के विभिन्न गुणनखंडों को सूचीबद्ध करें।
    • 60
    • 3xy
    • 15
    • 12x2y3
    • 3x4 – 27x4
    • 2x2 – 8x + 8
  • आपके विचार में कुछ संख्याओं के केवल दो गुणनखंड क्यों होते हैं?
  • अपने समूह में दूसरों को गुणनखंडों का पता लगाने की अपनी विधि का वर्णन करें। क्या आप सभी ने एक ही विधि का उपयोग किया था? क्या सभी प्रश्नों के साथ सभी विधियों ने अच्छी तरह काम किया?
  • गुणनखंड क्या है इसकी उदाहरण सहित स्वयं अपनी परिभाषा या व्याख्या लिखें कि उसे कैसे पाया जा सकता है।

जब आपके विद्यार्थी जोड़े या छोटे समूहों में इन कार्यों को हल करने का प्रयास कर लें, तब कक्षा को एक साथ मिलाएँ और गुणनखंड की अपनी परिभाषा साझा करने के लिए अलग–अलग विद्यार्थियों से पूछें। अन्य सवालों के लिए उनके जवाब खोजने हेतु प्रारंभिक बिंदु के रूप में इन परिभाषाओं का प्रयोग करें। सावधानी से ध्यान दें कि आपके सवालों के जवाब कौन दे रहा है – क्या हमेशा एक ही विद्यार्थी जवाब दे रहे हैं? अपनी सोच को साझा करने के लिए अन्य विद्यार्थियों में आप किस प्रकार आत्मविश्वास विकसित कर सकते हैं?

संसाधन 2 और 3, ‘सामूहिक कार्य का उपयोग करना’ तथा ‘सीखने के लिए बातचीत’, में इन विषयों पर अधिक जानकारी है।

वृत्त–अध्ययन 1: गतिविधि 1 के उपयोग का अनुभुभव श्रीमती कपूर बताती हैं

यह एक शिक्षिका की कहानी है, जिसने अपने माध्यमिक कक्षा के विद्यार्थियों के साथ गतिविधि 1 का प्रयास किया।

मैंने विद्यार्थियों को चार के समूहों में विभाजित किया, ताकि वे परस्पर सहायता कर सकें और उन्हें विचारों के समृद्ध संग्रहण का अधिक मौका़ मिल सके। मैंने प्रत्येक समूह के विद्यार्थियों के नाम के साथ दीवार पर नोटिस चिपका कर, उन्हें समूहों में व्यवस्थित किया। मैंने विद्यार्थियों के प्रत्येक समूह में ऐसे विद्यार्थियों का मिश्रण रखने का प्रयास किया, जो गणित सीखने के प्रति आश्वस्त थे और ऐसे विद्यार्थी भी जो उतना आश्वस्त नहीं थे। मेरा उद्देश्य था कि अधिक आत्मविश्वास वाले विद्यार्थी दूसरों की सहायता करेंगे।

पूर्ण संख्या के मामले में विद्यार्थियों ने बड़ी आसानी से गुणनखंडों को पा लिया, लेकिन व्यंजकों से जुड़ी संख्याओं के बारे में काफी़ बहस हुई। यह अधिकांश समूहों में हुआ, इसलिए मैंने सोचा कि पूरी कक्षा के सामने इन प्रश्नों पर चर्चा करना सहायक हो सकता है। पहले मैंने उनसे पूरी कक्षा के लिए एक छोटा प्रस्तुतिकरण तैयार करने के लिए कहा; ये रहा उसका परिणामः

  • उन्होंने काफ़ी सटीकता से 60 के गुणनखंड के रूप में 1, 2, 3, 4, 5, 6, 10, 12, 15, 20, 30 तथा 60 की पहचान की – हालाँकि कुछ समूह उनमें से कुछ चूक गए थे, पर उन्होंने चूकने वाली संख्याओं को जल्दी से लिख लिया। इससे चर्चा होने लगी कि उन्हें व्यवस्थित होने की ज़रूरत है, और व्यवस्थित होने में कौन–सा दृष्टिकोण सहायक हो सकता है।
  • दूसरे प्रश्न में, कुछ समूहों ने केवल तीन गुणनखंडों को पहचानाः 3 XY, 3, तथा X और Y .
  • कई समूह अभाज्य गुणकों को नोटिस करने और यह समझाने में काफ़ी अच्छे रहे कि ये विशेष हैं, क्योंकि इन्हें केवल स्वयं द्वारा या 1 से विभाजित किया जा सकता है।

मैं वाक़ई चाहती थी कि विद्यार्थी संख्याओं और व्यंजकों के गुणनखंडों के बीच समानताओं को नोटिस करें। पहले क़दम के रूप में मैंने पूछा, ‘किस तरह भाज्य गुणक, अभाज्य गुणकों से अलग हैं?’

वे इससे थोड़ा चकित हो गए, इसलिए मैंने कहा, ‘ठीक है, उदाहरण के रूप में 60 के गुणनखंडों को देखो। अब अपना वाक्य इस प्रकार शुरू करो कि: ”भाज्य गुणक अलग हैं क्योंकि …“.–’ इसका उत्तर देने के लिए कई विद्यार्थी स्वेच्छा से आगे आए, लेकिन वह न तो स्पष्ट और ना ही संक्षिप्त लग रहा था – जो मेरे विचार में अच्छी चर्चा या शिक्षण को प्रोत्साहित नहीं करेगा। मैंने उन्हें ‘बोलने का ढाँचा’ देने का निर्णय लिया, जैसे कि भाषा शिक्षण में कभी–कभी लेखन ढाँचा दिया जाता है। इसलिए मैंने उनसे कहा, ‘पहले अपने साथी को सुनाने का प्रयास करो और फिर मैं तुमसे पूरी कक्षा को सुनाने के लिए कहूँगी।’

उन्होंने कुछ मिनटों के उस प्रकार एक दूसरे के अपनी सोच को शब्दों में ढालने का अभ्यास किया। मैंने यह भी नोटिस किया कि उनमें से कुछ अपनी कही हुई बात को अपनी अभ्यास पुस्तिकाओं में लिख रहे थे, शायद इसलिए कि पूछे जाने पर यह न भूलें कि उन्हें क्या कहना है। लग रहा था कि बोलने के ढाँचे ने वाक़ई उनकी मदद की, क्योंकि जब उनके वाक्यों को साझा करने की बारी आई, तब उनके जवाब स्पष्ट और संक्षिप्त थे और उन्होंने सटीक तरीक़े से गणितीय भाषा का उपयोग किया। वे यह नोटिस करने और अभिव्यक्त करने में कामयाब रहे कि भाज्य गुणक ऐसी संख्या हैं, जिन्हें आगे अन्य संख्याओं के गुणनफलों में विघटित किया जा सकता है, जब तक कि केवल अभाज्य गुणकों का उपयोग न किया जाए। मुझे बेहद ख़ुशी हुई! लेकिन उन्होंने अभी भी इस प्रकार के गुणनखंडों और व्यंजकों के गुणनखंडों के बीच संबंध नहीं जोड़ा था।

मेरे मन में पहला विचार बस यह आया कि उन्हें बता दूँ – मेरा ज्ञान उनमें बाँट दूँ। लेकिन वे इतने उत्साह से भरे और अपने विचार बताने के लिए पूरी तरह मग्न थे कि मैं उन्हें बता नहीं पाई। मैं चाहती थी कि वे स्वयं हल ढूँढ़ें, और स्वयं पता लगाने – गणितीय संरचनाओं और उनके संबंधों की सुंदरता को देखने का आनंद महसूस करें। लेकिन मैं कौन से सवाल पूछ सकती थी, ताकि वे संख्याओं के गुणनखंड और व्यंजकों के गुणनखंडों के बीच के संबंध के बारे में जान सके? मेरे मन में कई सवाल और दृष्टिकोण उभरे, लेकिन वे काफी़ जटिल थे, या फिर ‘उन्हें बताना कि वे क्या हैं’ वाले छिपे सवाल! क्या होगा अगर मैं उन्हें बता देती कि मैं वाक़ई उनसे क्या करवाना चाहती थी? इसलिए मैंने कहाः

मैं वास्तव में चाहती हूँ कि आप संख्याओं के गुणनखंडों का पता लगाने, और व्यंजकों के गुणनखंडों को खोजने के बीच संबंध और समानताएँ तथा असमानताएँ खोजें। उदाहरण के लिए, 60 के गुणनखंडों और 3xy के गुणनखंडों के बीच। और मैं सिर्फ़ आपको इसके बारे में बताना नहीं चाहती, मैं चाहती हूँ कि आप इसके बारे में सोचे और स्वयं अपने लिए उसका पता लगाएँ। अतः एक पल के लिए इस पाठ के दौरान हमने जो कुछ चर्चा की उन सबके बारे में सोचें, भाज्य और अभाज्य गुणनखंडों के बीच अंतर के बारे में, और 60 तथा 3xy के लिए आपने जो गुणनखंड पाया, उस पर ग़ौर करें। क्या समान है, क्या अलग है? क्या आपने सभी के लिए सभी गुणनखंड पा लिए? अपने समूहों में उनके बारे में विचार करें।

और उन्होंने 3xy के नामौजूद गुणनखंडों को ढूँढ़ ही लिया। उन्होंने 3x4 – 27x2 के लिएः उसे 3x2(x2 – 9) के रूप में पुनः लिखते हुए और फिर गुणनखंडों की 3, x, x2, (x2−9), x(x2 − 9), x2(x2 − 9) तथा 3x2(x2 − 9) के रूप में पहचान करते हुए, गुणनखंडों को पा ही लिया।

केवल उसके बाद हम प्रयुक्त पद्धतियों के बारे में विचार करने के लिए आगे बढ़े। हमें वह अगले पाठ में करना पड़ा, क्योंकि हमारे पास समय नहीं बचा था। यह कोई समस्या नहीं थी, क्योंकि अगले पाठ में मैं वापस पिछले पाठ के बारे में सोचने के लिए उनसे कह सकी। मैंने उनसे अपनी अभ्यास पुस्तिकाओं को देखने के लिए कहा कि उन्होंने क्या किया था और उनकी क्या सोच रही थी, और फिर से अपने विचार दर्ज करने के लिए कहा। विधियों के विवरण समझने का कार्य सुगमता से संपन्न हुआ, शायद इसलिए कि हमने पहले ही उसके बारे में बहुत विचार किया था। हमने पूरी कक्षा के साथ विभिन्न विधियाँ साझा कीं, और यदि किसी विधि में कोई कमी थी या कोई विधि अधिक जटिल थी, तो उन्होंने परस्पर एक दूसरे को सुधारा। हमने दरअसल ‘श्रीमती कपूर की कक्षा में सुझाई गई विधि’ के साथ समापन किया, और उसे कागज़ के बड़े टुकड़े पर लिखा और फिर दीवार पर प्रदर्शित किया।

अपने शिक्षण अभ्यास में दिखाना

जब आप अपनी कक्षा के साथ ऐसी कोई गतिविधि करें, तो बाद में सोचे कि क्या ठीक रहा और कहाँ गड़बड़ हुई। ऐसी बातें ऐसी ’स्क्रिप्ट’ पता करने में सहायक होती हैं, जिससे आप विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि जगा सकें और उसे मनोरंजक बना सकें। यदि वे कुछ भी समझ नहीं पाते हैं तथा कुछ भी नहीं कर पाते हैं, तो वे शामिल होने में कम रुचि लेंगे। जब भी आप गतिविधियाँ करें, इस विचार करने वाले अभ्यास का उपयोग करें, जैसे कि श्रीमती कपूर ने किया, कुछ छोटी–छोटी चीज़ों से काफ़ी फ़र्क पड़ा।

विचार के लिए रुकें

इस पाठ के बाद, अपने साथी शिक्षक के साथ इन प्रश्नों के बारे में बातचीत करने का समय निकालें:

  • आपकी कक्षा कैसी रही?
  • विद्यार्थियों से किस प्रकार की प्रतिक्रिया अनपेक्षित थी? क्यों?
  • अपने विद्यार्थियों की समझ का पता लगाने के लिए आपने क्या सवाल किए?
  • क्या आपको लगा कि आपको किसी समय हस्तक्षेप करना होगा?
  • किन बिंदुओं पर आपको लगा कि आपको और समझाना होगा?

3 तकनीक का अभ्यास करना और LCM और HCF के बीच अंतर पर गौ़र करना

अगली गतिविधि विद्यार्थियों से उनके द्वारा प्रयुक्त विधियों के बारे में विचार करने को कहने का अभ्यास विकसित करती है। पुनः यह गतिविधि, पाठ्यपुस्तकों में पाई जाने वाली गतिविधि के समान ही है। अंतर यह है कि यह किसी गतिविधि में सामान्य गुणजों और गुणनखंडों का पता लगाने की दृष्टि से विद्यार्थियों को प्रश्नों का मिश्रण उपलब्ध कराता है। दूसरा फ़र्क यह अनुरोध करना है कि वे प्रयुक्त विधियों पर नोट्स तैयार करें। पाठ्यपुस्तक गतिविधि में इन संशोधनों का उद्देश्य विद्यार्थियों को विषयों के बीच के संबंध अवगत कराना, समानता और अंतर पर गौ़र करना, और स्पष्टता के लिए इसमें शामिल गणितीय सोच प्रक्रियाओं को आज़माना है। पुनः, विद्यार्थियों को काम करने के इस नए तरीके के साथ संलग्न करने में मदद करने के लिए, आप जब अपनी कक्षा में इस गतिविधि को करवाएँ, तब उन्हें जोड़े या छोटे समूहों में काम करने के लिए कहना सहायक सिद्ध हो सकता है।

गतिविधि 2: तकनीक का अभ्यास तथा LCM और HCF के बीच अंतर पर ध्यान देना

अपने विद्यार्थियों से कहें:

  • निम्नलिखित के सामान्य गुणनखंडों और गुणजों का पता लगाएँ: [इन प्रश्नों को बोर्ड पर लिखें।]
    • 48 और 72
    • x2 और 3xy
    • Square root of 18 और Square root of 32
    • (a – b)2 और (a – b)3
    • (a2 – b2) और (a3 – b3)
  • इन्हें हल करने के लिए आपके द्वारा प्रयुक्त विधियों को लिखें।
  • अब अपने साथी को समझाएँ कि ये विधियाँ गणितीय रूप से सही हैं। यदि आप किसी साथी के साथ काम कर रहे हैं, तो विद्यार्थियों की एक और जोड़ी को समझाने की कोशिश करें।

केस स्टडी 2: शिक्षक फ़राज़ गतिविधि 2 के उपयोग के बारे में बताते हैं

विद्यार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ पहला प्रश्न हल किया। दूसरे प्रश्न ने कुछ चर्चा छेड़ी लेकिन तीसरे प्रश्न को अधिकांश ने छोड़ दिया। इस तीसरे प्रश्न के लिए मैंने मूल चिह्न के अंदर गुणनखंडों को पाने का संकेत दिया, और फिर कुछ लोगों ने लगभग तुरंत हल ढूँढ़ लिया। चौथे प्रश्न पर थोड़ी बहुत चर्चा छिड़ी , लेकिन उन्हें उसका समाधान मिल गया। लेकिन, अंतिम प्रश्न के लिए, कुछ जोड़ों ने सामान्य गुणनखंड के रूप में a2 – b2 और गुणज के रूप में a3 – b3 बताया।

उन्होंने एल्गोरिथ्म के अनुसार अपनी विधियों का वर्णन किया। वे दोहराते रहे कि उन्होंने नियम बताया है और उन्होंने सीखा है कि यही नियम है और मैंने उन्हें ऐसा ही बताया था! सच कहूँ तो इसने मुझे भी कुछ आत्म–विश्लेषण करने के लिए बाध्य किया! लेकिन मैं अड़ा रहा और उनसे पूछते रहा कि वे कैसे जानते हैं कि उन्हें प्रत्येक चरण करने की अनुमति है और वे प्रत्येक चरण क्यों हल कर रहे हैं। मैंने उन्हें अपनी छोटी बहन की कल्पना करने को कहा, जो ‘क्यों?’ का सवाल पूछती ही रहती है, और जो ‘क्योंकि मैं कह रहा हूँ’ जवाब से संतुष्ट नहीं होती।

विचार के लिए रुकें

  • विद्यार्थियों से किस प्रकार की प्रतिक्रिया अनपेक्षित थी? क्यों?
  • अपने विद्यार्थियों की समझ का पता लगाने के लिए आपने क्या सवाल किए?
  • क्या आपने किसी भी रूप में काम को संशोधित किया? यदि ऐसा है, तो आपने ऐसा किस कारण से किया?

4 मनगढंत विद्यार्थियों के कार्य से सीखना

अब आप ऐसे असंख्य गतिविधियों से संलग्न हैं, जो आपके विद्यार्थियों को सामान्य गुणनखंडों और गुणजों का पता लगाने में शामिल गणितीय प्रक्रियाओं के बारे में सोचने में मदद करते हैं, ताकि वे विश्लेषण कर सकें और अपने स्वयं की विधियों का वर्णन कर सकें।

अगली गतिविधि विद्यार्थियों को गंभीर रूप से अपने द्वारा किए जा रहे कार्य और मिलने वाली सीख के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित करने की दूसरी पद्धति दर्शाती है। यह गतिविधि विद्यार्थियों को कुछ काल्पनिक विद्यार्थियों की कार्य पद्धतियों का गंभीर रूप से विश्लेषण करने और कारण बताने के लिए प्रेरित करती है कि क्यों उन विद्यार्थियों की कार्य पद्धति गणितीय रूप से मान्य है (या नहीं है)। काल्पनिक विद्यार्थियों के कार्यों का उपयोग करना संभाव्य ग़लतफ़हमियों को उजागर करने में कारगर साबित होती है, क्योंकि इसमें भावनात्मक प्रतिक्रियाओं और शर्मिंदगी की भावनाओं से बचा जा सकता है। क्योंकि यह कार्य स्वयं उन विद्यार्थियों का या उनके किसी सहपाठी का नहीं है, वे इस बात का लिहाज़ न करते हुए बात कर सकते हैं कि उनकी कही बात से किसी को शर्मिंदा होना पड़ेगा या किसी को परेशानी हो सकती है। कार्य और समृद्ध हो सकता है, क्योंकि वैसे तो प्रस्तुत कोई पद्धति ग़लत नहीं होगी, लेकिन संभव है – उसकी सीमाएँ हों।

गतिविधि 3: मनगढंत विद्यार्थी के कार्य का उपयोग करना

अपने विद्यार्थियों से कहें कि मीना, दीपक, आदित्य और अनीश से निम्नलिखित हल करने को कहा गयाः

five divided by 12 minus three divided by 10
  1. मीना ने इस प्रकार हल कियाः
     
    equation left hand side equals right hand side five divided by 12 multiplication five minus three divided by 10 multiplication six
    equation left hand side equals right hand side five minus three divided by 60
  2. दीपक ने सोचा कि इसे ऐसे हल करना चाहिएः
     
    equation left hand side equals right hand side five multiplication five divided by 12 multiplication five minus three multiplication six divided by 10 multiplication six
    equation left hand side equals right hand side 25 divided by 60 minus 18 divided by 60
    equation left hand side equals right hand side 25 minus 18 divided by 60 plus 60
    equation left hand side equals right hand side seven divided by 120
  3. आदित्य आश्वस्त था कि हल करने की विधि यही हैः
     
    equation left hand side equals right hand side five multiplication five divided by 12 multiplication five minus three multiplication six divided by 10 multiplication six
    equation left hand side equals right hand side 25 divided by 60 minus 18 divided by 60
    equation left hand side equals right hand side 25 minus 18 divided by 60 plus 60
    equation left hand side equals right hand side seven divided by 120
  4. अनीश ने उसे इस प्रकार हल कियाः
     
    equation left hand side equals right hand side five multiplication five divided by 12 multiplication five minus three multiplication six divided by 10 multiplication six
    equation left hand side equals right hand side 25 minus 18 divided by 60
    equation left hand side equals right hand side seven divided by 60

अपने साथी के साथ इन विधियों में से प्रत्येक पर चर्चा करें।

  • क्या वे गणितीय रूप से सही, ग़लत, या आंशिक रूप से सही हैं?
  • क्यों?
  • आपको कैसे पता?

फिर पूरी कक्षा को एकजुट करें और विद्यार्थियों को अलग–अलग जोड़ों को अपनी प्रतिक्रिया प्रस्तुत करने के लिए कहें। प्रत्येक प्रतिक्रिया पर पूछें कि क्या अन्य विद्यार्थी सहमत हैं और उन्हें अपने जवाब साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें। इस प्रकार की कक्षा चर्चा में शिक्षक के रूप में आपकी भूमिका समन्वयक की है, न की अपनी राय देने की। इसलिए आप ‘क्या हर कोई सहमत हैं?’ और ‘क्या आप अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करना चाहते हैं?’ जैसे वाक्यांशों का प्रयोग कर सकते हैं। आपको विद्यार्थियों को एक दूसरे की बात सुनने और परस्पर समझ विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।

केस स्टडी 3: शिक्षक फ़राज़ गतिविधि 3 का उपयोग करने के बारे में बताते हैं

विद्यार्थियों को जोड़े में वर्गीकृत किया गया ताकि दोनों विद्यार्थियों से इनपुट और विचार सामने आ सके। मैंने इस बार बड़ा समूह नहीं बनाने का फै़सला किया, क्योंकि मैंने सोचा कि इस काम के लिए विस्तृत पठन और चर्चा की आवश्यकता है। जोड़ों में समूहन (Pair groupings), निकट रहकर काम करने का परिवेश मुहैया कराते हैं, जहाँ प्रत्येक विद्यार्थी के काम को बारीक़ी से परखा जा सकता है।

मैं बहुत ज्यादा बहस सुन पा रहा था, जहाँ विद्यार्थी एक दूसरे से सवाल कर रहे थे और जब वे असहमत होते, तो कारण पूछ रहे थे। जब प्रत्येक आइटम पर पकड़ जमाने के लिए उन्हें पर्याप्त समय मिल चुका, तब हमने ब्लैकबोर्ड पर एक के बाद एक काल्पनिक विद्यार्थियों द्वारा अपनाई गई विधियों पर चर्चा की। प्रत्येक के लिए मैंने विद्यार्थी को ब्लैकबोर्ड के पास आने और शिक्षक बन कर चर्चा को निर्देशित करने के लिए कहा। पहला प्रयास थोड़ा अव्यवस्थित था, जहाँ कुछ विद्यार्थी चिल्ला रहे थे, लेकिन जब मैंने कहा कि कोई नहीं चिल्लाएगा और केवल हाथ ऊपर उठाएँगे, तो चर्चा में वाक़ई सुधार हुआ और वह मूल्यवान लगा। मैं बाज़ू खड़ा हो गया, कभी–कभी दूसरा विचार पेश करता, लेकिन मेरी ओर से बहुत कम हस्तक्षेप होने दिया।

विचार के लिए रुकें

  • आपने अपने विद्यार्थियों को जोड़ों में कैसे व्यवस्थित किया? क्या आपने उन्हें अपना साथी चुनने दिया या आपने बताया कि वे किसके साथ काम करेंगे?
  • अपने विद्यार्थियों की समझ का पता लगाने के लिए आपने क्या सवाल किए?
  • क्या आपको लगा कि आपको किसी समय हस्तक्षेप करना होगा?
  • किन बिंदुओं पर आपको लगा कि आपको और समझाना होगा?

आप इस गतिविधि का गणित पाठ्यक्रम के कई अन्य क्षेत्रों में प्रयोग कर सकते हैं। अगले महीने आपके द्वारा पढ़ाए जाने वाले विषयों के बारे में सोचे। विद्यार्थियों को आम तौर पर कौन से विषय बहुत कठिन लगते हैं? क्या आपके पास पिछले वर्षों से विद्यार्थियों के कार्य के उदाहरण मौजूद हैं? कक्षा में उपयोग के लिए गतिविधि 3 जैसी किसी गतिविधि की योजना बनाएँ। अपने स्कूल या समूह में अन्य शिक्षकों के साथ अपने विचार साझा करें। इस प्रकार आप पाठ्यपुस्तक के आधार पर अपने अध्यापन के लिए दिलचस्प गतिविधियों का एक फ़ोल्डर तैयार कर सकते हैं।

5 पाठ्यपुस्तकों से प्रश्नों का अनुकूलन

इस इकाई की अंतिम गतिविधि दर्शाती है कि आप किस प्रकार कुछ कठिन प्रश्नों को हल करने और उनके गणित पाठ्यक्रम में विभिन्न जगहों की पहचान करने में विद्यार्थियों की मदद कर सकते हैं, जहाँ उन्हें HCF और LCM का उपयोग करना होगा, और, इसलिए, उनके जोड़ने या घटाने से पहले बराबर संख्या प्राप्त करें। उन्हें यह भी पूछा जाएगा कि इन सवालों में क्या समान है और क्या अलग है, ताकि वे उन स्थितियों के बारे में जान सकें, जिनमें उन विधियों और प्रक्रियाओं का उपयोग करना होगा। विद्यार्थियों से पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों को इस प्रकार हल करने के लिए कहने से उन्हें शामिल गणितीय सोच प्रक्रियाओं के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

गतिविधि 5: पाठ्यपुस्तकों से प्रश्नों का अनुकूलन

अपने विद्यार्थियों से निम्न प्रश्नों को ध्यान से देखने के लिए कहें:

negative three divided by 10 plus five divided by six
cap c times o times s times cap a divided by one minus cap s times i times n times cap a plus one plus cap s times i times n times cap a divided by cap c times o times s times cap a
24 divided by 18 minus x plus 24 divided by 18 plus x equals one
five divided by open x plus one close times open x minus two close plus two divided by open x minus two close times open x plus three close
  • क्या उपर्युक्त प्रश्नों में कोई समानताएँ हैं? क्या ‘गणितीय अंतर’ आप देख सकते हैं?
  • आप इन प्रश्नों को कैसे हल करेंगे?
  • क्या इसे हल करने का कोई सही या ग़लत तरीक़ा है?
  • विभिन्न विषयों के लिए एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों के अभ्यास पर नज़र डालें और देखें कि क्या आप ऐसे अभ्यासों को पहचान सकते हैं, जहाँ आपका ऐसे प्रश्नों से सामना हुआ था।
  • इन प्रश्नों में क्या समान है और क्या अलग है?

जब आपके अधिकांश विद्यार्थियों को कुछ और अभ्यास मिल जाए, तो उनकी चर्चा को रोक दें और उनसे पूरी कक्षा के साथ अपने विचार साझा करने के लिए कहें। पुनः, आपकी भूमिका एक सुगमकर्ता की होगी, जो उनकी सोच को चुनौती देंगे और एक दूसरे से स्पष्टीकरण चाहने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करेंगे।

विचार के लिए रुकें

  • विद्यार्थियों से किस प्रकार की प्रतिक्रिया अनपेक्षित थी? क्यों?
  • आपने कैसे अपने विद्यार्थियों की समझ का मूल्यांकन किया? क्या इस अभ्यास ने उनके शिक्षण को सुधारने में मदद की?
  • क्या आपने किसी भी रूप में काम को संशोधित किया? यदि ऐसा है, तो आपने ऐसा किस कारण से किया?

पुनः, आप अपने विद्यार्थियों को गणितीय संबंध बनाने में मदद करने के लिए, विभिन्न प्रकरणों हेतु इस अभ्यास का उपयोग कर सकते हैं। इससे गणित के प्रति उनका आत्मविश्वास विकसित होगा और विशेषतः जब किसी अपरिचित समस्या को हल करने के लिए उनसे कहा जाए।

6 सारांश

इस इकाई ने गुणजों और गुणनखंडों को सिखाने के लिए विचारों को खोजा, ताकि यह स्पष्ट कर सकें कि किस प्रकार एक अवधारणा को गणितीय पाठ्यक्रम के विभिन्न अंशों के माध्यम से पिरोया जा सकता है। NCF (2005) और NCFTE (2009) से पढ़ाने की आवश्यकताओं को अक्सर महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस इकाई की अवधारणाएँ दर्शाती हैं कि पाठ्यपुस्तक के प्रश्नों का रचनात्मक रूप से उपयोग विद्यार्थियों को संबंध समझने और संरचनाओं को देखने की अनुमति देता है। यदि विद्यार्थी तर्क का उपयोग करेंगे, कथनों की सत्यता या असत्यता के बारे में बहस करेंगे, और समानता और असमानताएँ ढूँढ़ेंगे, तो वे गणित की अवधारणाओं का जाल देखना और समझना शुरू कर देंगे। स्कूली शिक्षा के प्रारंभिक वर्षों में किसी अवधारणा को प्रभावी रूप से समझना, बाद में बहुत अधिक जटिल विचारों के साथ काम करने के लिए ज़रूरी है, क्योंकि यह विद्यार्थियों को यह समझने में मदद करता है कि उन्हें क्यों नई अवधारणाओं से सम्बद्ध किया जा रहा है, जब कि उनका कोई तत्काल अनुप्रयोग मौजूद नहीं दिखता।

संसाधन

संसाधन 1: NCF/NCFTE शिक्षण आवश्यकताएं

यह यूनिट NCF (2005) तथा NCFTE (2009) की निम्न शिक्षण आवश्यकताओं से जोड़ता है तथा उन आवश्यकताओं को पूरा करने में आपकी मदद करेगाः

  • शिक्षार्थियों को उनके शिक्षण में सक्रिय प्रतिभागी के रूप में देखें न कि सिर्फ ज्ञान प्राप्त करने वाले के रूप में; ज्ञान निर्माण के लिए उनकी क्षमताओं को कैसे प्रोत्साहित करें; रटने की पद्धतियों से शिक्षण को दूर कैसे ले जाएँ।
  • विद्यार्थियों को गणित को किसी ऐसी चीज़ के रूप में लेने दें जिसके बारे में वे बात करें, जिसके द्वारा संवाद करें, जिसकी आपस में चर्चा करें, जिस पर साथ मिल कर कार्य करें।
  • विद्यार्थियों को संबंधों को अनुभव करने के लिए कल्पना का उपयोग करने दें, संरचनाएँ देखने दें, चीज़ों का पता लगाने दें, कथनों की सत्यता या असत्यता पर बहस करने दें।
  • पाठ्यचर्या, पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों का गंभीर रूप से परीक्षण करते हुए उनसे जुड़ें, न कि बिना कोई सवाल किए ‘दिए’ गए रूप में उन्हें स्वीकार करें।

संसाधन 2: समूहकार्य का उपयोग करना

समूहकार्य एक व्यवस्थित, सक्रिय, अध्यापन कार्यनीति है जो विद्यार्थियों के छोटे समूहों को एक आम लक्ष्य की प्राप्त के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। ये छोटे समूह संरचित गतिविधियों के माध्यम से अधिक सक्रिय और अधिक प्रभावी सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं।

समूह में कार्य करना

विद्यार्थियों को सोचने, संवाद कायम करने, समझने और विचारों का आदान–प्रदान करने और निर्णय लेने के लिए प्रोत्साहित करके सीखने हेतु उन्हें प्रेरित करने का बहुत ही प्रभावी तरीका हो सकता है। आपके विद्यार्थी दूसरों को सिखा भी सकते हैं और उनसे सीख भी सकते हैं: यह सीखने का एक सशक्त और सक्रिय तरीका है।

समूहकार्य में विद्यार्थियों का समूहों में बैठना ही काफी नहीं होता है; इसमें स्पष्ट उद्देश्य के साथ सीखने के साझा कार्य पर काम करना और उसमें योगदान करना शामिल होता है। आपको इस बात को लेकर स्पष्ट होना होगा कि आप सीखने के लिए समूहकार्य का उपयोग क्यों कर रहे हैं और जानना होगा कि यह भाषण देने, जोड़ी में कार्य या विद्यार्थियों के स्वयं अपने बलबूते पर कार्य करने के ऊपर तरजीह देने योग्य क्यों है। इस तरह समूहकार्य को सुनियोजित और प्रयोजनपूर्ण होना चाहिए।

समूहकार्य को नियोजित करना

आप समूहकार्य का उपयोग कब और कैसे करेंगे यह इस बात पर निर्भर करेगा कि अध्याय के अंत तक आप कौन सी सीखने की प्रक्रिया पूरी करना चाहते हैं। समूहकार्य को आप अध्ययन के आरंभ, अंत या उसके बीच में शामिल कर सकते हैं, लेकिन आपको पर्याप्त समय का प्रावधान करना होगा। आपको उस काम के बारे में जो आप अपने विद्यार्थियों से पूरा करवाना चाहते हैं और समूहों को संगठित करने के सर्वोत्तम तरीके के बारे में सोचना होगा।

एक शिक्षक के रूप में, आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि समूहकार्य सफल हो यदि आप निम्न के बारे में पहले से योजना बनाते हैं:

  • सामूहिक गतिविधि के लक्ष्य और अपेक्षित परिणाम
  • गतिविधि के लिए आवंटित समय, जिसमें कोई भी प्रतिक्रिया या सारांश कार्य शामिल है
  • समूहों को कैसे बाँटें (कितने समूह, प्रत्येक समूह में कितने विद्यार्थी, समूहों के लिए मापदंड)
  • समूहों को कैसे संगठित करें (समूह के विभिन्न सदस्यों की भूमिका, आवश्यक समय, सामग्रियाँ, रिकार्ड करना और रिपोर्ट करना)
  • कोई भी आकलन कैसे किया और रिकार्ड किया जाएगा (व्यक्तिगत आकलनों को सामूहिक आकलनों से अलग पहचानने का ध्यान रखें)
  • समूहों की गतिविधियों पर आप कैसे निगरानी रखेंगे।

समूहकार्य के काम

वह काम जो आप अपने विद्यार्थियों को पूरा करने को कहते हैं वह इस पर निर्भर होता है कि आप उन्हें क्या सिखाना चाहते हैं। समूहकार्य में भाग लेकर, वे एक–दूसरे को सुनने, अपने विचारों को समझाने और आपसी सहयोग से काम करने जैसे कौशल सीखेंगे। तथापि, उनके लिए मुख्य लक्ष्य है जो विषय आप पढ़ा रहे हैं उसके बारे में कुछ सीखना। कार्यों के कुछ उदाहरणों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:

  • प्रस्तुतिकरण: विद्यार्थी समूहों में काम करके शेष कक्षा के लिए प्रस्तुतिकरण तैयार कर सकते हैं। यह तब सबसे बढ़िया काम करता है जब प्रत्येक समूह के पास विषय का अलग अलग पहलू होता है, ताकि उन्हें एक ही विषय को कई बार सुनने की बजाय एक दूसरे की बात सुनने के लिए प्रेरित किया जा सके। प्रस्तुतिकरण करने के लिए प्रत्येक समूह को दिए गए समय के बारे में काफी सख्ती बरतें और अच्छे प्रस्तुतिकरण के लिए मापदंडों का एक समुच्चय तय करें। इन्हें अध्याय से पहले बोर्ड पर लिखें। विद्यार्थी मापदंडों का उपयोग अपने प्रस्तुतिकरण की योजना बनाने और एक दूसरे के काम का आकलन करने के लिए कर सकते हैं। मापदंडों में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
    • क्या प्रस्तुतिकरण स्पष्ट था?
    • क्या प्रस्तुतिकरण सुसंरचित था?
    • क्या प्रस्तुतिकरण से मैंने कुछ सीखा?
    • क्या प्रस्तुतिकरण ने मुझे सोचने पर मजबूर किया?
  • समस्या का हल करना: विद्यार्थी किसी समस्या या समस्याओं की श्रृंखला को हल करने के लिए समूहों में काम करते हैं। इसमें विज्ञान में प्रयोग करना, गणित में समस्याओं को हल करना, अंग्रेजी में किसी कहानी या कविता का विश्लेषण करना, या इतिहास में प्रमाण का विश्लेषण करना शामिल हो सकता है।
  • किसी शिल्पकृति या उत्पाद का सृजन करना: विद्यार्थी किसी कहानी, नाटक के अंश, संगीत के अंश, किसी अवधारणा को समझाने के लिए मॉडल, किसी मुद्दे पर समाचार रिपोर्ट या जानकारी का सारांश बनाने या किसी अवधारणा को समझाने के लिए पोस्टर को विकसित करने के लिए समूहों में काम करते हैं। नए विषय के आरंभ में विचारमंथन या मानसिक चित्रण के लिए समूहों को पाँच मिनट देकर आप इस बारे में बहुत कुछ जान सकेंगे कि उन्हें पहले से क्या पता है, और इससे अध्याय को उपयुक्त स्तर पर स्थापित करने में आपको मदद मिलेगी।
  • विभेदित काम: समूहकार्य अलग अलग उम्रों या दक्षता स्तरों वाले विद्यार्थियों को किसी उपयुक्त काम पर मिलकर काम करने का अवसर प्रदान करता है। उच्चतर दक्षता वालों को काम को स्पष्ट करने के अवसर से लाभ मिल सकता है, जबकि कमतर दक्षता वाले विद्यार्थियों को कक्षा की बजाय समूह में प्रश्न पूछना अधिक आसान लग सकता है, और वे अपने सहपाठियों से सीखेंगे।
  • चर्चा: विद्यार्थी किसी मुद्दे पर विचार करते हैं और एक निष्कर्ष पर पहुँचते हैं। इसके लिए आपकी ओर से काफी तैयारी की जरूरत पड़ सकती है ताकि सुनिश्चित हो कि विद्यार्थियों के पास विभिन्न विकल्पों पर विचार करने के लिए पर्याप्त ज्ञान है, लेकिन किसी चर्चा या वाद–विवाद को आयोजित करना आप और उन, दोनों के लिए बहुत लाभदायक हो सकता है।

समूहों को संगठित करना

चार या आठ के समूह आदर्श होते हैं लेकिन यह आपकी कक्षा के आकार, भौतिक पर्यावरण और फर्नीचर, तथा आपकी कक्षा की दक्षता और उम्र के दायरे पर निर्भर करेगा। आदर्श रूप से समूह में हर एक को एक दूसरे से मिलने, बिना चिल्लाए बातचीत करने और समूह के परिणाम में योगदान करना चाहिए।

  • तय करें कि आप विद्यार्थियों को कैसे और क्यों समूहों में विभाजित करेंगे; उदाहरण के लिए, आप समूहों को मित्रता, रुचि या मिश्रित दक्षता के अनुसार विभाजित कर सकते हैं। अलग अलग तरीकों से प्रयोग करें और समीक्षा करें कि प्रत्येक कक्षा के लिए क्या सर्वोत्तम ढंग से काम करता है।
  • इस बात की योजना बनाएं कि समूह के सदस्यों को आप क्या भूमिकाएं देंगे (उदाहरण के लिए, नोट्स लेने वाला, प्रवक्ता, टाइम कीपर या उपकरण का संग्रहकर्ता), और कि इसे कैसे स्पष्ट करेंगे।

समूहकार्य का प्रबंधन करना

अच्छे समूहकार्य को प्रबंधित करने के लिए आप दिनचर्याएं और नियम निर्धारित कर सकते हैं। जब आप समूहकार्य का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तब विद्यार्थियों को पता चल जाता है कि आप क्या चाहते हैं और वे उसे आनंदमय पाएंगे। आरंभ में टीमों और समूहों में मिलकर काम करने के लाभों को पहचानने के लिए आपकी कक्षा के साथ काम करना एक अच्छा विचार होता है। आपको चर्चा करनी चाहिए कि अच्छा समूहकार्य बर्ताव क्या होता है और संभव हो तो ’नियमों’ की एक सूची बना सकते हैं जिसे प्रदर्शित किया जा सकता है(उदाहरण के लिए, ’एक दूसरे के लिए सम्मान’, ’सुनना’, ’एक दूसरे की सहायता करना’, ’एक विचार से अधिक को आजमाना’ आदि।

समूहकार्य के बारे में स्पष्ट मौखिक अनुदेश देना महत्वपूर्ण है जिसे ब्लैकबोर्ड पर संदर्भ के लिए लिखा भी जा सकता है। आपकोः

  • अपनी योजना के अनुसार अपने विद्यार्थियों को उन समूहों की ओर निर्देशित करना होगा जिनमें वे काम करेंगे। ऐसा आप शायद कक्षा में ऐसे स्थानों को निर्दिष्ट करके कर सकते हैं जहाँ वे काम करेंगे या किसी फर्नीचर या विद्यालय के बैगों को हटाने के बारे में अनुदेश देकर कर सकते हैं।
  • कार्य के बारे में बहुत स्पष्ट होना और उसे बोर्ड पर लघु अनुदेशों या चित्रों के रूप में लिखना चाहिए। अपने शुरू करने से पहले विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने की अनुमति प्रदान करें।

अध्याय के दौरान, कमरे में घूमकर देखें और जाँचें कि समूह किस प्रकार काम कर रहे हैं। यदि वे कार्य से विचलित हो रहे हैं या अटक रहे हैं तो जहाँ जरूरत हो वहाँ सलाह प्रदान करें।

आप कार्य के दौरान समूहों को बदलना चाह सकते हैं। जब आप समूहकार्य के बारे में आत्मविश्वास महसूस करने लगें तब दो तकनीकें आजमाई जा सकती हैं – वे बड़ी कक्षा को प्रबंधित करते समय खास तौर पर उपयोगी होती हैं:

  • विशेषज्ञ समूह: प्रत्येक समूह को अलग अलग कार्य दें, जैसे विद्युत उत्पन्न करने के एक तरीके पर शोध करना या किसी नाटक के लिए किरदार विकसित करना। एक उपयुक्त समय के बाद, समूहों को पुनर्गठित करें ताकि हर नया समूह सभी मूल समूहों से आए एक ’विशेषज्ञ’ से बने। फिर उन्हें ऐसा काम दें जिसमें सभी विशेषज्ञों के ज्ञान की तुलना करना शामिल हो जैसे निश्चय करना कि किस तरह के पॉवर स्टेशन का निर्माण करना है या नाटक के अंश को तैयार करने का निर्णय करना।

  • ’दूत’: यदि काम में कुछ बनाना या किसी समस्या का हल करना शामिल है, तो कुछ देर बाद, हर समूह से किसी अन्य समूह को एक दूत भेजने के कहें। वे विचारों या समस्या के हलों की तुलना कर सकते हैं और फिर वापस अपने समूह को सूचित कर सकते हैं। इस तरह से, समूह एक दूसरे से सीख सकते हैं।

काम के अंत में, इस बात का सारांश बनाएं कि क्या सीखा गया है और आपको नज़र आने वाली गलतफहमियों को सही करें। आप चाहें तो हर समूह की प्रतिक्रिया सुन सकते हैं, या केवल उन एक या दो समूहों से पूछ सकते हैं जिनके पास आपको लगता है कि अच्छे विचार हैं। विद्यार्थियों की रिपोर्टिंग को संक्षिप्त रखें और उन्हें अन्य समूहों के काम पर प्रतिक्रिया देने को प्रोत्साहित करें, जिसमें उन्हें पहचानना चाहिए कि क्या अच्छी तरह से किया गया है, क्या दिलचस्प था और किसे आगे और विकसित किया जा सकता है।

यदि आप अपनी कक्षा में समूहकार्य को अपनाना चाहते हैं तो भी आपको कभी–कभी इसका नियोजन कठिन लग सकता है क्योंकि कुछ विद्यार्थीः

  • सक्रिय सीखने की प्रक्रिया का प्रतिरोध करते हैं और उसमें संलग्न नहीं होते
  • हावी होने लगते हैं
  • खराब अंतर्वैयक्तिक कौशलों या आत्मविश्वास के अभाव के कारण भाग नहीं लेते हैं।

समूहकार्य में प्रभावी बनने के लिए, शिक्षण के परिणाम कितनी हद तक पूरे हुए और आपके विद्यार्थियों ने कितनी अच्छी तरह से प्रतिक्रिया की (क्या वे सभी लाभान्वित हुए?) जैसी बातों पर विचार करने के अलावा, उपरोक्त सभी बिंदुओं पर विचार करना महत्वपूर्ण होता है। समूह के काम, संसाधनों, समय–सारणियों या समूहों की रचना में किसी भी समायोजन पर विचार करें और सावधानीपूर्वक उनकी योजना बनाएं।

शोध ने सुझाया है कि समूहों में सीखने की प्रक्रिया को हर समय ही विद्यार्थियों की उपलब्धि पर सकारात्मक प्रभावों से युक्त होना जरूरी नहीं है, इसलिए आप हर अध्याय में इसका उपयोग करने के लिए बाध्य नहीं हैं। आप चाहें तो समूहकार्य का उपयोग एक पूरक तकनीक के रूप में कर सकते हैं, उदाहरण के लिए विषय परिवर्तन के बीच अंतराल या कक्षा में चर्चा को अकस्मात शुरु करने के साधन के रूप में कर सकते हैं। इसका उपयोग विवाद को हल करने या कक्षा में अनुभवजन्य शिक्षण गतिविधियाँ और समस्या का हल करने के अभ्यास शुरू करने या विषयों की समीक्षा करने के लिए भी किया जा सकता है।

संसाधन 3: सीखने के लिए बातचीत

सीखने के लिए बातचीत क्यों जरूरी है

बातचीत मानव विकास का हिस्सा है, जो सोचने–विचारने, सीखने और विश्व का बोध प्राप्त करने में हमारी मदद करती है। लोग भाषा का इस्तेमाल तार्किक क्षमता, ज्ञान और बोध को विकसित करने के लिए औज़ार के रूप में करते हैं। अतः, विद्यार्थियों को उनके शिक्षण अनुभवों के भाग के रूप में बात करने के लिए प्रोत्साहित करने का अर्थ होगा उनकी शैक्षणिक प्रगति का बढ़ना। सीखे गए विचारों के बारे में बात करने का अर्थ होता हैः

  • उन विचारों को परखा गया है
  • तार्किक क्षमता विकसित और सुव्यवस्थित है
  • जिससे विद्यार्थी अधिक सीखते हैं।

किसी कक्षा में रटा–रटाया दोहराने से लेकर उच्च श्रेणी की चर्चा तक विद्यार्थी वार्तालाप के विभिन्न तरीके होते हैं।

पारंपरिक तौर पर, शिक्षक की बातचीत का दबदबा होता था और वह विद्यार्थियों की बातचीत या विद्यार्थियों के ज्ञान के मुकाबले अधिक मूल्यवान समझी जाती थी। तथापि, पढ़ाई के लिए बातचीत में पाठों का नियोजन शामिल होता है ताकि विद्यार्थी इस ढंग से अधिक बात करें और अधिक सीखें कि शिक्षक विद्यार्थियों के पहले के अनुभव के साथ संबंध कायम करें। यह किसी शिक्षक और उसके विद्यार्थियों के बीच प्रश्न और उत्तर सत्र से कहीं अधिक होता है क्योंकि इसमें विद्यार्थी की अपनी भाषा, विचारों और रुचियों को ज्यादा समय दिया जाता है। हम में से अधिकांश कठिन मुद्दे के बारे में या किसी बात का पता करने के लिए किसी से बात करना चाहते हैं, और अध्यापक बेहद सुनियोजित गतिविधियों से इस सहज–प्रवृत्ति को बढ़ा सकते हैं।

कक्षा में शिक्षण गतिविधियों के लिए बातचीत की योजना बनाना

शिक्षण की गतिविधियों के लिए बातचीत की योजना बनाना महज साक्षरता और शब्दावली के लिए नहीं है, यह गणित एवं विज्ञान के काम तथा अन्य विषयों के नियोजन का हिस्सा भी है। इसे समूची कक्षा में, जोड़ी कार्य या सामूहिक कार्य में, आउटडोर गतिविधियों में, भूमिका पर आधारित गतिविधियों में, लेखन, वाचन, प्रायोगिक छानबीन और रचनात्मक कार्य में योजनाबद्ध किया जा सकता है।

यहां तक कि साक्षरता और गणना के सीमित कौशलों वाले नन्हें विद्यार्थी भी उच्चतर श्रेणी के चिंतन कौशलों का प्रदर्शन कर सकते हैं, बशर्ते कि उन्हें दिया जाने वाला कार्य उनके पहले के अनुभव पर आधारित और आनंदप्रद हो। उदाहरण के लिए, विद्यार्थी तस्वीरों, आरेखणों या वास्तविक वस्तुओं से किसी कहानी, पशु या आकृति के बारे में पूर्वानुमान लगा सकते हैं। विद्यार्थी रोल–प्ले करते समय कठपुतली या पात्र की समस्याओं के बारे में सुझावों और संभावित समाधानों को सूचीबद्ध कर सकते हैं।

जो कुछ आप विद्यार्थियों को सिखाना चाहते हैं, उसके इर्दगिर्द पाठ की योजना बनायें और इस बारे में सोचें, और साथ ही इस बारे में भी कि आप किस प्रकार की बातचीत को विद्यार्थियों में विकसित होते देखना चाहते हैं। कुछ प्रकार की बातचीत अन्वेषी होती है, उदाहरण के लिएः ’इसके बाद क्या होगा?’, ’क्या हमने इसे पहले देखा है?’, ’यह क्या हो सकता है?’ या ’आप ऐसा क्यों सोचते हैं कि वह यह है?’ कुछ अन्य प्रकार की वार्ताएं ज्यादा विश्लेषणात्मक होती हैं, उदाहरण के लिए विचारों, साक्ष्य या सुझावों का आकलन करना।

इसे रोचक, मज़ेदार और सभी विद्यार्थियों के लिए संवाद में भाग लेना संभव बनाने की कोशिश करें। विद्यार्थियों को उपहास का पात्र बनने या गलत होने के भय के बिना दृष्टिकोणों को व्यक्त करने और विचारों का पता लगाने में सहज होने और सुरक्षित महसूस करने की जरूरत होती है।

विद्यार्थियों की वार्ता को आगे बढ़ाएं

शिक्षण के लिए वार्ता अध्यापकों को निम्न अवसर प्रदान करती हैः

  • विद्यार्थी जो कहते हैं उसे सुनना
  • विद्यार्थियों के विचारों की प्रशंसा करना और उस पर आगे काम करना
  • इसे आगे ले जाने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करना।

सभी उत्तरों को लिखना या उनका औपचारिक आकलन नहीं करना होता है, क्योंकि वार्ता के जरिये विचारों को विकसित करना शिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आपको उनके शिक्षण को प्रासंगिक बनाने के लिए उनके अनुभवों और विचारों का यथासंभव प्रयोग करना चाहिए। सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी वार्ता अन्वेषी होती है, जिसका अर्थ होता है कि विद्यार्थी एक दूसरे के विचारों की जांच करते हैं और चुनौती पेश करते हैं ताकि वे अपने प्रत्युत्तरों को लेकर विश्वस्त हो सकें। एक साथ बातचीत करने वाले समूहों को किसी के भी द्वारा दिए गए उत्तर को स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। आप समूची कक्षा की सेटिंग में ‘क्यों?’, ‘आपने उसका निर्णय क्यों किया?’ या ‘क्या आपको उस हल में कोई समस्या नजर आती है?’ जैसे जांच वाले प्रश्नों के अपने प्रयोग के माध्यम से चुनौतीपूर्ण विचारशीलता को तैयार कर सकते हैं। आप विद्यार्थी समूहों को सुनते हुए कक्षा में घूम सकते हैं और ऐसे प्रश्न पूछकर उनकी विचारशीलता को बढ़ा सकते हैं।

अगर विद्यार्थियों की वार्ता, विचारों और अनुभवों की कद्र और सराहना की जाती है तो वे प्रोत्साहित होंगे। बातचीत करने के दौरान अपने व्यवहार, सावधानी से सुनने, एक दूसरे से प्रश्न पूछने, और बाधा न डालना सीखने के लिए अपने विद्यार्थियों की प्रशंसा करें। कक्षा में कमजोर बच्चों के बारे में सावधान रहें और उन्हें भी शामिल किया जाना सुनिश्चित करने के तरीकों पर विचार करें। कामकाज के ऐसे तरीकों को स्थापित करने में थोड़ा समय लग सकता है, जो सभी विद्यार्थियों को पूरी तरह से भाग लेने की सुविधा प्रदान करते हों।

विद्यार्थियों को खुद से प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करें

अपनी कक्षा में ऐसा वातावरण तैयार करें जहां अच्छे चुनौतीपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं और जहां विद्यार्थियों के विचारों को सम्मान दिया जाता है और उऩकी प्रशंसा की जाती है। विद्यार्थी प्रश्न नहीं पूछेंगे अगर उन्हें उनके साथ किए जाने वाले व्यवहार को लेकर भय होगा या अगर उन्हें लगेगा कि उनके विचारों का मान नहीं किया जाएगा। विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने के लिए आमंत्रित करना उनको जिज्ञासा दर्शाने के लिए प्रोत्साहित करता है, उनसे अपने शिक्षण के बारे में अलग ढंग से विचार करने के लिए कहता है और उनके नजरिए को समझने में आपकी सहायता करता है।

आप कुछ नियमित समूह या जोड़े में कार्य करने, या शायद ‘विद्यार्थियों के प्रश्न पूछने का समय’ जैसी कोई योजना बना सकते हैं ताकि विद्यार्थी प्रश्न पूछ सकें या स्पष्टीकरण मांग सकें। आपः

  • अपने पाठ के एक भाग को ‘अगर आपका प्रश्न है तो हाथ उठाएं’ नाम रख सकते हैं।
  • किसी विद्यार्थी को हॉट–सीट पर बैठा सकते हैं और दूसरे विद्यार्थियों को उस विद्यार्थी से प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं जैसे कि वे पात्र हों, उदाहरणतः पाइथागोरस या मीराबाई
  • जोड़ों में या छोटे समूहों में ‘मुझे और अधिक बताएं’ खेल खेल सकते हैं
  • मूल पूछताछ का अभ्यास करने के लिए विद्यार्थियों को कौन/क्या/कहां/कब/क्यों वाले प्रश्न ग्रिड दे सकते हैं
  • विद्यार्थियों को कुछ डेटा (जैसे कि विश्व डेटा बैंक से उपलब्ध डेटा, उदाहरणतः पूर्णकालिक शिक्षा में बच्चों की प्रतिशतता या भिन्न देशों में स्तनपान की विशेष दरें) दे सकते हैं, और उनसे उन प्रश्नों के बारे में सोचने के लिए कह सकते हैं जो आप इस डेटा के बारे में पूछ सकते हैं
  • विद्यार्थियों के सप्ताह भर के प्रश्नों को सूचीबद्ध करते हुए प्रश्न दीवार डिज़ाइन कर सकते हैं।

जब विद्यार्थी प्रश्न पूछने और उन्हें मिलने वाले प्रश्नों के उत्तर देने के लिए मुक्त होते हैं तो उस समय आपको रुचि और विचारशीलता के स्तर को देखकर हैरानी होगी। जब विद्यार्थी अधिक स्पष्टता और सटीकता से संवाद करना सीख जाते हैं, तो वे न केवल अपनी मौखिक और लिखित शब्दावलियां बढ़ाते हैं, अपितु उनमें नया ज्ञान और कौशल भी विकसित होता है।

अतिरिक्त संसाधन

References

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De Morgan, A. (1865) ‘A speech of Professor De Morgan, President, at the first meeting of the London Mathematical Society’, Proceedings of the London Mathematical Society, Vol.1 (1866), pp. 1–9.
Marton, F. and Booth, S. (1997) Learning and Awareness. Mahwah, NJ: Erlbaum.
National Council of Educational Research and Training (2005) National Curriculum Framework (NCF). New Delhi: NCERT.
National Council of Educational Research and Training (2009) National Curriculum Framework for Teacher Education (NCFTE). New Delhi: NCERT.
National Council of Educational Research and Training (2012a) Mathematics Textbook for Class IX. New Delhi: NCERT.
National Council of Educational Research and Training (2012b) Mathematics Textbook for Class X. New Delhi: NCERT.
Watson, A., Jones, K. and Pratt, D. (2013) Key Ideas in Teaching Mathematics. Oxford: Oxford University Press.

Acknowledgements

अभिस्वीकृतियाँ

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